शोधकर्ता ने कहा, “द्रौपदी के साथ इतिहास में बहुत बड़ा अन्याय हुआ” 

शोधकर्ता ने कहा, “द्रौपदी के साथ इतिहास में बहुत बड़ा अन्याय हुआ” प्रतीकात्मक फोटो 

नई दिल्ली (भाषा)। इतिहास में द्रौपदी के साथ अन्याय किए जाने का उल्लेख करते हुए एक शोधकर्ता ने कहा है कि महाभारत की इस महान पात्र को उचित स्थान नहीं दिया गया और उसे भुला दिया गया। उन्होंने मांग की है कि उत्तर प्रदेश के र्फुखाबाद जिले में स्थित पांचाली की जन्मस्थली कांपिल्य को धरोहर स्थल के रुप में विकसित किया जाना चाहिए।

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द्रौपदी ड्रीम ट्रस्ट की अध्यक्ष तथा महाभारतकालीन एवं वैदिक युगीन इतिहास एवं संस्कृति की शोधार्थी नीरा मिश्रा ने भाषा के साथ बातचीत में कहा कि सरकारों ने अर्जुन और द्रोणाचार्य पुरस्कारों के रुप में महाभारत के इन दोनों महान पात्रों को तो अमर कर दिया, लेकिन एक अन्य महान पात्र द्रौपदी को भुला दिया।

उन्होंने कहा कि द्रौपदी के साथ इतिहास में बहुत बडा अन्याय हुआ है और एक तरह से उसकी नकारात्मक छवि बना दी गई है। नीरा ने कहा कि आम धारणा यह बन गई है कि द्रौपदी ने दुर्योधन को अंधे का पुत्र अंधा कहकर उसका मजाक उडाया था, जबकि सच यह है कि यह बात द्रौपदी ने नहीं उसकी दासी ने कही थी। इस वाकये के समय द्रौपदी उस जगह पर मौजूद ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की मदद से यह स्थापित हुआ है कि मध्य उत्तर प्रदेश पांचाल देश था। द्रौपदी की जन्मस्थली कांपिल्य पांचाल देश की राजधानी थी। द्रौपदी को पांचाली इसलिए नहीं कहा जाता कि उसके पांच पति थे, बल्कि इसलिए कहा जाता है कि वह पांचाल देश की राजकुमारी थी।

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नीरा ने कहा कि औरंगजेब के समय पांचाल का नाम र्फुखाबाद हो गया जिसे फिर से पांचाल किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र से बहुत से उपनिषद आए। चरक संहिता बनाने का निर्णय कांपिल्य में ही हुआ था। तमिलनाडु में महाभारत की कहानी पांचाल से ही गई थी।

उन्होंने कहा कि गनीमत बस इतनी रही कि कांपिल्य और हस्तिनापुर का नाम आज भी जस का तस है, लेकिन फिर भी उन्हें अपना अस्तित्व साबित करने के लिए जूझना पड रहा है।

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