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भारत में 9.14 करोड़ बच्चे गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं: रिपोर्ट

पूरी दुनिया में 142 करोड़ लोग ऐसी जगहों पर रह रहे हैं जहां पानी की बहुत ज्यादा कमी है और इसमें 45 करोड़ बच्चे हैं।

Mithilesh DharMithilesh Dhar   22 March 2021 1:04 PM GMT

भारत में 9.14 करोड़ बच्चे गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं: रिपोर्टयूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार भारत के 9.14 करोड़ बच्चे गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। फोटो- AED Photos, Flickr

विश्व जल दिवस से ठीक चार दिन पहले आई यूनिसेफ की रिपोर्ट में पानी की कमी की जो तस्वीर सामने आई है वह बेहद चिंताजनक है। रिपोर्ट के अनुसार भारत के 9.14 करोड़ बच्चे गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। पूरी दुनिया में 142 करोड़ लोग ऐसी जगहों पर रह रहे हैं जहां पानी की बहुत ज्यादा कमी है और इसमें 45 करोड़ बच्चे हैं। रिपोर्ट के अनुसार इस समय दुनिया के हर पांचवें बच्चे को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा।

दुनिया के 190 से ज्यादा देशों में बाल अधिकारों पर काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की संस्था संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ( यूनिसेफ) की 18 मार्च 2021 को आई रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के हर पांचवें बच्चे को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि लगभग 80 से ज्यादा देशों में बच्चे उन जगहों पर रहते हैं जहां पानी की भारी कमी है। पूर्वी और दक्षिण अफ्रीका में स्थिति सबसे ज्यादा ख़राब है। यहां 58 फीसदी से ज्यादा बच्चे पानी की समस्या का सामना कर रहे हैं।

पश्चिम और मध्य अफ्रीका में 31%, दक्षिण एशिया में 25 % और मध्य पूर्व में 23 फीसदी बच्चे जल संकट का सामना कर रहे हैं। संख्या से हिसाब से देखें तो दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा 15.5 करोड़ बच्चे पानी के संकट से जूझ रहे हैं।

वाटर सेक्युर्टी फॉर ऑल नाम से प्रकाशित हुई इस रिपोर्ट में बताया गया है कि स्वच्छ पानी की बढ़ती कमी के कारण दुनियाभर में प्रतिदिन लगभग 700 बच्चों की मौत डायरिया के कारण हो रही है जिसका सम्बन्ध साफ पानी की उपलब्धता से है। यही नहीं इसकी वजह से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।

18 मार्च 2021 को आई रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के हर पांचवें बच्चे को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। फोटो प्रतीकात्मक/ गांव कनेक्शन

रिपोर्ट को प्रकाशित करते समय यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक हेनरीटा फोर ने कहा, "दुनिया में जल संकट आने वाला नहीं, बल्कि पहले से ही मौजूद है। जलवायु परिवर्तन स्थिति को और बदतर बना दे रहा है। जब जल संकट आता है तो इसका सबसे बड़ा शिकार बच्चे ही बनते हैं। जब कुएं सूख जाते हैं तो उन्हें ही अपने स्कूलों को छोड़ पानी भरने जाना पड़ता है। जब सूखा पड़ता है तो बच्चे ही कुपोषण और स्टंटिंग का शिकार बनते हैं।"

"जब बाढ़ आती है तो बच्चे ही दूषित पानी से होने वाली बीमारियों का शिकार बनते हैं और जब पानी की किल्लत होती है तो बच्चे साफ-सफाई नहीं रख पाते, हाथ नहीं धो पाते, ऐसे में वो बीमारियों का आसान शिकार होते हैं।" हेनरीटा फोर ने आगे कहा।

यूनिसेफ की रिपोर्ट


रिपोर्ट में दुनिया के 37 ऐसे देशों की पहचान की गयी है, जिन्हे बच्चों के लिए जल संकट का हॉटस्पॉट माना गया है। इसमें भारत के अलावा अफगानिस्तान, बुर्किना फासो, इथियोपिया, हैती, केन्या, नाइजर, नाइजीरिया, पाकिस्तान, पापुआ न्यू गिनी, सूडान, तंजानिया और यमन आदि देश शामिल हैं। भारत में लगभग 9.14 करोड़ बच्चे गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं।

