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मात्र 6 या 7 राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत है पराली समस्या का समाधान : प्रताप सिंह बाजवा

नई दिल्ली (भाषा/आईएएनएस)। राज्यसभा में आज कांग्रेस के एक सदस्य ने मांग की कि सरकार को किसानों द्वारा खेतों में फसल अवशेष के रूप में निकलने वाली पराली को जलाने से होने वाली वायु प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पराली जलाए जाने की वजह से हाल ही में उत्तर भारत के राज्यों को प्रदूषित धुंध (स्मॉग) की भीषण समस्या से दो चार होना पड़ा था। कांग्रेस के प्रताप सिंह बाजवा ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए उच्च सदन में कहा कि मात्र 6 या 7 राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत के खर्च पर ही इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों द्वारा खेतों में पराली जलाई जाती है।

उन्होंने कहा कि पिछले दिनों श्रीलंका के क्रिकेट खिलाड़ियों ने भी दिल्ली में खेलने से मना कर दिया। राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण राष्ट्रीय शर्म की बात है और सरकार को इससे निपटने के लिए तत्काल कदम उठाना चाहिए।

बाजवा ने कहा कि नीति आयोग के अनुसार, इस समस्या का हल करने में 11,000 करोड़ रुपए का खर्च आएगा और केंद्र सरकार को यह राशि तत्काल जारी कर देना चाहिए। यह राशि उतनी ही है जितनी 6 या 7 राफेल लडाकू विमानों की खरीद के लिए जरूरी है।

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उन्होंने कहा कि किसानों को पराली का पर्यावरण के अनुकूल तरीके से निपटान करने के लिए प्रति कुंतल मात्र 200 रुपए का सहयोग दिए जाने की जरुरत है। यह राशि किसानों को वित्तीय सहयोग के रूप में फसल की कटाई के दौरान ही दे देनी चाहिए ताकि इसे जलाने की नौबत ही न आए।

उन्होंने कहा, "यह महत्वपूर्ण मुद्दा है। हमारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र रहने लायक नहीं है। प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक, कई विदेशी अधिकारी भी यहां रहते हैं। आपको धान कटाई के समय 200 रुपए प्रति कुंतल देने की जरूरत है और इसके लिए 11,000 करोड़ रुपए देना बहुत बड़ी कीमत नहीं है।"

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तृणमूल कांग्रेस के विवेक गुप्ता ने जानना चाहा कि सरकार ने पराली के निपटारे के लिए क्या कोई कदम उठाए हैं या इस बारे में किसानों को प्रशिक्षण देने की कोई योजना बनाई गई है। विभिन्न दलों के सदस्यों ने इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध किया।

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राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि यह गंभीर मुद्दा है और इसपर चर्चा की जरूरत है। प्रत्येक वर्ष, पंजाब व हरियाणा में करीबन तीन करोड़ टन धान के पुआल का उत्पादन होता है, जिसे बाद में जला दिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि उत्तर भारत में वायु प्रदूषण की म़ुख्य वजह यही है।

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