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मुजफ्फरपुर: बच्चों की मौत के बाद जागा प्रशासन, मेडिकल कॉलेज में 850 बेड की होगी बढ़ोतरी

मुजफ्फरपुर: बच्चों की मौत के बाद जागा प्रशासन, मेडिकल कॉलेज में 850 बेड की होगी बढ़ोतरी

मुजफ्फरपुर। पिछले कुछ दिनों से जिले में एईएस पीड़ितों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। इसको लेकर श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में बेहतर चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने की पहल की गयी है। जिला अधिकारी आलोक रंजन घोष ने मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए इसके विषय में विस्तार से जानकारी दी।

जिला अधिकारी आलोक रंजन घोष ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में बेहतर चिकित्सकीय सुविधा बहाल करने की दिशा में कदम उठाये गए हैं। पूर्व में एसकेएमसीएच में कुल 750 बेड थे जिसे बढाकर कुल 2500 बेड करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए शीघ्र ही 850 बेड की बढ़ोतरी का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि शिशुओं को गहन चिकित्सकीय सुविधा प्रदान करने के लिए कृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट में 100 बेड की बढ़ोतरी का कार्य शुरू किया जाएगा।

साथ ही मरीजों के परिजनों को विशेष सुविधा देने के लिए एसकेएमसीएच में वेटिंग हॉल भी शीघ्र ही निर्मित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रत्येक वर्ष जिले में एईएस के कारण मौत हो रही है। इसे गंभीरता से लेते हुए इसके शोध पर कार्य किया जाएगा एवं जिले में इसे लेकर शोध कमिटी का गठन होगा। इससे एईएस के कारणों का पता चल पाएगा। इससे बेहतर एईएस प्रबंधन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी जिससे एईएस के कारण होने वाली मौतों में कमी आएगी।

चिकित्सकों की कमी होगी पूरी

जिले में अचानक एईएस मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी को देखते हुए चिकित्सकों की जरूरत को महसूस किया गया है। इसको लेकर एसकेएमसीएच में रिक्त चिकित्सकों के पद को भरा जाएगा। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए नए चिकित्सकों की भी बहाली होगी।

सामान्य उपचार एवं सावधानियां

कुछ उपायों के माध्यम से बच्चों को एईएस जैसे गंभीर रोग से बचाया जा सकता है। इसके लिए बच्चे को तेज धूप से बचाएं, बच्चे को दिन में दो बार नहाएं, गरमी बढ़ने पर बच्चे को ओआरएस या नींबू का पानी दें, रात में बच्चे को भरपेट खाना खिलाकर ही सुलाएं, तेज बुखार होने पर गीले कपडे से शरीर को पोछें, बिना चिकित्सकीय सलाह के बुखार की दवा बच्चे को ना दें, बच्चे की बेहोशी की हालत में उसे ओआरएस का घोल दें एवं छायादार जगह लिटायें एवं दांत चढ़ जाने की स्थिति में बच्चे को दाएँ या बाएं करवट लिटाकर अस्पताल ले जाएं। इसके अलावा तेज रौशनी से मरीज को बचाने के लिए आँख पर पट्टी का इस्तेमाल करें एवं यदि बच्चा दिन में लीची का सेवन किया हो तो उसे रात में भरपेट खाना जरुर खिलाएं।

यह करने से बचें-

- बच्चे को मस्तिष्क ज्वर से बचाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरुरी है।

- बच्चों को खाली पेट लीची ना खिलाएं, अधपके एवं कच्चे लीची बच्चों को खाने नहीं दें।

- बच्चों को गर्म कपड़े या कम्बल में ना लिटाएं।

- बेहोशी की हालत में बच्चे के मुंह में बाहर से कुछ भी ना दें।

- बच्चे की गर्दन झुका हुआ नहीं रहने दें।

- आपातकाल की स्थिति में निःशुल्क एम्बुलेंस के लिए टोल फ्री नंबर 102 पर संपर्क करें।

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