बजट 2018 : जेटली की पोटली से रियल एस्टेट को तोहफे की उम्मीदें 

बजट 2018 : जेटली की  पोटली से रियल एस्टेट को तोहफे की उम्मीदें Gaon Connection real state

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली एक फरवरी को आम बजट पेश करेंगे, सिर्फ कुछ घंटे बाकी है। रियल एस्टेट में काम करने वाली कंपनियां वित्तमंत्री की तरफ बेहद उम्मीद के संग देख रही हैं। देश में नोटबंदी की घोषणा के बाद से रियल एस्टेट की हालत बहुत खराब है। उपभोक्ताओं की मदद के लिए आए रियल एस्टेट कानून 2016 से भी रियल एस्टेट बुरी तरह से बैठ गया है। अब रियल एस्टेट की सारी उम्मीदें सिर्फ वित्तमंत्री की पोटली में लगी है।

ऐसा माना जाता है कि रीयल एस्टेट में असंगठित क्षेत्र कालेधन से भरा हुआ है। 60 फीसदी तक का कारोबार कालेधन से किया जा रहा है। नोटबंदी के बाद संगठित क्षेत्र को सिर्फ तात्कालिक नुकसान हुआ पर ग्राहकों का टोटा हो गया पर मगर संगठित क्षेत्र में धंधा चौपट नहीं हुआ। मगर असंठित क्षेत्र को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

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देश के निजी रियल एस्टेट डेवलपर्स के शीर्ष निकाय कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवेलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई, पश्चिमी यूपी) के उपाध्यक्ष अमित मोदी का मानना है कि वर्ष 2017 की आखिरी तिमाही रियल एस्टेट के लिए उत्साहजनक रही है और वर्ष 2018 में इस क्षेत्र में मांग बढ़ने की उम्मीद है। उन्हें उम्मीद है कि बजट-2018 इस क्षेत्र के लिए अधिक सहूलियत, निवेश और कराधान प्रणाली में सुधार जैसी कुछ बड़ी घोषणाएं लेकर आएगा।

उन्होंने बताया, "रियल एस्टेट डेवलपर्स लंबे समय से आवासीय और वाणिज्यिक परियोजनाओं के लिए सिंगल-विंडो क्लियरेंस की मांग कर रहे हैं। वर्तमान में सिंगल वीडियो क्लियरेंस के अभाव में डेवलपर्स को कई प्रकार के अनुमोदन और मंजूरियां लेनी होती हैं, उन्हें कई नौकशाहों के विभागों में चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे परियोजना को शुरू होने में 18 से 36 महीने का समय लग जाता है। सरकार को अनुमोदन को आसान बनाने के लिए सिंगल वीडियो क्लियरेंस प्रणाली लागू करनी चाहिए, ताकि आसान अनुमोदन प्रक्रिया से परियोजनाओं की डिलीवरी समय पर दी जा सके। इस क्षेत्र में निर्माण कार्य की गति और लागत भी महत्वपूर्ण है जो एक घर की उचित कीमत तथा परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता को सुनिश्चित करते हैं।"

रियल एस्टेट ढेर सारे लोगों के लिए रोजगार उपलब्ध कराता है चाहे व नौकरी हो या मजदूरी हो। दूरदराज गांवों से बहुत सारे ग्रामीण इस सेक्टर में मजदूरी करते थे पर अब वो नोटबंदी के बाद घर वापस चले गए। उन जैसे कई लोगों को उम्मीद है कि यह बजट रियल एस्टेट को नई सांस देगा।

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नोटबंदी के सालभर बाद रियल एस्टेट किफायती आवास श्रेणी के दायरे को बढ़ाए जाने और इस क्षेत्र पर एक अप्रैल से लागू हो रही वस्तु एवं सेवा कर की मौजूदा दर को 18 फीसदी से घटाकर 12 फीसद किए जाने की उम्मीद कर रहा है।

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अमित कहते हैं, "रियल एस्टेट डेवलपर्स जीएसटी की दर को 18 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही घर की कीमत में भूमि की कीमत की छूट को 33 फीसदी से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की मांग है। देशभर के रियल एस्टेट डेवलपर्स आईटी अधिनियम 1961 की धारा 80 आईए के तहत 'इंफ्रास्ट्रक्चर फैसिलिटी' की परिभाषा में भी बदलाव की मांग कर रहे हैं।"

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भारतीय कामगारों की शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण और विकास को बढ़ावा देने के लिए वर्षों से काम कर रहे द इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन फाउंड्रीमैन (आईआईएफ) के निदेशक ए.के. आनंद ने कहा, "हम रियल एस्टेट डेवलपर्स आवास क्षेत्र यानी हाउसिंग सेक्टर को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिए जाने की मांग कर रहे हैं। साथ ही हम चाहते हैं कि निर्माणाधीन संपत्ति पर भी जीएसटी दर कम हो।"

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केपीएमजी-मैजिकब्रिक्स की 'रेसिडेंटियल रियल एस्टेट : एन इनवेस्टेबल एसेट' रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के रिहायशी प्रापर्टी बाजार की कीमतें पिछले एक दशक में दोगुनी हो गई है जो वैश्विक स्तर पर सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला बाजार है।

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दिल्ली व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के रियल एस्टेट कंपनी एबीए कॉर्प के निदेशक अमित बजट से उम्मीदों के सवाल पर कहते हैं, "हम चाहते हैं कि हर किसी का अपना आशियाना हो और इस सपने के लिए होम लोन बड़ा मददगार साबित होता है। सरकार को पहली बार घर खरीदने वाले उपभोक्ताओं को ध्यान में रखते हुए पांच लाख रुपए तक के होम लोन पर कर कटौती की सीमा बढ़ानी चाहिए। वर्तमान में यह सीमा दो लाख रुपए सालाना है। इसी तरह की छूट 1 लाख रुपए ऋण के पुनर्भुगतान पर भी मिलनी चाहिए।"

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मैजिकब्रिक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुधीर पाई ने बताया, "साल 2030 तक भारत की शहरी आबादी में करीब 36 फीसदी वृद्धि का अनुमान है जो 58 करोड़ हो जाएगी। इससे देश में रिहायशी बाजार में काफी ज्यादा मांग बढ़ने की संभावना है।"

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उन्होंने आगे कहा, "इसके अलावा रियल एस्टेट को उद्योग का दर्जा मिलना चाहिए। इस क्षेत्र से जुड़े लोग लंबे समय से रियल रियल एस्टेट को उद्योग का दर्जा दिए जाने की मांग कर रहे हैं। ऐसा होने से बैंकों एवं अन्य वित्तीय संस्थानों से आर्थिक मदद मिलने में आसानी होगी। उद्योग का दर्जा मिलने से कम लागत पर ऋण मिलेगा, जिसका फायदा उपभोक्ता को होगा।"

गांव कनेक्शन- इनपुट आईएएनएस

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