यूनिसेफ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है वर्ष 2040 तक दुनिया में हर चार में से एक बच्चा पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे क्षेत्र में होगा। वर्ष 2001 से 2018 के बीच 74 फीसदी प्राकृतिक आपदाएं आयी हैं, जिसकी वजह से दुनियाभर में लोगों को एक साथ सूखा और बाढ़ का सामना करना पड़ा। ऐसा जलवायु परिवर्तन की वजह से ही हुआ। आपदाओं से वाटर बॉडी को बहुत नुकसान पहुँचता है और इसका सीधा असर बच्चों पर पड़ता है। जिस तरह से तापमान बढ़ रहा है, आने वाले समय में पानी की समस्या और विकराल रूप लेगी।

"पानी की अनउपलब्धता एक बच्चे के जीवन ही नहीं उसके पैदा होने के सवाल पर ही संभावित निशान लगा देती है। और पैदा होने के बाद अगर पानी होगा तो उसे अच्छा पोषण मिलेगा। अच्छी पढ़ाई लिखाई कर सकेगा।" तरुण भारत के कार्यकारी निदेशक मौलिक सिसौदिया पानी की किल्लत पर होने वाले असर को लेकर कहते हैं।

तरुण भारत संघ पिछले कई दशकों से भारत में जल संकट पर काम करने वाली गैर सरकारी संस्था है। अपनी बात को सरल करते हुए वो कहते हैं, "हम लोग अक्सर खेती के लिए पानी नहीं की बात करते हैं। किसी इलाके में पेयजल संकट की बात करते हैं लेकिन बच्चों के नजरिए कई बार ये देखा ही नहीं गया कि पानी का न होना उनके जीवन पर कितना असर डालता है। गांव में पानी नहीं हो तो अच्छी खेती नहीं है, खेती नहीं है तो पोषण नहीं है, बच्चा मां के गर्भ में है, मां को पोषण नहीं मिल रहा है, बच्चा पैदा हुआ तो मां पानी के लिए कई-कई किलोमीटर जा रही है, इन सब का असर सीधे बच्चे की सेहत और आगे जीवन पर पड़ता है।"

मध्य प्रदेश में डिंडोरी जिले में नर्मदा से पीने का पानी भरकर ले जाते ग्रामीण। फोटो- आकाश पांडे।

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भारत में राजस्थान, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र,कर्नाटक, तमिलनाड़ु समेत कई राज्यों के तमाम इलाकों में मार्च से ही पानी की किल्लत शुरु हो गई है।

मध्य प्रदेश आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले से गांव कनेक्शन ने विश्व जलदिवस पर एक खबर की है, जिसमें बताया गया है कि गांव की महिलाएं नर्मदा से पानी लाने के लिए सुबह 4 बजे उठकर जाती हैं।

पानी का संकट का बच्चों के असर को लेकर अपनी बात में मौलिक सिसौदिया कहते हैं, "आप एक बार राजस्थान में पूर्वे क्षेत्र के करौली और धौलपुर जिलों के आदिवासी इलाकों में आकर देखिए। वहां गंदे पानी की वजह से बच्चे और उनकी माताओं की हालत देखिए, उनकी सेहत और मृत्युदर देखेंगे तो आपको अंदाजा होगा कि पानी तो सबके लिए जरुरी है ही लेकिन बच्चों के लिए उसकी क्या अहमियत है।"

भारत समेत कई देशों में पानी और स्वच्छता आदि मुद्दों को लेकर काम करनी वाली गैर सरकारी संस्था वॉटर एड के उत्तरी भारत के क्षेत्रीय प्रबंधक फारुख रहमान खान फोन पर गांव कनेक्शन को बताते हैं, "बच्चों के लिए पानी बहुत अहम है, उनके पीने से लेकर हाथ धुलने तक। इसलिए आप देखेंगे सरकार स्कूलों और आंगनबाड़ी में जल जीवन मिशन के तहत नल और टैप वॉटर की सप्लाई कराई जा रही है। लेकिन दूरदराज में कहीं हैंडपंप भी न मिलें। खासकर सोनभद्र हुआ इधर बलिया और गंगा के किनारे के इलाके जहां आर्सेनिक और फ्लोराइड का असर है वहां पेयजल बड़ा मुद्दा है।"

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