सहकारी बैंकों में भारी मात्रा में पड़े हैं पुराने नोट: शरद पवार

सहकारी बैंकों में भारी मात्रा में पड़े हैं पुराने नोट: शरद पवारशरद पवार।

नई दिल्ली (भाषा)। राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने नोटबंदी के फैसले के बाद जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) में भारी मात्रा में पुराने नोट पड़े होने का मुद्दा आज राज्यसभा में उठाया और कहा कि उन नोटों को करेंसी चेस्ट में जमा कराने की अनुमति नहीं दिए जाने से किसानों को रिण देने में समस्याएं आ रही हैं।

पवार ने उच्च सदन में शून्यकाल में यह मुद्दा उठाया और कहा कि रिजर्व बैंक के एक आदेश के बाद ऐसे बैंकों में भारी मात्रा में पुराने नोट पडे हुए हैं। उन्होंने कहा कि देश के डीसीसीबी के पास 44 हजार करोड़ रुपए जमा कराए गए। महाराष्ट्र के 31 जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन बैंकों के पास 4600 करोड़ रुपए जमा हुए।

उन्होंने कहा कि नए निर्देशों के बाद डीसीसीबी पूरी राशि नहीं जमा कर सके और ऐसे बैंकों के पास 8,000 करोड रुपए के पुराने नोट थे। उन्होंने कहा कि इन बैंकों को उन नोटों पर ब्याज भी देना होगा जबकि उन नोटों को नकद जमा का हिस्सा नहीं माना जा रहा है। पवार ने कहा कि ऐसी स्थिति में बैंकों की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो रही है। इसका असर रबी के मौसम में रिणों के वितरण पर हुआ। उन्होंने कहा कि बडी संख्या में किसानों को रिण नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि डीसीसीबी के चेस्ट में पुराने नोट पडे हुए हैं लेकिन उसे वितरित नहीं किया जा सकता हालांकि उस पर ब्याज देना होगा।

राकांपा नेता ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को भी लिखा है ताकि उन नोटों को करेंसी चेस्ट में जमा कराने की अनुमति मिल सके। उनकी मांग से कई सदस्यों ने खुद को संबद्ध किया। संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि वह इस मुद्दे से वित्त मंत्री को अवगत करा देंगे।

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