रैंसमवेयर साइबर हमले का भारत पर कोई गंभीर असर नहीं : सरकार  

Sanjay SrivastavaSanjay Srivastava   16 May 2017 11:34 AM GMT

रैंसमवेयर साइबर हमले का भारत पर कोई गंभीर असर नहीं : सरकार  रवि शंकर प्रसाद, विधि और आईटी मंत्री

नई दिल्ली (भाषा)। सरकार ने कहा कि दुनिया के कई देशों को प्रभावित करने वाले साइबर हमले ‘रैंसमवेयर' का भारत पर कोई गंभीर असर नहीं हुआ है हालांकि केरल व आंध्र प्रदेश में इसके कुछ छिटपुट मामले सामने आए हैं, इसके साथ ही सरकार ने कहा है कि भविष्य में ऐसे किसी भी खतरे से निपटने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि नेशनल इन्फोर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) द्वारा चालित सभी प्रणालियां सुरक्षित हैं और सुचारु काम कर रही हैं, इस तरह के किसी भी हमले के लिए एहतियाती उपायों के लिए साइबर समन्वय केंद्र अगले महीने से काम करने लगेगा।

भारत पर अन्य देशों जैसा कोई बड़ा असर नहीं हुआ है। हम करीबी निगरानी रखे हुए हैं। अब तक मिली सूचना के अनुसार केरल व आंध्र प्रदेश के कुछ सीमित इलाकों में छिटपुट मामले सामने आए हैं।
रवि शंकर प्रसाद मंत्री सूचना व प्रौद्योगिकी

मंत्री ने कहा कि मार्च से ही भारत ने ‘पैचेज' इंस्टाल कनने शुरू कर दिए थे और सभी भागीदारों को नियमित रूप से परामर्श जारी किए जा रहे थे। पैच वह साफ्टेवयर होता है किा कि किसी भी कार्यक्रम में कमियों को दूर करने में काम आता है। भारत इस बारे में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ संपर्क में हैं, मालवेयर को साफ किया जा रहा है तथा संभावित साइबर हमलों से बचने के लिए नियमित रूप से साइबर जांच पड़ताल की जा रही है।

रैंसमवेयर ‘वानाक्राई' के संभावित साइबर हमले के मद्देनजर भारत काफी सतर्क है और बैंकिंग, दूरसंचार, बिजली व विमानन सहित सभी प्रमुख नेटवर्क पर निगरानी रखी जा रही है।

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वानाक्राई ने रूस व ब्रिटेन सहित 150 से अधिक देशों के कंप्यूटर नेटवर्क को प्रभावित किया है इसे अब तक का सबसे बडा साइबर हमला बताया जा रहा है। भारत की साइबर सुरक्षा इकाई सीईआरटी-इन ने इससे पहले कहा कि उसे देश के किसी विशेष नेटवर्क पर साइबर हमले की कोई औपचारिक रपट नहीं मिली है।

रपटों के अनुसार इस मालवेयर ने दुनिया भर में दो लाख से अधिक सिस्टम को प्रभावित किया है. ‘वानाक्राई' कंप्यूटर को बुरी तरह से प्रभावित करता है और उस पर फाइलों तक पहुंचने के रास्ते को लॉक कर देता है। साइबर अपराधियों ने इसे खोलने (अनलॉक करने) के लिए 300 ‘बिटक्वाइन' (क्रिप्टो करेंसी) की मांग की है, हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि मांग की रकम अदा करने पर पहुंच बहाल हो जाती है या नहीं होती है।

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