फसल से उत्पाद बनाकर बेचते हैं ये किसान, कमाते हैं कई गुना मुनाफा

फसल से उत्पाद बनाकर बेचते हैं ये किसान, कमाते हैं कई गुना मुनाफाफूड प्रोसेसिंग के जरिये किसान भढ़ा सकते हैं अपनी आमदनी

नरसिंहपुर/होशंगाबाद (मध्य प्रदेश)। ऐसा कई बार होता है जब किसान की फसल अच्छी होती है, उत्पादन अच्छा होता है, लेकिन किसान को उसकी अच्छी कीमत नहीं मिल पाती है। लेकिन अगर किसान अपनी फसल को सीधे न बेचकर उसकी प्रोसेसिंग करके बेचें तो उससे अच्छा मुनाफा कमा सकता है।

पिछले वर्ष मध्य प्रदेश के मंदसौर में एक ऐसी ही घटना सामने आई थी। यहां प्याज का उत्पादन भारी मात्रा में हुए था लेकिन बाज़ार में उसकी कीमतें इतनी भी नहीं थीं की किसान का बाजार तक प्याज ले जाने में ढुलाई में आया खर्च ही निकल आए। जिसके बाद काफी बवाल हुआ था जिसमें कई किसानों की मौत भी हो गई थी। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए फूडप्रोसेसिंग किसानों के लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है।

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राजेन्द्र कौरव छह एकड़ में धान की खेती करते हैं, लेकिन वो कभी भी सीधे धान नहीं बेचते हैं। राजेन्द्र धान से चावल निकाल कर बेचते हैं जिससे मुनाफा अधिक होता है। राजेन्द्र नरसिंहपुर जिले से 60 किलो मीटर दूर उत्तर दिशा में स्थित साँई खेड़ा ब्लॉक के गरधा गाँव के रहने वाले हैं।

राजेन्द्र कौरव धान से चावल नीकाल कर बेचते हैं।

राजेन्द्र बताते हैं, ''मैं पिछले तीन वर्षों से तीन एकड़ में जैविक तरीके से धान की खेती कर रहा हूं, जिससे लागत तो काफी घट गई है। लेकिन आय को बढ़ाने के लिए मैं सीधे धान नहीं बेचता हूं, उसका चावल बनाकर बेचता हूं।'' वो बताते हैं, ''एक एकड़ में पैदा हुए धान से 20 कुंतल चावल निकलता है। एक कुंतल चावल निकलवाने के लिए 60 रुपए खर्च होते हैं और चावल करीब 8000 रुपए कुंतल बिकता है।'' इस हिसाब से अगर देखें तो राजेन्द्र एक एकड़ धान की फसल से एक लाख साठ हज़ार रुपए कमाते हैं। राजेन्द्र के अनुसार एक एकड़ में जैविक तरीके से धान की खेती करने में 7 हज़ार रुपए की लागत आती है।

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राजेन्द्र बताते हैं, ''एक एकड़ में करीब 30 कुंतल धान होता है और अगर यह 1700 रुपए प्रति कुंतल भी बिकता है तो सिर्फ 51000 रुपए का होगा, जो चावल बेचने के मुकाबले काफी कम है।''

धान की फसल

राजेन्द्र के अलावा किसान राकेश दुबे भी इसी तरीकेे से अपनी फसल को बेचते हैं। राकेश नर्सिंहपुर जिले से आठ किलो मीटर दूर स्थित करताज गाँव के रहने वाले हैं और 40 एकड़ में गन्ने की खेती करते हैं। वो बताते हैं, ''अगर मैं सीधे चीने मिलों को गन्ना बेचू तो उससे मेरी फसल की अच्छी कीमत नहीं मिलती है, इसलिए मैं गन्ने से सिरका, ब्राउन शुगर, शीरा और गुण बनाकर बोचता हूं। इससे कमाई अधिक होती है।'' उन्होंने बताया कि आगर वो सीधे गन्ना बेचें तो चीनी मिल सिर्फ 150 या 200 रुपए कुंतल गन्ना खरीदेंगे जिससे उतना फायदा नहीं होगा और जब वो गन्ने से ये प्रोडक्ट बना लेते हैं तो उसे अपने हिसाब से जब चाहें तब बेचते हैं कोई खराब होने का डर नहीं रहता है। लागत को कम करने के लिए राकेश दुबे गन्ने की खेती पूरी तरह से जैविक करते हैं।

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राकेश दुबे गन्ने से सिरका, ब्राउन शुगर, गुड़ और शीरा बनाकर बेचते हैं।

नरसिंहपुर जिले से करीब 175 किलो मीटर दूर होशंगाबाद के ढाबाकुर्द गाँव के किसान प्रतीक शर्मा जैविक तरीके से खेती करते हैं और ये अपनी फसल को मंडी में बेचने के बजाय सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाते हैं, जिससे लागत कम आती है व मुनाफा अच्छा होता है।

प्रतीक शर्मा गाँव कनेक्शन को बताते हैं, ''मैंने 2015 में बैंक की नौकरी छोड़कर पॉलीहाउस में खेती की शुरुआत की थी। फसल तो बहुत अच्छी पैदा हुई लेकिन मण्डी में उसकी कीमत बहुत कम लगाई गई। इससे मुझे इतने भी रुपये नहीं मिले की ट्रांसपोर्टेशन की लागत निकल आए, फसल से मुनाफा कमाना तो बहुत बड़ी बात थी। उस समय मैं जो खेती करता था उसमें लागत भी बहुत ज़्यादा थी, दूसरा मैं रसायनिक तरीके से खेती करता था जिससे मिलने वाली फसल सेहत के लिए भी काफी नुकसानदेह होती थी।

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प्रतीक शर्मा सब्जियों की खेती करते हैं।

प्रतीक आगे बताते हैं, ''मैंने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर एक टीम बनाई और वर्दा फार्मर्स क्लब की शुरुआत की। इसके बाद हमने कई सब्जि़यां उगाईं और उनको उगाने में काफी कम लागत लगाई, इसके लिए हमने जैविक तरीके से खेती की और उन्हें सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाया।'' वह बताते हैं कि उनके पास साढ़े पांच एकड़ ज़मीन है जिसमें वो 12 - 13 सब्ज़ियां उगाते हैं।

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सीधे उपभोक्ताओं तक सब्ज़ी पहुंचा कर कमाते हैं अधिक मुनाफा।

वो बताते हैं, ''हमने दो हब्स बनाए हैं जहां सारी सब्ज़ियां इकट्ठी होती हैं और फिर वहां से उन्हें भोपाल भेजा जाता है। भोपाल में हमारे कलेक्शन सेंटर हैं जहां इनकी छंटाई, बिनाई और पैकेजिंग होती है। इसके बाद व्हॉट्सऐप पर इनकी एक लिस्ट अपडेट होती है। हमारे जो उपभोक्ता हैं वो वहीं उनका ऑर्डर कर देते हैं और वहीं से इनकी होमडिलीवरी की जाती है।’’

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