जब कड़कनाथ मुर्गे पालने वाली चंपा से मोदी ने की सीधी बात

राजस्थान, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों के किसानों से सीधी बात के दौरान प्रधानमंत्री ने सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के लाभार्थियों से उनके अनुभव सुने और हौसला बढ़ाया।

जब कड़कनाथ मुर्गे पालने वाली चंपा से मोदी ने की सीधी बात

सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के लाभार्थियों से सीधे संवाद करने की पहल को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 20 जून को किसानों से उनसे जुड़़े विषयों एवं कृषि क्षेत्र के मुद्दों के बारे में चर्चा करते हुए कहा, " किसान अन्नदाता हैं, देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हैँ। किसानों ने इसके लिए खून पसीना एक कर दिया लेकिन समय के साथ किसानों का अपना विकास धीरे धीरे सिकुडता गया। शुरू से ही किसानों को उनके नसीब पर छोड् दिया गया। किसानों के विकास के लिए एक निरंतर और वैज्ञानिक प्रयास की जरूरत थी। लेकिन उस काम में बहुत साल विलंब हो गया। इसलिए हमने जमीन के रखरखाव से लेकर अच्छे क्वालिटी के बीच, बिजली, पानी से लेकर, बाजार से लेकर एक संतुलित और व्यापक योजना के तहत कार्य करने का भरसक प्रयास किया। हमने तय किया कि 2022 तक किसान की आमदनी में दोगुनी बढ़ोतरी हो पर बहुत से लोगों ने इसका मजाक उड़ाया कहा, संभव नहीं है मुश्किल है। उन्होंने हमें निराश करने का काम किया।"

इसी बीच देश के अलग-अलग हिस्सों से आए किसानों से विडियो कॉनफ्रेंसिंग करते मोदी ने कड़कनाथ मुर्गे पालने वाली चंपा से बात करने के बाद कहा, "मुझे यह देखकर खुशी हो रही है कि श्रीमति चम्पा निनामा जी कड़कनाथ की फ़ार्मिंग कर अपनी आय बढ़ाने में सक्षम हुई हैं।"

किसानों की हिम्मत की दाद देते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा, "लेकिन मेरे देश का किसान रिस्क लेने को तैयार है, मेहनत करने को तैयार है। हमने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए लक्ष्य निर्धारित किया है। इसको प्राप्त करने में चार बिंदुओं पर बल दिया : पहला है किसान की लागत कच्चे माल की लागत वह कम से कम कैसे हो। दूसरा उसकी उपज का उचित मूल्य मिले। तीसरा उसकी बरबादी रुक जाए। चौथा उसकी आमदनी के लिए वैकल्पिक स्रोत तैयार हो। इसके लिए सरकार ने तय किया कि अधिसूचित फसलों के लिए एमएसपी लागत का डेढ गुना हो। इस लागत में दूसरे श्रमिकों, मवेशियों, बीज, खाद, सिंचाई, मशीन, राज्य सरकार को जो राजस्व, बैंकिंग कैपिटल पर ब्याज, लीज वाली जमीन का किराया भी जुड़ेगा। मेहनत का भी मूल्य जोड़ा जाएगा। इसके लिए बजट में सरकार निश्चित फंड की व्यवस्था की है।"



देश में रिकॉर्ड उत्पादन की मौजूदा की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "आज देश में न सिर्फ अनाज का, बल्कि फल-सब्जियों और दूध का रिकॉर्ड उत्पादन हो रहा है। वर्ष 2017-18 में खाद्यान उत्पादन 280 मिलियन टन से अधिक हुआ है जबकि 2010 से 2014 का औसत उत्पा-दन 250 मिलियन टन था। इसी तरह दलहन के क्षेत्र में भी औसत उत्पा्दन में 10.5% एवं बागवानी के क्षेत्र में 15% की वृद्धि दर्ज हुई है। नीली क्रांति के अंतर्गत मछली पालन के क्षेत्र में 26% वृद्धि हुई तो दूसरी और पशुपालन व दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में करीब 24% की वृद्धि हुई है। हमारा प्रयास है कि किसानों को खेती की पूरी प्रक्रिया में हर कदम पर मदद मिले, यानि बुआई से पहले, बुआई के बाद और फसल कटाई के बाद। सीधे तौर पर कहें तो फसलों के तैयार होने से लेकर बाजार में उसकी बिक्री तक, यानि 'बीज से बाजार तक' फैसले लिए जा रहे हैं। किसान कल्याण के लिए एक पूरी व्यवस्था बने, उस दिशा में हम बढ़ रहे हैं। बुआई से पहले किसान यह जान पाए कि किस मिट्टी पर कौन सी फसल उगानी चाहिए, इसके लिए सॉइल हेल्थ कार्ड शुरू किया गया। एक बार जब ये पता चल जाए कि क्या उगाना है तो फिर किसानों को अच्छी क्वॉलिटी के बीज मिले, उसे पूँजी की समस्या से गुजरना न पड़े, इसके लिए किसान ऋण की व्यवस्था की गई। पहले खाद के लिए लंबी-लंबी कतारें हुआ करती थी लेकिन अब किसानों को आसानी से खाद मिल रहा है। आज किसानों के लिए 100% नीम कोटिंग वाला यूरिया देश में उपलब्ध है।"

