दिल्ली के कोर्ट में आज होगी नेशनल हेराल्ड केस की सुनवाई, जानिए कैसे फंसे राहुल और सोनिया गांधी

Mithilesh DubeyMithilesh Dubey   22 April 2017 1:13 PM GMT

दिल्ली के कोर्ट में आज होगी नेशनल हेराल्ड केस की सुनवाई, जानिए कैसे फंसे राहुल और सोनिया गांधीसोनिया गांधी और राहुल गांधी।

नई दिल्ली। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में आज नेशनल हेराल्ड केस की सुनवाई होगी होगी। इस केस में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर धोखा देने की साजिश रचने का आरोप लगा है। भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने वर्ष 2012 में सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर आरोप लगाते हुए याचिका दाखिल की थी। इस केस की पिछली सुनवाई में इस मामले को 22 अप्रैल तक के लिए टाल दिया गया था।

क्या है मामला

8 सितंबर 1938 को लखनऊ में नेशनल हेराल्ड अखबार की स्थापना पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी। इसके पहले संपादक भी जवाहर लाल नेहरू ही थे। बाद में प्रधापमंत्री बनने के बाद भी जवाहर लाल नेहरू नेशनल हेराल्ड बोर्ड के चेयरमैन रहे। अखबार ने बाद में हिंदी नवजीवन और उर्दू कौमी आवाज अखबार का भी प्रकाशन किया था।

नेशनल हेराल्ड को कांग्रेस का मुख्यपत्र भी कहा जा रहा था। 2008 में जब आर्थिक स्थिति खराब हुई तो तो इसका प्रकाशन बंद करने का फैसला लिया गया। 2008 में ही अखबार का मालिकाना हक एसोसिएटेड जर्नल्स को दे दिया गया। इसके बदले में कंपनी एसोसिएट जर्नल्स ने कांग्रेस से बिना ब्याज के 90 करोड़ का कर्ज लिया। कांग्रेस ने कर्ज देने का मकसद कंपनी के कर्मचारियों को बेरोजगार होने से बचाना बताया था।

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बावजूद इसके अखबार का दोबारा प्रकाशन शुरू नहीं हो पाया। 26 अप्रैल 2012 को यंग इंडिया कंपनी ने एसोसिएटेड जर्नल्स का मालिकाना हासिल कर लिया। इस कंपनी में 76 फीसदी शेयर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के हैं जबकि बाकी शेयर सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीज के पास हैं। यंग इंडिया ने हेराल्ड की 1600 करोड़ की परिसंपत्तियां महज 50 लाख में हासिल की।

बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की दलीलें

बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी का आरोप है कि गांधी परिवार हेराल्ड की संपत्तियों का अवैध ढंग से उपयोग कर रहा है। इनमें दिल्ली का हेराल्ड हाउस और अन्य संपत्तियां शामिल हैं। वे इस आरोप को लेकर 2012 में कोर्ट गए।

कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद 26 जून 2014 को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी के अलावा मोतीलाल वोरा, सुमन दूबे और सैम पित्रोदा को समन जारी कर पेश होने के आदेश जारी किए थे। तब से इस आदेश की तामील लंबित है। स्वामी का कहना है कि सोनिया-राहुल की कंपनी यंग इंडिया ने दिल्ली में सात मंजिला हेराल्ड हाउस को किराये पर कैसे दिया। इसकी दो मंजिलें पासपोर्ट सेवा केंद्र को किराये पर दी गईं जिसका उद्घाटन तत्कालीन विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने किया था।

यानि यंग इंडिया किराये के तौर पर भी बहुत पैसा कमा रही है। राहुल ने एसोसिएटेड जर्नल में शेयर होने की जानकारी 2009 में चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में छुपाई और बाद में 2 लाख 62 हजार 411 शेयर प्रियंका गांधी को ट्रांसफर कर दिए।

राहुल के पास अब भी 47 हजार 513 शेयर हैं। आखिर कैसे 20 फरवरी 2011 को बोर्ड के प्रस्ताव के बाद एसोसिएट जर्नल प्राइवेट लिमिटेड को शेयर हस्तांतरण के माध्यम से यंग इंडिया को ट्रांसफर किया गया जबकि यंग इंडिया कोई अखबार या जर्नल निकालने वाली कंपनी नहीं है? कांग्रेस द्वारा एसोसिएट जर्नल प्राइवेट लिमिटेड को बिना ब्याज पर 90 करोड़ रुपये से ज्यादा कर्ज कैसे दिया गया जबकि यह गैर-कानूनी है क्योंकि कोई राजनीतिक पार्टी किसी भी व्यावसायिक काम के लिए कर्ज नहीं दे सकती?

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