चिंताजनक : यहां सिर्फ 2 फीसदी बचा पीने का पानी

चिंताजनक : यहां सिर्फ 2 फीसदी बचा पीने का पानीभोपाल शहर की बात करें तो शहर में 2.3 फीसदी पानी ही पीने योग्य बचा है। (फोटो-विनय)

अमित सोनी

भोपाल। मध्य प्रदेश में भू-जल की स्थिति दयनीय होती जा रही है। केंद्रीय भू-जल विभाग की एक रिपोर्ट ने जल संरक्षण से जुड़े काम करने वाले संगठनों और जिम्मेदारों के कान खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अगर भोपाल शहर की बात करें तो शहर में 2.3 फीसदी पानी ही पीने योग्य बचा है। बाकी 97.6 फीसदी पानी पीने योग्य बिल्कुल भी नहीं है।

यही स्थिति पूरे प्रदेश में बनते जा रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भोपाल में पानी की रिसाइकिलिंग के लिए 2.6 फीसदी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए गए हैं। इन प्लांटों का 97.4 फीसदी गंदा पानी सीधे अनट्रीट होकर तालाबों और नदियों में मिल रहा है। ऐसे में अगर समय रहते पानी के मोल को सरकार ने नहीं पहचाना तो भविष्य में राजधानी में लोगों को पानी खरीदकर पीना पड़ सकता है।

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आयरन और नाइट्रेट की मात्रा बढ़ी

रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल के पानी में आयरन और नाइट्रेट की मात्रा ज्यादा बढ़ गई है। ये दोनों ही विषैले तत्व हैं। जल से जुड़े वैज्ञानिक बताते हैं कि 1 लीटर पानी में 1.0 मिलीग्राम से ज्यादा आयरन और 45 ग्राम प्रतिलीटर से ज्यादा नाइट्रेट नहीं होना चाहिए। लेकिन जमीन के अंदर इन दोनों विषैले तत्वों की मात्रा तेजी से बढ़ती जा रही है। जो आगे चलकर लोगों के स्वास्थ के लिए और घातक हो सकती है। एमवीएव कॉलेज द्वारा किए गए शाेध में भी इन दोनों रसायनों की मात्रा अधिक होने की पुष्टी हो चुकी है।

ये दो कारण जिनसे पानी हो रहा खराब

1- जीयोस्टेटा ऑफ स्ट्रेटा

पीने का पानी जमीने के नीचे की चट्टानों में होता है। चट्टानों में गड़बड़ी या विषेला पदार्थ मिलने या फिर उनमें फ्लोराइड की मात्रा पाए जाने से पानी खराब हो जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक प्रदेश के धार, शिवपुरी और सीहोर जिले के कुछ भाग के पानी में फ्लाराइड होने से वहां के लोगों की हड्डियां गलती जा रही है।

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2- सर्फेस वॉटर

तालाबों को खराब करने वाला पानी जो अनट्रीटमेंट सीवेज के मिलने से होता है। वह सीधे जमीन में कई फीट नीचे तक पहुंचता है। जो ग्राउंड वॉटर की गुणवत्ता को खराब कर रहा है। प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में झांसी, भिंड, ग्वालियर, ललितपुर आदि में भूजल की स्थिति ठीक है। वहां रसायनों की मात्रा कम है।

इन इलाकों में स्थिति ज्यादा खराब

भोपाल के कोलार, शाहपुरा, मंडीदीप, भानपुरा की खंती वाला क्षेत्र और पुराने शहर के इलाके का भूजल अब पीने योग्य नहीं बचा है। यहां के भूजल की स्थिति और ज्यादा खराब है। शाहपुरा की बात करें तो गंदे नालों का पानी ट्रीटमेंट न होने से यही पानी जमीन में सीधे पहुुंच रहा है। यहां तक कि ट्यूबवेलों से निकलने वाले पानी में सीवेज के पानी और अन्य रसायनों की मात्रा ज्यादा बढ़ गई है।

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एक्सपर्ट की राय

वॉटर बॉडी ठीक करे सरकार
जल संरक्षण को लेकर काम करने वाले वरिष्ठ पर्यावरणविद् सुभाषसी पांडे का कहना है कि सरकार पानी को लेकर चिंतित नहीं है। सरकार को सबसे पहले प्रदेश की वॉटर बॉडी को ठीक करने की दिशा में काम करना चाहिए। जब तब सौ फीसदी सीवेज के ट्रीटमेंट प्लांट नहीं होंंगे, तब तक भू-जल की स्थिति नहीं सुधर पाएगी। और हालात लोगों के सामने पानी खरीदकर पीने जैसे हो जाएंगे।

  • फैक्ट फाइल
    2.3 प्रतिशत पीने योग्य पानी
    2.6 प्रतिशत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
    100 प्रतिशत हो ट्रीटमेंट प्लांट
    97.4 प्रतिशत सीवेज तालाबों में मिल रहा
    1 मिली ग्राम से ज्यादा बढ़ा पानी में आयरन
    45 ग्राम से ज्यादा बढ़ा नाइट्रेट

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