जीएसटी को हकीकत बनाने वाले असली हीरो के बारे में जानिए 

जीएसटी को हकीकत बनाने वाले असली हीरो के बारे में जानिए मुम्बई में जीएसटी भवन।

नई दिल्ली (भाषा)। भारत में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) शुरुआत एक जुलाई हो गई है। इस अहम कर सुधार के पीछे कुछ ऐसे लोगों का भी बड़ा योगदान है जिन्होंने परदे के पीछे रहकर दिन-रात काम किया। क्या आप जानते हैं कि जीएसटी के असली हीरो कौन हैं।

संसद के केंद्रीय कक्ष में करीब एक घंटे के कार्यक्रम के बाद भारत ने आजादी के बाद सबसे बड़े कर सुधार की दिशा में कदम बढ़ाया। देश में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की शुरुआत हो गई, इसके साथ ही भारत अप्रत्यक्ष कर क्षेत्र की यह व्यवस्था अपनाने वाले देशों में शामिल हो गया। लेकिन इस महत्वपूर्ण कर सुधार के पीछे कुछ ऐसे लोगों का भी बड़ा योगदान है जिन्होंने आजादी के बाद के इस सबसे बड़े कर सुधार के लिए परदे के पीछे रहकर दिन-रात काम किया।

जीएसटी पर काम एक दशक से चल रहा था। इसके लिए संविधान में संशोधन किया गया और संसद तथा राज्य विधानसभाओं में इससे संबद्ध पांच कानून पारित किए गए। अगस्त 2016 में संविधान संशोधन विधेयक के पारित होने के बाद से अधिकारियों की 175 बैठकें हुई। वहीं जीएसटी परिषद की 18 बैठकें हुई। कुल मिलाकर नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के सुचारु क्रियान्वयन के लिये 18,000 से अधिक मानव घंटे चर्चा हुई।

एक जुलाई से जीएसटी लागू करने का लक्ष्य पूरा करने के मकसद से केंद्र तथा राज्य सरकारों के कई अधिकारियों ने देर रात तक काम किया। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 30 उप-समूह तथा समितियों ने नियम तथा कानून बनने के साथ ही 1,200 वस्तुओं और सेवाओं पर कर की दरें तय करने के लिए दिन-रात काम किया।

जीएसटी के संदर्भ में अंतिम निर्णय जीएसटी परिषद ने किया। परिषद में वित्त मंत्री अरुण जेटली तथा राज्यों के वित्त मंत्री शामिल हैं। परिषद की पिछले नौ महीनों के दौरान औसतन दो बैठकें हर महीने हुई। फिटमेंट और कर समिति में शामिल अधिकारियों ने केंद्र तथा राज्यों के बीच मतभेदों को दूर करने तथा परिषद के समक्ष स्वीकार्य प्रस्ताव रखने के लिए सप्ताह में तीन या चार बार बैठकें की।

बैठकों के दौरान राज्यों के अधिकतर कर अधकारी राष्ट्रीय राजधानी में ही पूरे सप्ताह रुके रहे। केंद्र तथा राज्यों के अधिकारियों की व्यापक विचार-विमर्श से नए कानून के क्रियान्वयन की जमीनी रुपरेखा को अंतिम रूप दिया।

राजस्व सचिव हसमुख अधिया तथा सीबीईसी चेयरपर्सन वी सरना आगे रहे। वहीं जीएसटी आयुक्त उपेन्द्र गुप्ता, राजस्व विभाग में सलाहकार पी के मोहंती, संयुक्त सचिव (टीआरयू) आलोक शुक्ला, मुख्य आयुक्त सीबीईसी पी के जैन, आयुक्त सीबीईसी मनीष सिन्हा तथा कई अन्य केंद्रीय अधिकारियों ने परदे के पीछे रहकर कई मुद्दों को सुलझाया।

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सूत्रों ने कहा कि राज्यों के अधिकारियों में कर्नाटक में वाणिज्यिक कर आयुक्त (सीसीटी) रितविक पांडे, सीसीटी गुजरात पी डी वघेला, सीसीटी महाराष्ट्र राजीव जलोटा, बिहार के अतिरिक्त सचिव सीटी अरुण मिश्र तथा पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त आयुक्त अनवर खालिद अनूठे विचार लेकर आए। राज्यों के सभी अधिकारियों ने जीएसटी दरों तथा नियमों को यथासंभव अनुकूल बनाने के लिए काफी मेहनत किए।

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