ओबीसी आरक्षण पर केंद्र का बड़ा फैसला, क्रीमी लेयर की सीमा 6 लाख सालाना से 8 लाख तक बढ़ाई

ओबीसी आरक्षण पर केंद्र का बड़ा फैसला, क्रीमी लेयर की सीमा 6 लाख सालाना से 8 लाख तक बढ़ाईअरुण जेटली।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को केंद्र सरकार की नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए क्रीमी लेयर की उच्चतम सीमा बढ़ाकर आठ लाख रुपए सालाना कर दी है। पहले यह सीमा छह लाख रुपए थी। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को इसकी घोषणा की और कहा कि सभी पिछड़ी जातियों तक लाभ पहुंचे इसलिए सालाना आय की सीमा 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

इस घोषणा के बाद ओबीसी श्रेणी के सालाना आठ लाख रुपए तक की आय वाले अभ्यर्थी आरक्षण का लाभ ले पाएंगे। अभी तक यह लाभ उन्हीं को मिलता था जिनकी आय छह लाख रुपए सालाना होती थी।

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ओबीसी के उप वर्गीकरण पर विचार के लिए आयोग गठित करने को मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ओबीसी के उप वर्गीकरण के मुद्दे पर विचार के लिए एक आयोग गठित करने के प्रस्ताव को बुधवार को मंजूरी दे दी। पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में संविधान के अनुच्छेद 340 के तहत अन्य ओबीसी के उप वर्गीकरण के मुद्दे पर विचार के लिए एक आयोग गठित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।

यह आयोग अपने अध्यक्ष की नियुक्ति की तिथि से 12 सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करेगा। इस आयोग को अन्य पिछड़ा वर्गों के उप वर्गीकरण पर विचार करने वाले आयोग के नाम से जाना जाएगा। आयोग की सेवा शर्तो में कहा गया है कि यह ओबीसी की व्यापक श्रेणी समेत जातियों और समुदायों के बीच आरक्षण के लाभ के असमान वितरण के बिन्दुओं पर विचार करता है जो ओबीसी को केंद्र सूची में शामिल करने के संदर्भ में होगा।

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आयोग को ऐसे ओबीसी वर्ग के उप वर्गीकरण के लिए वैज्ञानिक तरीके वाला तंत्र, प्रक्रिया, मानदंड और मानक खाका तैयार करने के साथ केंद्र सूची में दर्ज ओबीसी के समतुल्य संबंधित जातियों, समुदायों, उप जातियों की पहुचांन करने की पहल करनी है एवं उन्हें संबंधित उप श्रेणियों में वर्गीकृत करना है। सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा साहनी एवं अन्य बनाम भारत सरकार मामले में 16 नवंबर 1992 को अपने आदेश में व्यवस्था दी थी कि पिछड़े वर्गों को पिछड़ा या अति पिछड़ा के रूप में श्रेणीबद्ध करने में कोई संवैधानिक या कानून रोक नहीं है, अगर कोई सरकार ऐसा करना चाहती है।

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