नेशनल मेडिकल कमीशन बिल 2017 से नाराज क्यों हैं डाक्टर

नेशनल मेडिकल कमीशन बिल 2017 से नाराज क्यों हैं डाक्टरराष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) विधेयक 2017 के विरोध का फरमान

नई दिल्ली (भाषा)। भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) की जगह राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की स्थापना के लिए प्रस्तावित विधेयक को कई विपक्षी दलों के आग्रह के बाद मंगलवार को संसद की स्थायी समिति के पास भेज दिया गया। संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने लोकसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि वह समिति को अपनी रिपोर्ट संसद के बजट सत्र से पहले देने का निर्देश दें।

संसद का बजट सत्र इस महीने के अंत में शुरू होने की संभावना है। इस विधेयक का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने विरोध किया है।

संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार।

भोजनावकाश के बाद लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, अन्नाद्रमुक, राकांपा, तेदेपा और कुछ दूसरे दलों ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) विधेयक 2017 को स्थायी समिति के पास भेजने के लिए कहा है, हम कहना चाहते हैं कि सरकार इसे स्थायी समिति के पास भेजने को तैयार है।

उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार का मकसद मेडिकल शिक्षा व्यवस्था को साफ-सुथरा करना है। इस विधेयक को जल्द पारित किए जाने की जरुरत है। ऐसे में आपसे (लोकसभा अध्यक्ष) आग्रह है कि आप स्थायी समिति से कहें कि वह अगले बजट सत्र से पहले रिपोर्ट सौंप दे ताकि विधेयक को बजट सत्र में पारित कराया जा सके।

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन।

इसके बाद अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि इस विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजा जाता है और वह बजट सत्र से पहले अपनी सिफारिशें सौंप दे। उन्होंने कहा कि आमतौर पर स्थायी समिति को तीन महीने का समय दिया जाता है, लेकिन इस विधेयक को एक प्रकार से पहले भी स्थायी समिति के पास भेजा गया था। ऐसे में समिति से बजट से पहले रिपोर्ट देने को कहा जा रहा है।

विधेयक स्थायी समिति के पास भेजने के फैसले के बाद सदस्यों ने मेज थपथपाया।

जे पी नड्डा, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री

इस विधेयक को पिछले सप्ताह सदन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे पी नड्डा ने पेश किया था, जिसमें देश में चिकित्सा शिक्षा को गुणवत्तापरक बनाने और चिकित्सा सेवाओं के सभी पहलुओं में उच्च मानकों को बनाए रखने के उद्देश्य से भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (एमसीआई) की जगह राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के गठन का प्रस्ताव किया गया है।

जानें इस राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग में आखिर क्या है?

इस विधेयक में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ( राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग) के गठन का प्रस्ताव किया गया है। यह आयोग मेडिकल (आयुर्विज्ञान) शिक्षा की उच्च गुणवत्ता और उच्च स्तर को बनाए रखने के लिए नीतियां बनाएगा। इसके अलावा मेडिकल संस्थाओं, अनुसंधानों और चिकित्सा पेशेवरों के नियमन के लिए नीतियां निर्धारित करेगा। इसके अलावा यह स्वास्थ्य और स्वास्थ्य संबंधी देखभाल से संबंधित बुनियादी ढांचे समेत स्वास्थ्य संबंधी देखभाल की अपेक्षाओं और जरुरतों तक पहुंच बनाना सुनिश्चित करेगा तथा ऐसी अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए एक रुपरेखा तैयार करना।

इसमें कहा गया है कि सभी मेडिकल संस्थाओं में स्नातक आयुर्विज्ञान शिक्षा के लिए प्रवेश के लिहाज से एक सामान्य राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा होगी। आयोग अंग्रेजी और ऐसी अन्य भाषाओं में परीक्षा का संचालन करेगा। आयोग सामान्य काउंसलिंग की नीतियां भी निर्धारित करेगा।

इसके तहत स्नातक आयुर्विज्ञान शिक्षा बोर्ड, स्नातकोत्र आयुर्विज्ञान शिक्षा बोर्ड और चिकित्सा निर्धारण और रेटिंग बोर्ड तथा शिष्टाचार और चिकित्सक पंजीकरण बोर्ड का गठन करेगी।

स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान शिक्षा बोर्ड का काम पीजी स्तर पर और अति विशिष्ट (सुपर-स्पेशलिटी) स्तर पर मेडिकल शिक्षा के स्तर बनाए रखना और उससे संबंधित पहलुओं की निगरानी करना है।

इसमें कहा गया है कि राज्य सरकार, उस राज्य में यदि वहां कोई चिकित्सा परिषद नहीं है तो इस कानून के प्रभाव में आने के तीन वर्ष के भीतर उस राज्य में चिकित्सा परिषद स्थापित करने के लिए आवश्यक उपाय करेगी।

विधेयक के उद्देश्यों और कारणों में कहा गया है कि किसी भी देश में अच्छी स्वास्थ्य देखरेख के लिए मेडिकल शिक्षा का भलीभांति क्रियाशील विधायी ढांचा जरूरी है।

इसमें कहा गया कि 1956 में लागू भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (एमसीआई) अधिनियम समय के साथ तालमेल नहीं रख सका। इस पद्धति में विभिन्न अड़चनें पैदा हो गई हैं जिनका मेडिकल शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

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