तेलंगाना में नगर निगम कर्मियों ने 100 कुत्तों को जहर देकर मारा, चार कर्मचारी निलंबित

तेलंगाना में नगर निगम कर्मियों ने 100 कुत्तों को जहर देकर मारा, चार कर्मचारी निलंबित

लखनऊ। बीते शनिवार को सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें मरे हुए कुत्तों को बड़ी ही बेरहमी से उठाकर ट्रक में फेंका जा रहा है और इस वीडियो को जिस लड़की ने बनाया है वो फूट-फूटकर रो रही है।



यह हादसा हैदराबाद राज्य के तेलंगाना जिले के सिद्दिपेट का है जहां नगर निगम के कर्मियों ने 100 कुत्तों को जहर देकर मार दिया, और मारे हुए कुत्तों को नगर निगम के डंपिंग यार्ड में दफना दिया। मीडिया रिपोट्स के मुताबिक कुत्तों की संख्या को कम करने के लिए यह किया गया। स्थानीय निवासियों की शिकायत के बाद पुलिस ने इस मामले को दर्ज भी किया और चार नगर निगम कर्मियों को निलंबित भी कर दिया है।

पशुओं के अधिकारों के लिए काम कर रही संस्था कम्पैशिनेट सोसाइटी फॉर एनिमल की संस्थापक प्रवालिका बताती हैं, " हमारी सिद्दिपेट की वॉलेंटियर ने इस मामले की सूचना दी कि सिद्दिपेट नगरपालिका के डंप यार्ड में लगभग 50 मरे हुए कुत्ते मिले हैं। इसके बाद हमने सिद्दिपेट के जिलाधिकारी से बात की। उन्होंने मामले को संज्ञान में लिया और सिद्दिपेट नगर पालिका के मुंसिपल कमिश्नर से जांच करने की बात कहीं।"

अपनी बात को जारी रखते हुए उन्होंने गाँव कनेक्शन को फोन पर बताया, "मुंसिपल कमिश्नर ने त्वरित कार्यवाही करते हुए सफाई इंस्पेक्टर सहित चार नगर निगम कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। इस मामले में मुंसिपल कमिश्नर की भूमिका की भी जांच की जा रही है। हमारी जानकारी में मरे हुए कुत्तों की संख्या 200 से ज्यादा है।"

भारतीय दंड संहिता की धारा 428 और 429 के मुताबिक अगर किसी क्षेत्र में कुत्तों की संख्या ज्यादा है तो कोई भी व्यक्ति या स्थानीय प्रशासन पशु कल्याण संस्था के सहयोग से आवारा कुत्तों का बर्थ कंट्रोल ऑपरेशन कर सकती है, लेकिन मार नहीं सकती क्योंकि उन्हें मारना गैरकानूनी है।



पशुचिकित्सकों ने मरे हुए कुत्तों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। जल्द ही कुत्तों के मौत का कारण पता चल सकेगा।

द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के मुताबिक वीडियो बनाने वाली लड़की का नाम विद्या है जो कम्पैशिनेट सोसाइटी ऑफ एनिमल की सदस्य है जिसने सबसे पहले वीडियो बनाया जिसमें कुत्तों के शवों को ट्रक में डाला जा रहा था। द न्यूज मिनट को विद्या ने बताया कि जिन कुत्तों को मारा गया उनमें से 3 कुत्तों को मैं रोजाना खाना खिलाती थी वो कुत्ते मेरे ही मौहल्ले के थे कभी किसी को परेशान नहीं करते थे। शनिवार को जब वह कुत्ते मुझे दिखाई नहीं दिए तो मेरे पड़ोसियों ने बताया कि कुछ कर्मचार को देखा है जो जगह-जगह से कुत्तों को उठा रहे हैं जब मैं उस ट्रक के पास पहुंची तो कुत्ते देखा कुत्तों के शवों को ट्रक में फेंका जा रहा है।

उन कर्मचारियों से जब मैंने पूछा कि ऐसा क्यों कर रहे हैं तो उन्होंने बताया कि यह नगर निगम का आदेश है। मैने कहा कि जानवरों की संख्या को रोकने के लिए प्रशासन ऐसे कैसे कर सकता हैं? अगर किसी ने शिकायत की थी तो उन्हें संख्या को रोकने के लिए कोई दूसरा रास्ता देखना चाहिए था न कि उन्हें जहर देकर मारना चाहिए था।



एंटी बर्थ कंट्रोल (2001) डॉग्स रूल के नियम के मुताबिक कुत्तों को दो श्रेणियों में बांटा गया है। पालतू और आवारा। कोई भी व्यक्ति या स्थानीय प्रशासन पशु कल्याण संस्था के सहयोग से आवारा कुत्तों का बर्थ कंट्रोल ऑपरेशन कर सकती है लेकिन उनको जान से मारना गैर कानूनी है।

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