देश के एक करोड़ से ज्यादा वोटर गैरहाजिर

देश के एक करोड़ से ज्यादा वोटर गैरहाजिरसभी फोटो साभार: इंटरनेट

नई दिल्ली। भारत में एक तरफ जहां गुजरात विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेजी से बढ़ रही हैं, दूसरी ओर उत्तर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव में पार्टियां एड़ी चोटी का जोर लगा रही हैं। ऐसे में वोट पाने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियां लोकलुभावनी घोषणाएं कर रही हैं। मगर इससे इतर इन चुनावों में दिलचस्प बात यह है कि भारत में एक करोड़ से ज्यादा वोटर देश के बाहर हैं यानि अप्रवासी भारतीय, जिन्हें हम अंग्रेजी में नॉन रेजिडेंट इंडियन (एनआरआई) कहते हैं। आइये आपको बताते हैं कि अपने देश के चुनावों में भले ही ये एनआरआई वोट नहीं दे पाते हैं, पर भारत की अर्थव्यस्था पर इनकी बहुत बड़ी भूमिका है।

एक नजर भारत के एनआरआई वोटर पर

आउटलाइन इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, विदेशों में भारत के 1.3 करोड़ एनआरआई हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 30.5 लाख एनआरआई सऊदी अरब में रहते हैं। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात में 28 लाख, अमेरिका में 12.8 लाख, कुवैत में 9.2 लाख, ओमान में 8 लाख, नेपाल में 6 लाख, कतर में 6 लाख, सिंगापुर में 3.5 लाख, ब्रिटेन में 3.3 लाख और बहरीन में 3.1 लाख अप्रवासी भारतीय रहते हैं।

एनआरआई के वोट की भूमिका इसलिए है महत्वपूर्ण

भारत में चुनावों के दौरान पार्टियों के बीच जीत का अंतर घट रहा है, ऐसे में इन एनआरआई के वोट की भूमिका बेहद अहम है और चुनाव में बड़ा अंतर डाल सकती है। अगर हम देश में 543 लोकसभा क्षेत्रों के साथ देखें तो हर क्षेत्र में 23,955 वोट बनते हैं। ऐसे में ये एनआरआई भारत के विभिन्न चुनावों में अपने वोट से महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सिर्फ एक लाख से ऊपर ही एनआरआई वोट कर पाते हैं।

अप्रवासी भारतीयों के वोट को लेकर क्या हैं तैयारियां

केंद्र सरकार एनआरआई को प्रॉक्सी वोट का अधिकार देना चाहती है। हाल में कैबिनेट ने विदेशों में रहने वाले अप्रवासी भारतीयों के लिए प्रॉक्सी वोटिंग की व्यवस्था पर हरी झंडी दी है, अब शीतकालीन सत्र में सरकार इस पर बिल पेश करेगी, जिसके बाद एनआरआई को भी अब भारतीय चुनावों में प्रॉक्सी वोटिंग कर हिस्सेदारी मिल सकेगी। प्रॉक्सी वोटिंग, यानि एनआरआई अपने किसी प्रतिनिधि के जरिए वोट डाल सकेगा।

विपक्षी पार्टियों ने प्रॉक्सी वोटिंग पर जताया था विरोध

देश में कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियां एनआरआई के प्रॉक्सी वोटिंग को लेकर विरोध जताया है। कई विपक्षी पार्टियों के नेताओं का मानना है कि एक व्यक्ति को दो देशों में वोट का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। कांग्रेस के नेताओं ने विरोध करते हुए कानून में संशोधन की मांग की थी।

जानिए, क्यों अपने देश के लिए अहम हैं एनआरआई

भारतीय रिजर्व बैंक की आंकड़ों के मुताबिक, एनआरआई के लिए अलग-अलग तरह की डिपॉजिट स्कीम के तहत वर्ष 2010-11 में अप्रवासी भारतीयों ने देश में 3.2 अरब डॉलर का निवेश किया। वर्ष 2013-14 में एनआरआई के निवेश का यह आंकड़ा 38.4 अरब डॉलर तक पहुंचा। वहीं, 2015-16 में 16 अरब डॉलर का एनआरआई ने अपने देश में निवेश किया है। सिर्फ देशभक्ति की ही बात नहीं, इससे इतर बड़ी बात यह है कि विदेशों में रहने वाले भारतीय भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 4 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखते हैं।

अपने घरों में पैसा भेजने में भी भारतीय सबसे आगे

विदेशों में रहने वाले अप्रवासी भारतीय सभी देशों की तुलना में सबसे ज्यादा पैसा अपने घरों में भेजते हैं। विश्व बैंक की 2016 की रिपोर्ट अनुमानित रेमिटेंस इनफ्लो पर गौर करें तो भारत में 63 अरब डॉलर अप्रवासी भारतीयों ने पैसा अपने घरों में भेजा। इसके बाद चीन है, जिसने 35 अरब डॉलर धन अपने घरों में भेजा। इस सूची में चीन के बाद फिलीपींस (31 अरब डॉलर), मैक्सिको (29 अरब डॉलर), फ्रांस (24 अरब डॉलर), पाकिस्तान (20 अरब डॉलर), नाइजीरिया (19 अरब डॉलर), जर्मनी (17 अरब डॉलर), मिस्र (16 अरब डॉलर) और फिर बांग्लादेश (14 अरब डॉलर) जैसे देश आते हैं।

पंजाब विधानसभा चुनावों में एनआरआई की रही बड़ी भूमिका

देश के पंजाब राज्य के सबसे ज्यादा एनआरआई विदेशों में रहते हैं, इनकी संख्या 35 लाख से ज्यादा है। इसी साल पंजाब विधानसभा चुनाव में एनआरआई की बड़ी भूमिका रही। फंडिंग और समर्थन जुटाने के लिए नेता भारत से कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन जाते रहे हैं, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ था कि विदेशों में बसे पंजाबी इतनी बड़ी तादाद में खुद पंजाब आकर किसी पार्टी के लिए प्रचार किया। अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, इटली और सिंगापुर के हजारों एनआरआई ने पंजाब विधानसभा चुनावों के दौरान पंजाब के गाँव और गलियों में धूल छानी।

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