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एनसीआरबी की रिपोर्ट: साल 2019 में हर दिन 28 किसानों और 89 दिहाड़ी मजदूरों ने दी जान

वर्ष 2018 की अपेक्षा किसानों की आत्महत्या में थोड़ी कमी तो आई है, लेकिन दिहाड़ी मजदूरों के मामले 8 फीसदी बढ़े हैं। देश में सबसे ज्यादा आत्महत्या एक बार फिर महाराष्ट्र में हुई हैं।

Arvind ShuklaArvind Shukla   3 Sep 2020 4:30 PM GMT

बाढ़, सूखा और अतिवृष्टि के साथ प्राकृतिक आपदाओं के साए में कटे साल 2019 में रोजाना 28 किसानों (खेत मालिक और कृषि मजदूर) और 89 दिहाड़ी मजदूरों ने आत्महत्या की है। ये जानकारी सरकारी संस्थान राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की सालाना रिपोर्ट से मिली है। वर्ष 2019 में 10281 किसानों और खेतिहर मजदूरों ने जान दी है। जबकि 32,559 दिहाड़ी मजूदरों ने इस अवधि में आत्महत्या की है।

साल 2019 में कुल 139,123 लोगों ने पूरे देश में जान दी। जिसमें सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र (18,916) में है। पूरे देश में मौत को गले लगाने वाले लोगों में 7.4 फीसदी लोग खेती से जुड़े (किसान और खेतिहर मजूदर) थे। पिछले कुछ वर्षों से महाराष्ट्र किसानों की कब्रगाह बनता नजर आ रहा है। देश में सबसे अधिक किसान आत्महत्या के मामले महाराष्ट्र से हैं।

नवंबर 2019 मराठवाड़ा के नांदेड़ जिले में में खंभेगांव के रहने वाले युवा किसान गजानद शिंदे (35 वर्ष) का शव उसी पेड़ के नीचे लटका पाया गया, जिसके नीचे खेती में काम करने के दौरान कभी वह सुस्ताया करते थे। बेहद गरीब परिवार के गजानन के सिर पर 60 हजार रुपए का बैंक का कर्ज़ और एक लाख से ज्यादा पैसे साहूकार के थे।

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वर्ष 2019 में 7.4 फीसदी किसान और कृषि मजदूरों ने आत्महत्या की। सोर्स-NCRB

सितंबर-अक्टूबर में हुई भारी बारिश के चलते उनकी 3 एकड़ की सोयाबीन की फसल बर्बाद हो गई थी। उन्होंने कर्ज़ लेकर दोबारा सोयाबीन बोई थी लेकिन वह भी बारिश में बर्बाद हो गई, जिसके बाद परेशान गजानन ने जान दे दी। कर्ज़ में डूबे गजानन के पास एक पक्की छत भी नहीं थी। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में मानसून और पोस्ट मानसून की बारिश से ज्वार बाजरा, सोयाबीन, उड़द कपास, प्याज समेत कई फसलों को 70-80 फीसदी नुकसान हुआ था। जिसके बाद मराठवाड़ा समेत पूरे महाराष्ट्र रोज किसानों की आत्महत्या की ख़बरें आईं।

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आत्महत्या की खबरें सूखे मराठवाड़ा के साथ ही यूपी और मध्य प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड से भी आईं, यहां भी बारिश के चलते उड़द की फसल बर्बाद होने से कई किसानों ने आत्महत्या की। एनसीआरबी ने जिस वक्त ने साल 2019 के देश में आकस्मिक मृत्यु और आत्महत्या शीर्षक से जारी रिपोर्ट की, उसके कुछ घंटे बाद ही पंजाब के संगरूर जिले और यूपी के ललितपुर से किसानों की आत्महत्या की खबरें आईं।

वर्ष 2015 से 2019 तक हुई आत्महत्याओं की रिपोर्ट। सोर्स- NCRB

पंजाब में संगरूर जिले के मूनक उपमंडल के गांव देवला गांव के जुगराज सिंह (47वर्ष) ने फांसी लगाकर जान दे दी, उन पर 15 लाख का कर्ज़ था। वहीं उत्तर प्रदेश में ललितपुर जिले (बुंदेलखंड) के मडावरा तहसील के करबाटा गांव के किसान हक्कन (55वर्ष) पुत्र राम प्रसाद ने कीटनाशक पीकर जान दे दी। वो उड़द की फसल बर्बाद होने से परेशान थे, उन पर 5 लाख रुपए से ज्यादा का कर्ज़ था, जिसके लिए बकाएदार परेशान कर रहे थे।

साल 2018 की तुलना में साल 2019 में किसानों की आत्महत्या में गिरावट आई है। साल 2018 में 10,357 किसानों ने आत्महत्या की थी, जबकि 2019 में 10,281 किसानों ने जान दी है। तुलनात्मक अध्यक्ष करने पर पता चलता कि किसान (खेत के मालिक और लीज पर जमीन लेने वाले) की आत्महत्या के मामलों 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। साल 2016 में 11,379 किसानों ने आत्महत्या की थी।

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लेकिन इसी दौरान मजदूरों की आत्महत्या की दर बढ़ गई है। साल 2019 में 32,559 दिहाड़ी मजूदरों ने आत्महत्या की जो 2018 में जान देने वाले 30,132 कामगारों के मुकाबले 8 फीसदी ज्यादा है। रिपोर्ट यह भी कहती है कि साल 2019 में जिन 10281 किसानों ने जान दी है, उनमें 5957 किसान और 4324 कृषि मजदूर शामिल हैं। साल 2019 में हुई कुल आत्महत्या में कृषि की हिस्सेदारी 7.4 फीसदी है। जिन किसानों ने साल 2019 में जान दी है उनमें 394 महिला किसान हैं, जबकि मजदूरों की बात करें तो 574 महिला कृषि मजदूरों ने आत्महत्या की है।

आत्महत्या की वजह

एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 में जिन 139,123 लोगों ने जान दी है, उसकी सबसे बड़ी वजह पारिवारिक परेशानियां रहीं, जिसके चलते 32.4 फीसदी लोगों ने मौत का रास्ता चुना जबकि 17.1 फीसदी ने बीमारियों के चलते जान दी। साल 2018 में पूरे देश में 134,516 लोगों ने आत्महत्या की थी।

राज्यवार आत्महत्याएं

पूरे साल में साल 2019 में एक बार फिर महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा लोगों ने जान दी। यहां 2019 में 18,916 लोगों ने जान दी, जिसके बाद तमिलनाड़ु 13,493, पश्चिम बंगाल 12,665, मध्य प्रदेश 12,457 और उत्तर प्रदेश में 5,464 लोगों ने मौत को गले लगाया।

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प्रति एक लाख पर आत्महत्या की दर की बात करें तो सबसे ज्यादा 45.5 फीसदी अंडमान निकोबार द्वीप समूह हैं, जबकि महाराष्ट्र में 15.4 और पूरे देश की 16 फीसदी आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश में 3.9 फीसदी आत्महत्या का औसत 3.9 रहा, जबकि देश के बीमारू राज्य की श्रेणी में आने वाले बिहार में प्रति एक लाख पर आत्महत्या का औसमत दशमलव 5 फीसदी रहा है।


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