जैविक खाद्य पदार्थ खरीदना सबके बस की बात नहीं, सस्ता बनाना बड़ी चुनौती  

जैविक खाद्य पदार्थ खरीदना सबके बस की बात नहीं, सस्ता बनाना बड़ी चुनौती  स्टाल पर बेचने के लिए रखे गयी जैविक विधि से पैदा की गयीं सब्जियां। फाइल फोटो

नयी दिल्ली। देश में लगातार जैविक खाद्य पदार्थों के प्रति रूझान बढ़ रहा है। पर सबसे बड़ी समस्या यह है कि जैविक खाद्य पदार्थों का दाम बहुत अधिक होता है जो आम उपभोक्ता की पकड़ से बहुत दूर चला जाता है। जैविक खाद्य पदार्थों का कारोबार करने वाले लोगों का मानना है कि कीमत के कम होने पर ही जैविक उत्पाद लोकप्रियता हासिल कर पाएंगे।

जैविक खाद्य पदार्थों के कारोबार से जुड़़ी देश की प्रमुख कंपनी त्रेत्रा एग्रो प्राइवेट लिमिटेड के जस्ट आरगैनिक ब्रांड के प्रबंध निदेशक पंकज अग्रवाल ने कहा, जैविक खाद्य व्यवसाय से जुड़े किसानों, व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल ऐसे उत्पादों का, आम प्रचलन वाले खाद्य वस्तुओं, सब्जियों से बहुत ज्यादा महंगा होना है। इसके कारण ऐसे उत्पादों की ज्यादातर खपत उच्च वर्ग, अधिक खपत की क्षमता रखने वाले जागरूक लोगों तक सीमित है।

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फिलहाल भारत का जैविक खाद्य बाजार 50 करोड़ डॉलर का है जो वर्ष 2020 तक 1.36 अरब डॉलर होने का अनुमान है। किसानों को इस जैविक खेती का रकबा बढ़ाने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

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पंकज अग्रवाल ने कहा कि जैविक कृषि बाजार के सामने सबसे बड़ी चुनौती फुटकर कारोबारी हैं। वे ऐसे उत्पादों को बाजार में रखने के लिए 35 से 40 प्रतिशत का मार्जिन मांगते हैं जबकि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के जरिये पैदा किए जाने वाले कृषि ऊपजों पर वे पांच से 10 प्रतिशत का मार्जिन ही लेते हैं।

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जैविक खाद्य वस्तुएं, रसायन और उर्वरक के इस्तेमाल से तैयार खाद्य वस्तुओं की अपेक्षा 10 गुना अधिक गुण और पोषक तत्व वाली होती हैं लेकिन जैविक खाद्य की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।

पंकज अग्रवाल ने कहा कि इस दिशा में सरकार को विशेष समर्थन देते हुए देश में स्थापित किए जा रहे कृषि मंडियों में जैविक उत्पादों के लिए विशेष क्लस्टर (शंकुल) बनाने तथा मार्जिन की सीमा तय करने के लिए आगे आना होगा। इसके अलावा सरकार को व्यापार मेलों, बाजार प्रदर्शनियों और जागरुकता अभियान चलाने के अलावा इस क्षेत्र से जुड़े निजी क्षेत्र की कंपनियों को प्रोत्साहित करने के साथ तमाम समर्थन देना चाहिए ताकि वे किसानों और बाजार (निर्यात बाजार सहित) के बीच उपयुक्त संपर्क सुत्र की भूमिका ठीक से निभा सकें।

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सरकार ने इस बार के आम बजट 2018 में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष ध्यान दिया है। इसके सफल कार्यान्‍वयन के लिए क्लस्टर बेस्ड फार्मिंग की योजना बनाई है, जिसे बाजारों से जोड़ा जाएगा। इस योजना का विशेष लाभ पूर्वोत्‍तर तथा पहाड़ी राज्‍यों को प्राप्‍त हो सकेगा। जिलेवार बागवानी फसलों के लिए भी क्लस्टर बेस्ड फार्मिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए खाद्य प्रसंस्‍करण एवं वाणिज्‍य मंत्रालय के साथ भी समन्‍वय स्‍थापित किया जाएगा।

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अग्रवाल ने कहा कि सरकार ने वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उपक्रम (एमएसएमई) को अलग से प्रोत्साहन देने की नीतियां बनाई हैं। ठीक इसी तरह कृषि मंत्रालय के अंतर्गत जैविक खेती के लिए अलग से विभाग और नीतियां बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रमाणीकृत जैविक खाद्य उत्पादों पर जीएसटी को हटा लेना चाहिए। इससे जैविक कृषि उत्पादों की कीमत में पांच से 10 प्रतिशत की कमी आ सकती है। सरकार को जैविक उत्पादों के प्रसंस्करण सुविधाओं, आधारभूत ढांचों के लिए सब्सिडी भी प्रदान करनी चाहिए।

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सिक्किम देश का पहला राज्य है जिसने 90 के दशक के शुरुआती वर्षों में 100 फीसदी जैविक कृषि नीति को अपना लिया था। पर एक दशक के भीतर ही राज्य ने कृषि उत्पादन में कमी दर्ज की। वहीं देश के सभी राज्यों में जैविक प्रमाणीकरण के अधीन सबसे अधिक जैविक खेती मध्य प्रदेश में होती है उसके बाद हिमाचल प्रदेश और राजस्थान का स्थान है।

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अग्रवाल ने कहा कि लोगों को खाद्य सुरक्षा का कानूनी अधिकार दिया गया है। ठीक इसी तरह ही सुरक्षित खाद्य का कानूनी अधिकार देने की ओर ध्यान दिया जाना चाहिए।

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इनपुट आईएएनएस

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