20 साल में पहली बार नहीं मिला MTNL के कर्मचारियों को वेतन, यह है वजह

मुंबई और दिल्‍ली में एमटीएनएल के 24 हजार कर्मचारी हैं। इनमें से 10 हजार 500 कर्मचारी दिल्‍ली में हैं। इन कर्मचारियों का नवंबर महीने का वेतन नहीं मिला है।

Ranvijay SinghRanvijay Singh   2 Dec 2018 1:20 PM GMT

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20 साल में पहली बार नहीं मिला MTNL के कर्मचारियों को वेतन, यह है वजह

लखनऊ। सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी महानगर टेलीकॉम निगम लिमिटेड (MTNL) बुरे दौर से गुजर रही है। भारत सरकार के स्वामित्व वाली इस दूरसंचार कंपनी के कर्मचारियों को नवंबर महीने का वेतन नहीं मिला है। इसके पीछे फंड की कमी को बताया जा रहा है।

एमटीएनएल के डीजीएम (बैंकिंग एंड बजट) की ओर से जारी लेटर में बताया गया है कि फंड की कमी की वजह से कर्मचारियों को नवंबर 2018 की सैलरी नहीं दी जा रही। इसके बाद से ही एमटीएनएल के कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, एमटीएनएल मजदूर संघ ने कार्य बहिष्‍कार की बात भी कही है।

एमटीएनएल मजदूर संघ के जनरल सेक्रेटरी धर्मराज सिंह बताते हैं, ''मुंबई और दिल्‍ली में एमटीएनएल के 24 हजार कर्मचारी हैं। इनमें से 10 हजार 500 कर्मचारी दिल्‍ली में हैं। इन कर्मचारियों का नवंबर महीने का वेतन नहीं मिला है।''

धर्मराज इस समस्‍या पर कहते हैं, ''कंपनी की स्‍थिति खराब है। जितने खर्चे हैं उस हिसाब की कमाई नहीं है। लेकिन बाकी खर्चे रोककर सैलरी जैसा महत्‍वपूर्ण खर्च किया जा सकता है। कंपनी के पास इतना पैसा है। लेकिन मैनेजमैंट बाकी खर्च कर रहा है, पर सैलरी नहीं दे रहा। हमारा रुपया दूरसंचार विभाग (डीओटी) के पास है, बीएसएनएल के पास है। इन पैसों को रिकवर करके सैलरी दे सकते हैं।''

धर्मराज फंड की समस्‍या पर बताते हैं, ''2010 में दूरसंचार विभाग ने 3जी और ब्रॉडबैंड वायरलेस एक्सेस (बीडब्यूए) के स्पेक्ट्रम खरीदने के लिए एमटीएनएल को कहा। इसके लिए कंपनी ने रिजर्व फंड और बैंक से लोन लेकर स्पेक्ट्रम खरीदे। जबकि एमटीएनएल में इसकी जरूरत ही नहीं थी, लेकिन सरकारी कंपनी होने के नाते एक आदेश आया कि आप स्पेक्ट्रम लीजिए। इसके बाद से ही दिक्‍कत शुरू हो गई। कंपनी की हालत यहां से गड़बड़ हो गई। अब जो पैसा हमें अपने नेटवर्क को सुधारने में लगाना था उससे हम बैंक का लोन चुका रहे थे। ऐसे में हमारे सब्‍सक्राइबर भी घट गए, तो ये तो सरकार की देन है।'' धर्मराज टेलिकॉम मैकेनिक के पद पर हैं। वो कहते हैं इससे पहले कभी वेतन नहीं रुका।

1998 में एमटीएनएल को दिल्‍ली और मुंबई में विश्वस्तरीय गुणवता वाली दूरसंचार सेवाएं प्रदान करने के लिए बनाया गया था। इससे पहले ये दूरसंचार विभाग का ही हिस्‍सा था। फिलहाल इस कंपनी में 57 प्रतिशत हिस्‍सेदारी सरकार की है। एमटीएनएल के सेक्‍शन सुपरवाइजर परवेश बताते हैं, ''वो सन 2000 से एमटीएनएल में काम कर रहे हैं। ऐसी स्‍थ‍िति कभी नहीं हुई।''

परवेश शक जाहिर करते हैं कि, ''हम लोग सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहे थे। हो सकता है कंपनी ने इस लिए वेतन रोक लिया ताकि ये बता सकें कि वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं तो सिफारिशों को कहां से लागू किया जाए।''

इस मामले पर एमटीएनएल के सीएमडी पीके पुरवार कहते हैं, ''क्‍या हिंदुस्‍तान में सबको समय से तनख्वाह मिलती है? कई बार ऐसा होता है कि आपके फंड के इशू खड़े होते हैं तो एक दो दिन ऊपर नीचे होता ही है। इस बार फंड कलेक्‍ट नहीं हो पाया तो ऐसा हुआ है।'' फिलहाल एमटीएनएल का संकट गहराता जा रहा है। अधिकारी फंड कलेक्‍ट करने की बात तो कह रहे हैं, लेकिन कर्मचारियों का वेतन अभी तक नहीं आया। ऐसे में एमटीएनएल मजदूर संघ भी कार्य बहिष्‍कार की बात कर रहा है।

  

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