राष्ट्रीय दुग्ध दिवस : पशु प्रताड़ना पर जुर्माना 50 रुपए से बढ़ाकर 20,000 रुपए किया जाए

Sanjay SrivastavaSanjay Srivastava   26 Nov 2017 2:14 PM GMT

राष्ट्रीय दुग्ध दिवस :  पशु प्रताड़ना पर जुर्माना 50 रुपए से बढ़ाकर 20,000 रुपए किया जाएराष्ट्रीय दुग्ध दिवस।

नई दिल्ली (भाषा)। दूधवाले ने बड़ी बेदर्दी से भैंस को आक्सीटोसिन इंजेक्शन लगाया, भैंस एक पल बैचेन हुई और थोड़ी देर सहलाने के बाद दूधवाले ने भैंसे से दूध दुह लिया। यह दृश्य हर सुबह शाम पूरे देश में अधिकतर डेरियों पर देखने को मिल जाता है।

मवेशियों को प्रताड़ित करने वाले कई तरीकों में सींग काटना, पूंछ काटना, मोहर लगाना और आक्सीटोसिन दवा का इस्तेमाल करना जैसे कई अनेक हैं।

पशुओं के अधिकार के लिए काम करने वाले एक गैर सरकारी संगठन एनिमल इक्वलिटी के अनुसार भारत में मवेशियों को प्रताड़ित किया जाता है। संगठन ने सिफारिश की है कि सरकार को दुधारु मवेशियों के कल्याण के लिए और उन पर अत्याचार रोकने के लिए नियम बनाने चाहिए और पशु प्रताड़ना पर जुर्माना 50 रुपए से बढ़ाकर 20,000 रुपए किया जाना चाहिए।

संगठन यह भी चाहता है कि भारत में किसानों को पशुपालन के अच्छे तौर तरीकों का प्रशिक्षण दिया जाए। राष्ट्रीय दुग्ध दिवस पर जारी किए गए अध्ययन में यह सुझाव भी दिया गया है कि जानवरों को रस्सी से बांधना बंद करना चाहिए और निर्दिष्ट क्षेत्र में ही उसे खुला छोड़ना जाना चाहिए। संगठन का सुझाव है कि दुधारु पशुओं पर आक्सीटोसिन दवा के इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगनी चाहिए तथा सींग काटे जाने, पूंछ काटने और उन पर मोहर लगाने जैसे आचरण को प्रतिबंधित किया जाहिए।

जानवर को पर्याप्त भोजन, पानी, शरण देने से इनकार करना और लंबे समय तक बांधे रखना दंडनीय अपराध है। इसके लिए जुर्माना या तीन महीने की सजा या फिर दोनों हो सकते हैं।

भारत में भले ही कानून लचर हो लेकिन विदेशों में पशु क्रूरता के तहत बलात्कार और हत्या जैसी सजा मिलती है। दिल्ली में रहने वाले पशुप्रेमी अभिषेक जोशी बताते हैं, “विदेशों में अगर पशुओं के साथ कोई कू्ररता करता है तो उसको वहां के बने कानून के तहत पांच साल की सजा और जुर्माना भरना होता है। इसके साथ पशुओं के साथ करने वाले आरोपियों को रेपिस्ट, मर्डर की श्रेणी में डालकर सजा दी जाती है। विदेशों में जैसे कानून बने हुए अगर उनको यहां पर बना दिया जाए तो काफी हद तक पशु कू्ररता को रोका जा सकता है।”

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अध्ययन में में कहा गया है कि सरकार को मवेशियों के कल्याण की निगरानी के लिए एक समिति का गठन करना चाहिए और मवेशियों के खिलाफ क्रूरता को रोकने के कानून, 1960 के तहत न्यूनतम जुर्माने को 50 रुपए से बढ़कर 20,000 रुपए करना चाहिए।

एनिमल इक्वलिटी की कार्यकारी निदेशक अमृताता उबाले ने एक बयान में कहा, "ऐसा प्रतीत होता है कि भारत में मवेशी संरक्षित हैं लेकिन वे प्रत्येक दिन प्रताड़ित किए जाते हैं। उबाले ने कहा कि भारत में 32.7 करोड़ मवेशी हैं। नियम बनने से खेती के काम आने वाले मवेशियों की तकलीफ कम होगी जो बुनियादी जरुरत है और हर विकसित देश में ऐसा कानून है, इस मामले में भारत को भी पीछे नहीं रहना चाहिए।"

संगठन ने कहा है कि यह रपट 10 राज्यों के 107 डेयरी फार्मों, दो वीर्य संग्रहण केंद्रों, 17 पशु बाजारों, आठ बूचडखानों, सात मांस बाजारों और पांच चर्म कारखानों में किए गए अध्ययन पर आधारित है। एनिमल इक्वलिटी एक पशु संगठन है जो भारत सहित आठ देशों में उपस्थित है।

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