मनरेगा को निजी कृषि कार्य से जोड़ा जाये : भाकपा

मनरेगा को निजी कृषि कार्य से जोड़ा जाये : भाकपाभाकपा

नई दिल्ली (भाषा)। भाकपा ने पंजाब और हरियाणा में पराली जलाये जाने से दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में हो रहे प्रदूषण के स्थायी समाधान के लिये मनरेगा में कार्यविस्तार की मांग करते हुये इसमें खेतिहर मजदूरी को भी शामिल करने का सुझाव दिया है।

भाकपा महासचिव अतुल कुमार अंजान ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सौंपे मांग पत्र में कहा है कि केंद्र और संबद्ध राज्य सरकारों को इस बारे में व्यवहारिक तरीका अपनाना चाहिये। अंजान ने आज बताया कि पंजाब में धान की हर साल जुलाई में होने वाली बुआई के बाद अक्तूबर में इसकी कटाई होती है। इसके बीस दिन बाद गेहूं की बुआई को देखते हुये किसानों के लिये हर साल निकलने वाली औसतन दो करोड़ टन पराली को उखड़वाना मुमकिन नहीं हो पाता है। इसलिये मजबूरी में किसान इसे जला देते हैं।

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अंजान ने दावा किया कि पंजाब में लगभग 12.5 लाख खेतिहर मजदूर काम के अभाव में खाली बैठे हैं। उन्होंने कहा कि मनरेगा के दायरे में अगर सार्वजनिक निमार्ण कार्य के अलावा निजी कृषि कार्य भी शामिल कर दिया जाये तो किसान मनरेगा के तहत पराली उखड़वाने का काम करवा सकेंगे।

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इससे श्रमिकों को काम भी मिलेगा और प्रदूषण का स्थायी समाधान भी निकल सकेगा। हालांकि अंजान ने पंजाब को चालू वित्त वर्ष के लिये मनरेगा में अब तक सिर्फ एक किस्त ही मिलने के हवाले से शेष राशि भी जारी करने की राष्ट्रपति से मांग की। उन्होंने कहा कि पंजाब को मनरेगा के तहत इस साल 4800 करोड रपये मिलने थे लेकिन अब तक सिर्फ 700 करोड़ रुपये ही मिले हैं।

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