कर्नाटक में मिला तेजी से फैलने वाला नए तरह का खरपतवार

अगर सही समय पर इसका नियंत्रण नहीं किया गया तो गाजर घास की तरह पूरे देश में फैल सकता है।

कर्नाटक में मिला तेजी से फैलने वाला नए तरह का खरपतवार

वैज्ञानिकों ने कर्नाटक में एक नए तरह के खरपतवार की पता लगाया है, जो देश में पहली बार देखा गया है। अगर सही समय पर इसका नियंत्रण नहीं किया गया तो गाजर घास की तरह पूरे देश में फैल सकता है।


इस पौधे की पहचान एथुलिया ग्रेसिलिस डेलीइल (Ethulia gracilis Delile) के रूप में की गई है। कर्नाटक के बेलगावी जिले के कई जगह पर देखा गया है। आमतौर पर ये अफ्रीका में पाया जाता है। सबसे पहले इसे निप्पानी-चिकोदी रोड के पास इकट्ठा किया गया था, धीरे-धीरे ये बागलकोट जिले के महलिंगपुर, मुधोल और जमखंडी तालुका में भी देखा गया।

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शिवाजी विश्वविद्यालय, कोल्हापुर के विशेषज्ञ जगदीश दलावी बताते हैं, "धीरे-धीरे ये खरपतवार गाजर घास और तानतानी जैसे खतरनाक खरपतवारों की तरह देश के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकता है।"

इसके बीज पैराशूट की तरह होते हैं जो हवा के साथ कहीं भी पहुंच सकते हैं। ये खरपतवार एस्टरेसाई नामक सजावटी पौधों के एक व्यापक परिवार से संबंधित है। यह बहुत तेज पत्तियों और शीर्ष पर एक फूल के साथ लगभग दो फीट ऊंचाई तक बढ़ता है। यह कर्नाटक के बेलगावी जिले के शुष्क क्षेत्रों में एक सर्वेक्षण के दौरान खोजा गया था।

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इसकी तेजी से फैलने की संभावना ज्यादा होती है, क्योंकि एस्टरेसा परिवार के पौधे बहुत तेजी से बढ़ते हैं, और इसमें बड़ी संख्या में बीज पैदा होते हैं जो दूर-दूर तक फैल जाते हैं। इस पर किसी रोग-कीट का भी असर नहीं होता है। अभी तक कर्नाटक में इसकी जानकारी मिली है।

भारत में एथुलिया की केवल दो अन्य प्रजातियां पायी जाती हैं, लेकिन नए खरपतवार ये उनसे बिल्कुल अलग है और अफ्रीका में पाए जाने वाले एक पौधे की तरह दिखता है।


विशेषज्ञ जगदीश दलावी कहते हैं, "यह खरपतवार भारत में कैसे आया ये एक गंभीर मुद्दा है, भारत ने अफ्रीका से अरहर और कुछ अन्य फसलों का आयात किया था, हो सकता है इस खरपतवार के बीज उनके साथ आए होंगे।" अभी तक इसके लिए किसी हर्बीसाइड ये पेस्टीसाइड नहीं बनाया गया है, जिससे इसका नियंत्रण किया जा सके।

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