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महाराष्ट्र: किसानों को रुला रही बारिश, बर्बाद हो गई प्याज की फसल, अगले सीजन में बढ़ सकते हैं दाम

अगले कुछ दिनों में प्याज महंगा हो सकता है? शायद हां क्योंकि देश में सबसे ज्यादा प्याज उगाने वाले महाराष्ट्र में भारी बारिश के चलते प्याज की नर्सरी बर्बाद हो गई है। किसानों को तो घाटा हुआ, इसका असर आने वाले दिनों में भी पड़ेगा

Divendra SinghDivendra Singh   8 Oct 2020 8:51 AM GMT

महाराष्ट्र: किसानों को रुला रही बारिश, बर्बाद हो गई प्याज की फसल, अगले सीजन में बढ़ सकते हैं दाम

"हमने तीन बार प्याज की नर्सरी लगायी, हर बार बारिश हो गई और नर्सरी तैयार ही नहीं हो पायी। एक एकड़ में प्याज लगाने की नर्सरी तैयार करने के लिए लगभग 30 हजार रुपए लगते हैं, लेकिन लगातार बारिश से सब बर्बाद हो गया।" किसान कैलाश जाधव कहते हैं।

कैलाश जाधव महाराष्ट्र के नाशिक जिले के चांदवड तालुका के किसान हैं। सितम्बर महीने में लगातार हुई बारिश ने नाशिक, अहमदनगर, पुणे, धुले समेत कई जिलों में प्याज की खेती करने वाले किसानों की नर्सरी बर्बाद कर दी।

कैलाश जाधव आगे बताते हैं, "हमारे गाँव में दो-चार किसानों को छोड़कर सबकी नर्सरी बारिश से बर्बाद हुई है, बारिश की वजह से महाराष्ट्र (Maharashtra) के किसानों पर बहुत बड़ा संकट आया है। सितम्बर में तो लगातार बारिश ही होती रही। अगर कोई किसान एक एकड़ में प्याज (onion) की खेती करता है तो नर्सरी में दस किलो बीज लगते हैं, इस समय हमारे यहां बीज की कीमत 3000 हजार रुपए किलो है। तो इस तरह 30 हजार का तो बीज ही लग गया, उसके बाद दवाई (कीटनाशक आदि) मजदूरी अलग से। हमारे पैसे तो बर्बाद हुए ही, मार्केट में प्याज भी देरी से आएगी।"

बारिश की वजह से महाराष्ट्र के किसानों पर बहुत बड़ा संकट आया है। अगर कोई किसान एक एकड़ में प्याज तो इस तरह 30 हजार का तो बीज ही लग गया, उसके बाद दवाई मजदूरी अलग से। हमारे पैसे तो बर्बाद हुए ही, मार्केट में प्याज भी देरी से आएगी।- कैलाश जाधव, प्याज किसान, धुले

पुणे में स्थित प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय (ICAR - DOGR) के अनुसार देश में सबसे अधिक प्याज उत्पादन महाराष्ट्र में होता है, उसके बाद कर्नाटक, गुजरात, बिहार, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य आते हैं। महाराष्ट्र के नाशिक, अहमदनगर, पुणे, धुले, शोलापुर जिले में किसान प्याज की खेती करते हैं।

महाराष्ट्र में प्याज की नर्सरी में भरा पानी। फोटो- साभार किसान

महाराष्ट्र में साल में चार बार (अगेती खरीफ, खरीफ, पछेती खरीफ और रबी) प्याज की खेती होती है। अगेती खरीफ में फरवरी-मार्च में बीज की बुवाई, अप्रैल-मई में प्याज की रोपाई और अगस्त-सितम्बर महीने में प्याज की हार्वेस्टिंग होती है। खरीफ में मई-जून में बीज की बुवाई, जुलाई-अगस्त में रोपाई और अक्टूबर-दिसम्बर महीने में हार्वेस्टिंग होती है। पछेती खरीफ में अगस्त-सितम्बर में बीज की बुवाई, अक्टूबर-नवंबर में रोपाई और जनवरी-मार्च में हार्वेस्टिंग होती है। जबकि रबी मौसम में अक्टूबर-नवंबर में बीज बुवाई, दिसम्बर-जनवरी में रोपाई और अप्रैल मई में प्याज की हार्वेस्टिंग होती है।

