कुपोषित बच्चों को ताकत देगा सहजन, जानिए सहजन के क्या हैं फायदे

सहजन को मध्य भारत में मुनगा के नाम से भी जाना जाता है, अफ्रीका और एशियाई देशों में पाए जाने वाले इस पेड़ के तमाम हिस्सों जैसे फली, फूल, जड़ें और छाल आदि बतौर व्यंजन इस्तेमाल में लायी जाती है

Chandrakant MishraChandrakant Mishra   16 Aug 2019 5:40 AM GMT

कुपोषित बच्चों को ताकत देगा सहजन, जानिए सहजन के क्या हैं फायदे

ग्रामीण क्षेत्र में पाया जाने वाला सहजन का अब कुपोषण से जंग लड़ेगा। इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है,मुनगा, ड्रम स्टिक और moringa भी कहा जाता है। इस पौधे की पत्तियां, टहनियां, तना, जड़ और गोंद सभी बहुत उपयोगी होते हैं। सहजन की पत्तियों में काफी मात्रा में विटामिन, कैल्शियम और फास्फोरस पाया जाता है। अब अति कुपोषित बच्चों को सहजन की पत्तियां ताकत देंगी। उत्तर प्रदेश में बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए महिला बाल विकास विभाग सहजन के पेड़ लगा रहा है। जिन घरों में अति कुपोषित बच्चे हैं विभाग उनके दरवाजे पर सहजन के पौधे के पौधे रोपे जा रहे हैं। वहीं, मध्य प्रदेश में भी इस तरह की कई योजनाएं संचालित हो रही हैं।

महिला एवं बाल विकास विभाग ने जनपद में सहजन के पौधे के जरिए कुपोषण से लड़ने की पहल शुरू की है। इसके तहत जिले के प्रत्येक अति कुपोषित बच्चे के दरवाजे पर इसका पौधा लगाया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने सुपरवाइजर की देखरेख में पोषक तत्वों से भरपूर यह पौधा लगाएंगी।

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तमाम शोध प्रमाणों से भी साबित हो चुका है कि कैंसर जैसी भयावह समस्या पर काबू पाने के लिए सहजन बेहद कारगर है। सहजन में कई तरह के एंटी कैंसर कंपाउंड पाए जाते हैं जैसे कैमफेरोल, रैह्मनेटिन और आइसो क्वेरसेटिन आदि। अब आधुनिक विज्ञान की मदद से शोधकर्ता लोग सहजन के एंटी कैंसर गुणों पर गहनता से शोध कर रहे हैं।

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हर्बल एक्सपर्ट दीपक आचार्य बताते हैं, " अंग्रेजी में ड्रमस्टिक के नाम से प्रचलित इस वनस्पति की फलियां दक्षिण भारतीय व्यंजनों का एक अहम हिस्सा है। ऐसी मान्यता है कि सब्जियों और दालों में इसकी फल्लियों को मिलाने से इनका स्वाद दोगुना तो हो ही जाता है, साथ ही इसके औषधीय गुणों की वजह से सेहत दुरुस्ती भी हो जाती है।"

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" सहजन को मध्य भारत में मुनगा के नाम से भी जाना जाता है। वैसे अफ्रीका और एशियाई देशों में पाए जाने वाले इस पेड़ के तमाम अंगों जैसे फल्लियाँ, फूल, जड़ें और छाल आदि बतौर व्यंजन इस्तेमाल में लायी जाती है, लेकिन इनका बेजा उपयोग औषधि की तरह कई देशों में किया जाता है।" उन्होंने आगे बताया।


वर्ष 2018 में राज्य पोषण मिशन के एक रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में 50 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषित थे। आजमगढ़ में सबसे ज्यादा कुपोषित बच्चे मिले थे।दूसरे नंबर पर शाहजहांपुर जिला था। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 (एनएफएचएस -4) के आंकड़ों पर किए गए विश्लेषण के अनुसार, 6 से 23 महीने की आयु के 10 भारतीय शिशुओं में से केवल 1 को पर्याप्त आहार मिलता है। नतीजा यह है कि पांच साल से कम उम्र के 35.7 फीसदी बच्चों का वजन सामान्य से कम है। वहीं यूनिसेफ के अनुसार, पहले वर्ष में स्तनपान पांच साल से कम उम्र के बच्चों में करीब करीब पांचवे हिस्से (1/5) की मौतों को रोक सकती हैं।

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गोरखपुर के जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) हेमंत कुमार सिंह ने बताया, " सिर्फ सहजन की सब्जी बल्कि इसकी पत्तियां भी पोषक तत्वों से भरपूर हैं। इनमें वे सभी पोषक तत्व मौजूद हैं जो सेब, केला, संतरा जैसे फलों में होते हैं।

मोरिंगा के औषधीय गुणों को देखते हुए यूपी समेत कई राज्योंं में किसानों ने इसकी खेती भी शुरु की है। बाराबंकी के टांडपुर गांव में अपने खेत में मोरिंगा के पौधे की देखभाल करता किसान।

अति कुपोषित बच्चों के अभिभावक सहजन की पत्तियों को पीस कर पुष्टाहार में मिला कर अपने बच्चों को खिला सकते हैं। इससे कुपोषण की समस्या दूर करने में मदद मिलेगी। गैर सरकारी संगठन सेवा मार्ग से जुड़े विशेषज्ञ एचके शर्मा द्वारा पिछले दिनों जिले के सभी सीडीपीओ को सजहन के पोषकता को लेकर प्रशिक्षित किया गया।"

सहजन की फल्लियों का इस्तेमाल जल शुद्धीकरण में भी किया जा सकता है। इसमें 9 ख़ास अमीनो एसिड्स के अलावा कुल 27 अलग तरह से विटामिन्स, करीब 46 एंटीऑक्सीडेंट्स, और कई अलग अलग तरह के खनिज लवण भी पाए जाते हैं। मजे की बात ये भी है कि पातालकोट में करेयाम गांव के गोंड और भारिया आदिवासी पीने के पानी को शुद्ध करने के लिए सहजन या मुनगा (मोरिंगा ओलिफ़ेरा/ ड्रमस्टिक) की फ़ल्लियों को तोड़कर और तुलसी की कुछ पत्तियों को एक पात्र में डाल देते हैं। इस पात्र में एकत्र किया अशुद्ध या मटमैला जल डाल दिया जाता है। कुछ दो से तीन घंटो बाद पात्र की उपरी सतह से पानी एकत्र कर साफ़ सूती कपड़े से छानकर किसी अन्य पात्र में डाल दिया जाता है जो कि अब पीने योग्य हो जाता है।

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डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान की महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नीतू ने गाँव कनेक्शन को बताया," सहजन के पेड़ में भरपूर मात्रा में विटामिन होता है। इसके अलावा बहुत से जरूरी पोषक तत्व होते हैं। सहजन की सब्जी या सहजन की पत्ती के उपयोग से कुपोषण दूर किया जा सकता है। गर्भवती महिलाएं यदि इसका सेवन करती हैं तो उनके लिए काफी लाभदायक होता है। वहीं कुपोषण के साथ-साथ सहजन का पौधा पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद होता है।"

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