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देशी नस्ल की गायों की घटती आबादी पर NGT सख्त, सरकार को राष्ट्रीय नीति तैयार करने को कहा 

नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने आज केंद्र को देश भर में देशी नस्ल के मवेशियों की आबादी में तेजी से आ रही गिरावट रोकने के लिए एक राष्ट्रीय नीति तैयार करने का निर्देश दिया।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता में एक पीठ ने पर्यावरण मंत्रालय और पशुपालन विभाग को सभी राज्यों के साथ बैठक करने और मुद्दे पर एक साझा नीति के साथ आने को कहा। पीठ ने कहा, ‘‘विभिन्न राज्यों की ओर से सौंपे गये रिकार्ड से साफ पता चलता है कि देशी नस्लों के मवेशियों में तेजी से गिरावट आ रही है।

हमें बताइए कि आपने इन जीवों की आबादी में गिरावट रोकने के लिए कौन सा कदम उठाया है। इनकी प्रजाति लुप्त भी हो सकती है। यह एक गंभीर मुद्दा है और एक राष्ट्रीय नीति की जरूरत है।'' अधिकरण ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से छुट्टियों के दौरान सभी पक्षों से मुद्दे पर चर्चा करने और फैसले के बारे में उसे अवगत कराने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 22 मई को होगी।

भारत में देशी नस्ल की गायों को एक उम्र के बाद मरने के लिए छोड़ दिया जाता है जबकि विदेशों में हमारे यहां से गईं स्वदेशी नस्ल की गायें रिकार्ड दुग्ध उत्पादन कर रही हैं। गिरि नस्ल की गाय ने कुछ वर्षों पहले ब्राजील में 62 लीटर दुग्ध उत्पादन करके रिकॉर्ड बनाया था। भारत से गई गिरि गाय को ब्राजील के किसान ने वैज्ञानिक सलाह से पाला-पोसा था। जबकि कहा जाता है भारत में सबसे ज्यादा गैर उपयोगी पशु हैं।

भारत ने वर्ष 2015-16 में कुल 16 करोड़ लीटर दुग्ध उत्पादन किया। देश में 51 प्रतिशत उत्पादन भैंसों से, 20 प्रतिशत देशी नस्ल की गायों से, 25 प्रतिशत विदेशी नस्ल की गायों से और शेष छोटे जानवरों से उत्पादन होता है। देश में डेयरी उद्योग से छह करोड़ किसान अपनी आजीविका चला रहे हैं।