सितम्बर महीने में महाराष्ट्र के प्याज उत्पादक जिलों में पछेती खरीफ की नर्सरी बुवाई और अगेती खरीफ प्याज की हार्वेस्टिंग चल रही थी। जब लगातार बारिश से किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है।

राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में लगभग 507.96('000 ha) क्षेत्रफल में प्याज की खेती और 8854.09 ('000 MT) प्याज का उत्पादन होता है।

देश के अलग-अलग राज्यों में प्याज उत्पादन क्षेत्र। सोर्स- एपीडा

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संगठन के अध्यक्ष भारत दिघोळे कहते हैं, "सबसे ज्यादा प्याज महाराष्ट्र में होता है, इस बार यहां पर शुरू से ही किसानों को परेशानी होती रही। पहले प्याज की नर्सरी के लिए बीज की किल्लत रही और इस बार प्याज के बीज के दाम भी बहुत ज्यादा रहे। किसान खुद भी प्याज का बीज तैयार करते हैं, लेकिन पिछली बार प्याज के बीज के खेत भी खराब मौसम की वजह से खराब हो गए थे। बीज अच्छा न होने के कारण पौध ही नहीं तैयार हो पायी, जिससे किसानों ने दोबारा किसी तरह नर्सरी तैयार की तो लगातार बारिश हो गई, बारिश से फिर नर्सरी खराब हो गई। इसकी वजह से किसानों को तो नुकसान हुआ ही मार्केट में भी प्याज देरी से आएगा, जो प्याज नंवबर में बाजार में आ जाता, वो प्याज अब दिसम्बर तक बाजार में आएगा।"

मौसम विज्ञान विभाग की वेबसाइट के अनुसार, सितम्बर महीने में महाराष्ट्र के नासिक, अहमदनगर, पुणे, शोलापुर जैसे प्याज उत्पादक जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई। अहमद नगर जिले में औसत बारिश 147 मिमी होती है, जबकि 244 मिमी बारिश हुई, जोकि 74 प्रतिशत ज्यादा है। पुणे में 156.4 मिमी औसत बारिश होती है, जबकि 187.1 मिमी बारिश हुई, जोकि 20 प्रतिशत ज्यादा है। धुले जिले में 109.5 मिमी औसत बारिश होती है, जबकि 140.6 मिमी बारिश हुई जोकि 28 प्रतिशत ज्यादा है। नाशिक में 183.5 मिमी बारिश होती है, जबकि 211.1 मिमी बारिश हुई जोकि 15 प्रतिशत ज्यादा है। इसी तरह कई प्याज उत्पादक जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है।

मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार महाराष्ट्र के जिलों में सामान्य (हरा), सामान्य से अधिक (नीला और गहरा नीला) और सामान्य (लाल) से कम बारिश हुई।

भारत मौसम विज्ञान विभाग, पुणे के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एन चटोपाध्याय बताते हैं, "सितम्बर महीने में कई जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई, जहां पर धान की खेती होती है, वहां के लिए तो बारिश फायदेमंद है, लेकिन प्याज और दूसरी फसलों को नुकसान भी हुआ है। सितम्बर में कुछ जिलों में तो सामान्य से कम भी बारिश हुई है, लेकिन कुछ जिलों में ज्यादा बारिश हुई।"

सितम्बर महीने में कई जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई, जहां पर धान की खेती होती है, वहां के लिए तो बारिश फायदेमंद है, लेकिन प्याज और दूसरी फसलों को नुकसान भी हुआ है। सितम्बर में कुछ जिलों में तो सामान्य से कम भी बारिश हुई है, लेकिन कुछ जिलों में ज्यादा बारिश हुई।- डॉ. एन चट्टोपाध्याय, मौसम वैज्ञानिक, पुणे, IMD

