तीन तलाक पर कानून बनने के बाद मेरी बेटी को इस यातना से नहीं गुजरना पड़ेगा : शायरा बानो

तीन तलाक पर कानून बनने के बाद मेरी बेटी को इस यातना से नहीं गुजरना पड़ेगा : शायरा बानोतीन तलाक।

नई दिल्ली (आईएएनएस)। “अभी हमारी मुहिम खत्म नहीं हुई है। तीन तलाक के बाद अब हलाला और बहुविवाह प्रथा को भी हाशिए तक पहुंचाना बाकी है”, ऐसा कहना है शायरा बानो का।

शायरा बानो ने तीन तलाक की कुप्रथा के खिलाफ जंग का ऐलान कर मुस्लिम समुदाय में एक क्रांति ला दी। तीन तलाक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने शायरा बानो की हक की आवाज को सुना और अगस्त 2017 महीने में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए ट्रिपल तलाक को अंसवैधानिक करार दिया। 5 जजों वाली संवैधानिक पीठ ने 3-2 के बहुमत से सैंकड़ों साल से चली आ रही इस कुरीति पर रोक लगाई। पीठ के मुताबिक ट्रिपल तलाक संविधान के आर्टिकल 14 में समानता के अधिकार का हनन करता है।

शायरा बानो कहती हैं कि पुरुषों की जो जमात इस विधेयक का विरोध कर रही है, वह मुस्लिम महिलाओं के सशक्त होने की राह में रोड़े अटका रही है।

शायरा कहती हैं कि 'अभी हमारी मुहिम खत्म नहीं हुई है। तीन तलाक के बाद अब हलाला और बहुविवाह प्रथा को भी हाशिए तक पहुंचाना बाकी है।'

शायरा लोकसभा में मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2017 के पारित होने को मुस्लिम महिलाओं के लिए जड़ी-बूटी मानते हुए कहती हैं कि ऐसी सैकड़ों महिलाएं हैं, जो बरसों से अपने शौहरों की ज्यादतियां सह रही हैं।

मेरी भी एक बेटी है। खुशी इस बात की है कि उसे तीन तलाक पर कानून बन जाने के बाद उस यातना से गुजरना नहीं पड़ेगा, जिससे मैं गुजरी।
शायरा बानो

वह कहती हैं कि लोकसभा में विधेयक के पारित होने के बाद उम्मीद है कि राज्यसभा में भी यह बिना किसी रोकटोक के पारित हो जाएगा। कई सांसदों एवं नेताओं द्वारा इस विधेयक का विरोध करने के बारे में पूछने पर वह कहती हैं, "इसका विरोध पुरुषों की वही जमात कर रही है, जो महिलाओं को सशक्त होते नहीं देखना चाहती।"

शायरा बानो ने कहा, "हमारे इस्लाम में पुरुषों को बेतहाशा अधिकार दिए गए हैं, वे चार शादियां कर सकते हैं, जब मन किया तलाक दे सकते हैं। हम महिलाओं के पास क्या है, हर वक्त हमारे ऊपर तीन तलाक की तलवार लटकी रहती है।"

उत्तराखंड की शायरा (38 वर्ष) कहती हैं, "हमारे पवित्र कुरान में कहीं भी फौरी तीन तलाक का जिक्र नहीं है। कई मुस्लिम देशों में तीन तलाक पर प्रतिबंध है।"

भारत में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात होती है, वह ट्रिपल तलाक पर पाकिस्तान, बांग्लादेश और सीरिया जैसे देशों से भी पिछड़ा है। दुनिया के 22 मुसलमान देशों ने अपने यहां पर ट्रिपल तलाक को बैन किया हुआ है। विश्व का पहला देश इजिप्ट दुनिया का पहला ऐसा देश है जिसने ट्रिपल तलाक को खत्म किया था। इसके बाद पाकिस्तान, बांग्लादेश, इराक, श्रीलंका, सीरिया, ट्यूनीशिया, मलेशिया, इंडोनेशिया साइप्रस, जॉर्डन, अल्जीरिया, इरान, ब्रुनेई, मोरक्को, कतर और यूएई में भी ट्रिपल तलाक को बैन किया गया है।

शायरा बानो कहती हैं, "मुस्लिम समाज में शौहर, बीवी की हर गलती पर तीन तलाक की धमकी देता है। मेरी शादी 2001 में हुई थी, लेकिन दो साल तक बच्चा नहीं हुआ तो पति और सास तीन तलाक की धमकी देने लगे।"

उन्होंने कहा, "तीन तलाक पुरुषों द्वारा महिलाओं के शोषण का हथियार है, जब मन किया चला दिया। पति गुस्से में है तो तीन तलाक दे दिया, शराब पीकर आकर मारपीट करे तो तलाक दे दिया, किसी से अफेयर है तो तीन तलाक दे दिया। हम महिलाओं का तो कुछ अस्तित्व ही नहीं रह गया।"

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विपक्ष के कई नेता तीन तलाक विधेयक में संशोधन की मांग कर रहे हैं। इन संशोधनों के बारे में पूछने पर शायरा कहती हैं, "संशोधन तो होते रहते हैं। पहली जरूरत है कि इस विधेयक को तुरंत पारित किया जाए।

शायरा बानो उत्तराखंड के काशीपुर की रहने वाली हैं। वर्ष 2002 में शादी हुई, उनके दो बच्चे भी हैं। ससुराल में को उन्हें प्रताड़ना दी जाती थी, दहेज की मांग की जाती और मारा-पीटा जाता था। वर्ष 2015 में उनके पति ने उन्हें डाक के जरिए तलाक भेज कर रिश्ता खत्म कर लिया। शायरा बानो ने हिम्मत नहीं हारी और तलाक को चुनौती देने वे सुप्रीम कोर्ट पहुंची।

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लोकसभा में पारित हो गया है तो जल्द ही राज्यसभा में भी पारित हो और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बने। तीन तलाक के लिए कानून बनना बहुत जरूरी है। संशोधन तो समय के साथ-साथ होते भी रहेंगे।"

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वह कहती हैं कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित करने के बाद भी 2017 में तीन तलाक के 300 मामले सामने आए। कानून बनेगा तो लोगों में डर होगा। कानून के जरिए यह डर बनाना बहुत जरूरी है।

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शायरा बानो इस विधेयक के तहत तीन तलाक देने वाले पुरुषों को अधिकतम तीन साल की सजा के प्रावधान से संतुष्ट हैं। वह कहती हैं, "तीन साल की सजा मामूली नहीं है। सजा के प्रावधान से पुरुषों में डर बना रहेगा तो इन मामलों में यकीनन कमी आएगी।"

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