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रिजर्व बैंक ने सरकार को किया आगाह, अगर अब कृषि ऋण माफी की तो राजकोषीय घाटा एक प्रतिशत बढ़ जाएगा

मुंबई (भाषा)। चालू वित्त वर्ष के लिए अपने वृद्धि दर के अनुमान को घटाते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने आज आगाह किया कि किसी तरह के आर्थिक प्रोत्साहन और कृषि ऋण माफी से राजकोषीय घाटा एक प्रतिशत अंक चढ़ जाएगा, जिससे मुद्रास्फीति भी बढ़ सकती है।

केंद्रीय बैंक ने आज चालू वित्त वर्ष की अपनी चौथी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में कहा कि वास्तविक सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) वृद्धि दर 2017-18 में 6.7 प्रतिशत रहेगी। दूसरी तिमाही में यह 6.4 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 7.1 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 7.7 प्रतिशत रहेगी। रिजर्व बैंक ने अगस्त में जीवीए आधार पर वित्त वर्ष के लिए वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था।

सरकार अब अर्थव्यवस्था के लिए प्रोत्साहन पैकेज पर विचार कर रही है। केंद्रीय बैंक ने आगाह किया है कि सरकार के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य में आधा प्रतिशत की चूक से ही मुद्रास्फीति 0.25 प्रतिशत बढ़ जाएगी। इससे संयुक्त (केंद्र और राज्य) राजकोषीय घाटा जीडीपी अनुपात के एक प्रतिशत तक बढ़ जाएगा।

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केंद्रीय बैंक ने 2005 के एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि ऊंचे राजकोषीय घाटे का मतलब है कि इससे मुद्रास्फीति की संभावनाएं और वास्तविक मुद्रास्फीति में इजाफा होगा। रिजर्व बैंक का अनुमान है कि दिसंबर तिमाही के लिए मुख्य मुद्रास्फीति बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो जाएगी। सरकार ने वित्त वर्ष 2017-18 के लिये राजकोषीय घाटा लक्ष्य जीडीपी का 3.2 प्रतिशत रखा है।