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शिवराज बोले आंदोलन खत्म, कुछ किसान संगठन बोले, लड़ाई जारी रहेगी

Basant KumarBasant Kumar   4 Jun 2017 8:31 PM GMT

शिवराज बोले आंदोलन खत्म, कुछ किसान संगठन बोले, लड़ाई जारी रहेगीप्रदर्शन करते किसान. प्रतीकात्मक तस्वीर 

लखनऊ। प्रदेश में चल रहे किसान आन्दोलन को रोकने के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को कई घोषणाएं की, लेकिन इससे कुछ किसान खुश नहीं हैं।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शाम को ट्वीट करते हुए लिखा, ‘‘मैं अपने किसान भाइयों के हर सुख-दुख में साथ खड़ा हूं। अन्नदाता की किसी भी समस्या का समाधान त्वरित गति से किया जायेगा।’’

मुख्यमंत्री ने आगे लिखा कि ‘‘मप्र सरकार किसान हितैषी है तथा सदैव किसानों के कल्याण के लिए कार्य करती रहेगी। मुझे खुशी है कि हमारे किसान भाइयों ने आंदोलन वापस ले लिया है।’’

किसानों को लेकर सीएम शिवराज सिंह चौहान की महत्वपूर्ण घोषणाएं

सब्जी मंडियों में किसानों को ज्यादा आढ़त देनी पड़ती है इसे रोकने के लिए सब्जी मंडियों को मंडी अधिनियम के दायरे में लाया जायेगा। किसानों की प्याज 8 रुपए प्रति किलो खरीदने का कार्य मंडियों में तीन-चार दिन में शुरू हो जायेगा और जून के अंत तक चलेगा। फसल बीमा योजना को ऐच्छिक बनाया जायेगा नगर एवं ग्राम निवेश एक्ट के अंतर्गत जो भी किसान विरोधी प्रावधान होंगे उन्हें हटाया जायेगा।

गर्मी की मूंग की फसल को सरकार समर्थन मूल्य पर खरीदेगी। किसानों का प्याज 8 रुपए प्रति किलो पर सरकार खरीदेगी।

किसान कृषि उपज मंडी में जो उत्पाद बेचते हैं, उनका 50% उन्हें अब नकद भुगतान प्राप्त होगा तथा 50% RTGS किया जायेगा। मुख्यमंत्री के घोषणा के बाद आन्दोलन कर रहे भारतीय किसान संघ के शिवकांत दीक्षित ने कहा, ‘‘ सरकार ने उनकी सारी बातें मान ली है, अतः इस आंदोलन को स्थगित किया जाता है।’’

वहीं आन्दोलन कर रहे किसानों के दूसरे समूह से जुड़े केदार सिरोही ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने उन संगठनों से मिलकर यह फैसला लिया है जो उनके साथ है। मुख्यमंत्री ने घोषणा में आन्दोलन में किए हुए मांग को नहीं माना है। अपनी घोषणा में मुख्यमंत्री ने किसानों को बरगलाया है। हमारा आन्दोलन रुकेगा नहीं और तेज़ होगा।’’

आंदोलन खत्म करने के ऐलान पर किसानों संगठनों ने मुंड़वाया सिर

केदार आगे कहते हैं, ‘‘हमारी मांग है कि अनाज और सब्जियों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय हो और सरकार खरीदारी करे। सरकार ने सिर्फ प्याज का न्यूनतम दर तय किया और वो भी आठ रुपए के हिसाब से। हमारा प्याज पर ग्यारह रुपए खर्च होता है तो हम आठ रुपए कैसे बेच सकते है। दुग्ध उत्पादकों पर भी ध्यान देने और कर्ज मांफी की मांग थी। सरकार इसमें से एक भी मांग नहीं मानी और अपने मन से जो समझ आया घोषणा कर दी।’’

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