सिंचाई और फसल सुरक्षा पर बोलते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा, "पीएम कृषि सिंचाई योजना के तहत आज देश भर में 99 सिंचाई परियोजनाएं पूरी की जा रहीं हैं। हर खेत को पानी मिले, इस लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं। किसानों को फसल को लेकर किसी भी तरह का जोखिम न हो, इसके लिए आज फसल बीमा योजना है। किसानों को खेत की सिंचाई में परेशानी न हो, हर खेत को पानी मिले, पर ड्रॉप, मोर क्रॉप यानि कम पानी और ज्यादा उपज। मैं हमेशा से किसानों को टपक सिंचाई को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता रहा हूँ।

किसानों के लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, "फसल कटाई के बाद जब किसान का उत्पाद बाजार में पहुँचता है, उसमें उसे अपने उपज की सही कीमत मिले, इसके लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म e-NAM शुरू किया गया है ताकि किसानों को अपनी उपज का पूरा पैसा मिल सके और सबसे बड़ी बात कि अब बिचौलिए किसानों का लाभ नहीं मार पाएंगे।"



जोधपुर, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, झाबुआ मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों के किसानों से सीधी बात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर अपनी खुशी जताई कि देश का किसान आधुनिक तकनीक का लाभ उठा रहा है। उन्होंने कहा, "यह अच्छी बात है कि आज हमारा किसान अपनी मेहनत में आधुनिक मशीनों और उपकरणों को भी जोड़ रहा है और इसका लाभ अपने आस-पास के गाँवों में भी पहुंचा रहा है। यह बहुत ख़ुशी की बात है कि अब किसान, किसान उत्पाधदक समूह, (एफपीओ) बनाकर संगठित रूप में कार्य कर रहे हैं जिससे कृषि से जुड़े सामान इनको कम कीमत पर मिलते हैं एवं संगठित रूप से कार्य करने पर इनको उपज के मार्केटिंग में भी मदद मिलती है।"

मोदी ने आगे कहा, "मौसम की मार से हमारा किसान चिंता मुक्त हो, उसका विश्वास बना रहे, इसके लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत न सिर्फ प्रीमियम कम किया बल्कि इंश्योरेंस का दायरा भी बढ़ा दिया गया। कृषि के लिए जमीन की रक्षा हो, जमीन समृद्ध रहे, स्वस्थ रहे, इसके लिए सॉयल हेल्थ कार्ड शुरू किया गया। सॉयल हेल्थ कार्ड से मिल रही जानकारी के आधार पर, जो किसान खेती कर रहे हैं, उनकी पैदावार भी बढ़ रही है, और खाद पर खर्च भी कम हो रहा है।"

देश में ऑर्गेनिक खेती करने वाले पहले राज्य सिक्किम से आए किसान से बात करने के बाद मोदी बोले, "सरकार परंपरागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत ऑर्गेनिक खेती को पूरे देश में प्रोत्साहित करने में जुटी है। विशेष रूप से उत्तर पूर्व को ऑर्गेनिक खेती के हब के तौर पर विकसित किया जा रहा है। आज देश में 22 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर ऑर्गेनिक खेती होती है।"

मछली पालन के विकास के लिए नीली क्रांति की जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री ने किसानों को बताया, "यह समुद्री मछली पालन के विकास एवं मछुआरों के कल्याहण की एक राष्ट्री य योजना है। इसके अन्तीर्गत आर्थिक समृद्धि के लिए एक जिम्मेहदार और टिकाऊ तरीके से प्रयास किया जा रहा है। इसमें मछली उत्पारदन को बढ़ावा देना, मछली पालन का आधुनिकीकरण, भोजन और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना और मछुआरों और जलीय कृषि किसानों को सशक्त बनाने पर बल दिया गया है।"

मोदी का कहना था, "मधुमक्खी भी खेत में किसान के साथ-साथ काम करती हैं लेकिन पशुपालन, मछली पालन, मुर्गी पालन, ये तो प्रचलित हैं लेकिन मधुमक्खी पालन पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया। मधुमक्खी पालन भी किसानों के लिए एक तरह की आय का एक जरिया है। मधुमक्खी पालन ना सिर्फ किसान की उपज बढ़ाने में मदद करता है बल्कि शहद के रूप में अतिरिक्त कमाई का साधन भी बनता है।"

यह बातचीत प्रधानमंत्री के नमोएप और दूरदर्शन पर दिखाई जा रही थी ।

यह भी देखें:प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, अब बिचौलिए किसानों का पैसा मार नहीं सकेंगे

Share it
Top