राष्ट्रहित के लिए सुप्रीम कोर्ट के सात जजों के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी

राष्ट्रहित के लिए सुप्रीम कोर्ट के सात जजों के खिलाफ  गैरजमानती वारंट जारीसुप्रीम कोर्ट।

कोलकाता। कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस सीएस कर्नन ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर समेत सात जजों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। जस्टिस कर्नन ने स्वत: संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है कि वे दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश जारी कर सातों जजों पर गैर-जमानती धाराएं लगाने का आदेश दें।

एक मई को सातों जजों के हाजिर होने के अपने आदेश का हवाला देकर जस्टिस कर्नन ने उनकी गैरहाजिरी को इस फरमान का आधार बनाया है। जस्टिस कर्नन द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि राष्ट्रहित में आम लोगों को भ्रष्टाचार से बचाने के लिए जजों के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया गया है।

उधर सुप्रीम कोर्ट में आधार मामले पर अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने मंगलवार को जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ में कर्नन का उदाहरण देते हुए कहा कि मुझे नहीं लगता है कि वह 'जेंटलमैन' कोर्ट के निर्देशों का पालन करेंगे। रोहतगी के इस बयान के बाद ही जस्टिस कर्नन ने उक्त आदेश जारी किया है।

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उल्लेखनीय है कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की पीठ ने कर्नन की मानसिक जांच करवाने का निर्देश पश्चिम बंगाल के डीजीपी को दिया था। उसके बाद जस्टिस कर्नन ने इन जजों की ही मानसिक जांच एम्स के चिकित्सकों से करवाने का आदेश दिल्ली पुलिस आयुक्त को दिया था। संवाददाता सम्मेलन कर उन्होंने इसकी जानकारी दी थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भड़के जस्टिस कर्नन ने सोमवार को कहा था कि वह मेडिकल जांच नहीं करवाएंगे।

उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर पुलिस ने उनकी मर्जी के खिलाफ मेडिकल जांच करने की कोशिश की तो वे पश्चिम बंगाल के डीजीपी के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए उनके निलंबन का आदेश जारी कर देंगे।

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