पिछले कई साल से बारिश से परेशान होकर कई किसानों ने पछेती खरीफ की प्याज की बुवाई करनी ही छोड़ दी है। नाशिक जिले के देवला तालुका के किसान संदीप मागर भी उन्हीं किसानों में से एक हैं। संदीप बताते हैं, "आसपास के कई किसानों की नर्सरी को नुकसान हुआ है, पिछले साल भी यही हुआ था, नर्सरी तैयार की थी, लेकिन बारिश से नुकसान हो गया। इसलिए इस बार हमने प्याज की खेती की खेती ही नहीं कि पहले से ही सोच लिया था कि प्याज नहीं उगाएंगे। पहले चार-पांच एकड़ एरिया में प्याज की खेती करते। अभी हमारे गाँव में बहुत से किसानों ने पहले की ही प्याज रखी है, वही नहीं बिक पायी है।"

नर्सरी को तो नुकसान पहुंचा ही है, जिन किसानों ने नर्सरी की रोपाई कर दी थी, उसमें भी पानी भर गया। प्याज जैसी कंद वाली फसलों के लिए जलभराव काफी नुकसानदायक साबित होता है। अहमदनगर जिले के पाथर्डी तालुका के मिरी गाँव के किसान जितेंद्र शिंदे को भी काफी नुकसान हुआ है। जितेंद्र बताते हैं, "नर्सरी का तो नुकसान हुआ ही, जो फसल लगायी थी, उसमें भी पानी भर गया। पानी भरने से काफी नुकसान हुआ।"

अहमदनगर जिले के पाथर्डी तालुका के मिरी गाँव के किसान की पहले से रखी प्याज भी ज्यादा बारिश से सड़ गई। फोटो: किसान

कई किसानों की भंडारण में रखी प्याज को भी नुकसान पहुंचा है। जितेंद्र कहते हैं, "पिछले साल का जो प्याज हमने रखा था वो भी सड़ने लगा है। वैसे हम जितनी बारिश होती है, उसी हिसाब से रखरखाव करते हैं, लेकिन ज्यादा बारिश की वजह से शेड फेल हो गया, जिसे हमारे यहां कांदा चाल बोलते हैं। मजबूरी में प्याज फेकनी पड़ी।"

धुले जिले के किसान जितेंद्र जाधव भी दस एकड़ की खेती करते हैं, उन्होंने दस किलो बीज डालकर नर्सरी तैयार की थी। जितेंद्र कहते हैं, "बारिश से पूरी नर्सरी बर्बाद हो गई, अब बारिश रुकी है फिर से नर्सरी लगाएंगे, अब दूसरी फसलों की खेती तो कर नहीं सकते, हम यहां पर प्याज ही उगाते हैं। इस बार प्याज लेट हो जाएगा, जिससे आगे की फसलें भी देरी से होंगी।"

महाराष्ट्र के नाशिक जिले में प्याज की नर्सरी लगाती महिलाएं। फोटो अरविंद शुक्ला

प्याज ही नहीं महाराष्ट्र के उस्मानाबाद, नांदेड़, वर्धा जैसे कई जिलों में इस समय खरीफ की सोयाबीन, बाजरा, उड़द, कपास, ज्वार और मूंग की फसल तैयार हो रही है। सितम्बर से अक्टूबर में ये फसलें तैयार हो जाती हैं, लेकिन इस बार फिर बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। यहां पर भी इस बार सामान्य से अधिक बारिश हुई, जिसका असर फसलों पर पड़ा है।

साल 2019 में भी पहले भारी बारिश के चलते प्याज की नर्सरी से लेकर फसल तक को भारी नुकसान हुआ था, जो फसल तैयार हुई थी वो ज्यादा नमी के चलते सड़ गई थी। साल 2019 में जब दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में प्याज 200 रुपए किलो तक पहुंच गया उस वक्त गांव कनेक्शन की टीम ने नाशिक समेत कई जिलों ग्राउंड रिपोर्ट की थी। उस दौरान के हालात वीडियो में देखिए

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