‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के लिए धन कोई बाधा नहीं’

‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के लिए धन कोई बाधा नहीं’केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली।

नयी दिल्ली। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने बजट में घोषित स्वास्थ्य योजना को लेकर की जा रही आलोचना पर कहा कि यह पासा पलटने वाली साबित होगी और एक प्रतिशत का अतिरिक्त उपकर इसके वित्त पोषण को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगा।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आम बजट 2018-19 में एक फरवरी को राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (एनएचपीएस) की घोषणा की थी, जिसके तहत 10 करोड़ गरीब परिवारों (50 करोड़ लोगों) को पांच लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा।

ये भी पढ़ें- खून की एक जांच से आठ कैंसर की होगी पहचान 

इसकी पात्रता पर गौर करें तो हैरान जाएंगे, एक लाख से अधिक आय न होने वाला भारतीय व्यक्ति जो सरकारी नौकरी न करता हो, गरीब हो वहीं इस योजना का लाभ उठा सकता है।

दुष्प्रचार की बात पर अफसोस जताते हुए राजीव कुमार ने कहा, यह योजना पासा पलटने वाली होगी। मोदी सरकार की महत्वकांक्षी योजना के खिलाफ आधारहीन और झूठा दुष्प्रचार किया जा रहा है।

ये भी पढ़ें- तमिलनाडु में समुद्र से सटा ये पूरा गांव खस की खेती से हो रहा मालामाल

पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने प्रस्ताव को जुमला करार दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए बजट में धन का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। चिदंबरम ने कहा, "10 करोड़ परिवारों को पांच लाख रुपए प्रति परिवार मुहैया कराना एक जुमला है। यह योजना 10 करोड़ परिवारों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। अगर हर परिवार योजना के पांच लाख रुपए का 10वां हिस्सा भी प्राप्त करता है तो इस योजना को चलाने के लिए पांच लाख करोड़ रुपए की जरूरत होगी।"

ये भी पढ़ें- नरसिंहपुर में किसानों यशवंत सिन्हा का धरना, आवाज बुलंद करने पहुंचेंगे शत्रुघ्न सिन्हा 

चिदंबरम ने प्रश्न करते हुए कहा, अगर बीमा कंपनियों के माध्यम से इस योजना को चलाया जाता है तो प्रति परिवार अनुमानित प्रीमियम 5000 रुपए से लेकर 15,000 रुपए तक होगी। सरकार के हर साल इस योजना पर 50,000 करोड़ रुपए से लेकर 1.5 लाख करोड़ रुपए तक खर्च करने की जरूरत होगी। लेकिन धन का आवंटन ही नहीं किया गया।

ये भी पढ़ें- चने के दाम में भारी गिरावट, पिछले साल के मुकाबले आधे दाम पर बिक रहा चना

इस प्रमुख योजना के वित्त पोषण के बारे में पूछे जाने पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आबंटन को बढ़ाकर 6,000 करोड़ रुपए किया गया है। इसके अलावा 2,000 करोड़ रुपए की मौजूदा राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) चल रही है। सरकार ने स्वास्थ्य शिक्षा परियोजनाओं की पूंजी निवेश जरूरतों को पूरा करने के लिए एक वैकल्पिक उच्च शिक्षा वित्त पोषण एजेंसी (एचईएफए) प्रणाली स्थापित कर स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए वित्तीय गुंजाइश उपलब्ध कराई है। इसके अलावा, बजट में एक प्रतिशत अतिरिक्त शिक्षा तथा स्वास्थ्य उपकर के प्रस्ताव से सालाना 11,000 करोड़ रुपए की प्राप्ति होगी। इन सभी को मिलाकर कल्याणकारी कार्यक्रमों की वित्त पोषण जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध होगी।

ये भी पढ़ें- बजट में फसलों की लागत का डेढ़ गुना एमएसपी देने के वायदे को सुन चौंके कृषि विशेषज्ञ 

राजीव कुमार के अनुसार केंद्र तथा राज्य सरकारों को केवल बीमा प्रीमियम का बोझ उठाना होगा जो थोड़ा होगा। भारी मात्रा में खरीद तथा प्रतिस्पर्धा से लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने कहा, सभी केंद्रीय योजनाओं की तरह इसमें 60-40 का अनुपात होगा। जो राज्य योजना से जुड़ना चाहते हैं, उन्हें 40 प्रतिशत योगदान देना होगा। पूर्वोत्तर राज्य 10 प्रतिशत योगदान देंगे।

ये भी पढ़ें- जानिए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट में गांव, किसान और खेती को क्या दिया 

कई विशेषज्ञों ने इस प्रकार की महत्वाकांक्षी योजना के वित्त पोषण को लेकर सरकार की क्षमता तथा देश में बड़ी संख्या में लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ढांचागत सुविधा की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाए हैं।

स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए बुनियादी ढांचा के बारे में राजीव कुमार ने कहा कि योजना निजी क्षेत्र के उपक्रमों को प्रोत्साहित करेगी और वे पुरजोर तरीके से स्वयं को तैयार करेंगे। नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार वृहत स्वास्थ्य योजना पर सालाना 12,000 करोड़ रुपए की लागत आएगी और इसे 15 अगस्त या दो अक्तूबर को शुरू किया जा सकता है। वर्ष 2011 की सामाजिक आर्थिक तथा जाति जनगणना के आधार पर चिन्हित सभी गरीब परिवार योजना के लिए पात्र होंगे। इस योजना को आधार से जोड़ा जाएगा लेकिन लाभ लेने के मामले में यह अनिवार्य नहीं होगा।

ये भी पढ़ें- बजट 2018 में वेतनभोगी कर दाताओं को राहत, जाने कैसे बचा सकते हैं आयकर  

नीति आयोग के सलाहकार आलोक कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (एनएचपीएस) का खर्च केंद्र और राज्य सरकारें मिल कर वहन करेंगी। यह दुनिया की सबसे बड़ी सरकार पोषित स्वास्थ्य बीमा योजना है। केंद्र सरकार बीमा कवर के सालाना 5,000 से 6,000 करोड़ रुपए के प्रीमियम का बोझ उठाएगी, शेष राशि राज्य सरकारें उपलब्ध कराएंगी।

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने योजना के पूरी तरह सरकारी वित्तपोषित होने का भरोसा दिलाते हुए कहा कि दो हजार करोड़ रुपए की शुरुआती राशि का आवंटन कर दिया गया है। योजना के लागू होने के बाद जितनी भी राशि की आवश्यकता होगी, वह दी जाएगी।

देश से जुड़ी सभी बड़ी खबरों के लिए यहां क्लिक करके इंस्टॉल करें गाँव कनेक्शन एप

स्वास्थ्य सेवाओं पर अपनी जेब से खर्च मामले में मध्यम आय वाले 50 देशों में भारत का स्थान छठा है। देश की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने पर भी जोर देना जरूरी है। क्वॉलिटी हेल्थ सर्विसेज की कमी से 56 फीसदी शहरी और 49 फीसदी ग्रामीण भारत निजी अस्पतालों में इलाज करता है जहां उन्हें भारी रकम खर्च करनी पड़ती है।

इनपुट भाषा

फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

Share it
Top