महाराष्ट्र : अब तक मात्र 3200 किसानों को मिली वित्तीय सहायता  

महाराष्ट्र : अब तक मात्र 3200 किसानों को मिली वित्तीय सहायता  किसान। फोटो : साभार इंटरनेट

नागपुर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र सरकार की एक समिति ने किसान ऋण माफी के तहत तात्कालिक राहत के रूप में 10 हजार रुपये वितरित करने में हुए भारी विलंब पर शनिवार को सवाल खड़े किए। यह योजना एक महीने से अधिक समय पहले घोषित की गई थी, बावजूद इसके अभी तक इसे पूरा नहीं किया जा सका है।

वसंतराव नाईक शेति स्वावलंबी मिशन (वीएनएसएसएम) के अध्यक्ष किशोर तिवारी ने कहा कि पात्र 90 लाख किसानों को राहत मुहैया कराने के सरकार के दावे के विपरीत अभी तक मात्र 3,200 किसानों को ही यह धनराशि वितरित की गई है। तिवारी ने आईएएनएस से कहा, यह किसानों का मजाक है, जो घोषित 10,000 रुपये की आपात राहत के लिए 28 दिनों से भटक रहे हैं। यही नहीं बुवाई का मौसम भी बीत रहा है और मॉनसून भी जल्द विदा हो जाएगा।

90 लाख किसानों को दिया जाना था मुआवजा

आधिकारिक आंकड़े के अनुसार, राज्य के कुल एक करोड़ बीस लाख किसानों में से ऋण माफी के लिए पात्र लगभग 90 लाख किसान थे। इसमें भी महज 3,200 किसानों को उनकी खेती की गतिविधियों के लिए अबतक समय पर सहायता मिल पाई है। अन्य किसान दर-दर भटक रहे हैं या फिर आत्महत्या कर रहे हैं। तिवारी ने कहा, ''यह स्थिति राज्य सरकार द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक को गारंटी की पेशकश के बावजूद है, लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकांश बैंकों ने इस छोटी-सी राशि के वितरण के लिए कदम नहीं उठाया है।'' अभी तक मात्र विदर्भ-कोंकण ग्रामीण बैंक, महाराष्ट्र ग्रामीण बैंक और डीसीसीबी ने लगभग 3,200 किसानों को 10,000 रुपये की आपात राहत राशि जारी की है।

बैंकों की भी लापरवाही

आपको बता दें कि इस वित्तीय सहायता की घोषणा किसानों द्वारा 11 दिनों तक चलाए गए अभूतपूर्व आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने 11 जून को की थी। वहीं, 14 जून को सरकार ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि किसान 15 जून से बैंकों से 10,000 रुपये प्राप्त कर लें। उन्होंने कहा कि आश्चर्य की बात तो यह है कि सरकार ने बैंक गारंटी चार जुलाई को उपलब्ध कराई। किसानों के प्रति शत्रुतापूर्ण रवैया रखने का नौकरशाही और बैंकों पर आरोप लगाते हुए तिवारी ने कहा कि अबतक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने आरबीआई-नाबार्ड द्वारा खरीफ मौसम के लिए लक्षित फसल ऋण का मुश्किल से 15 प्रतिशत हिस्सा ही वितरित किया है, जबकि पिछले वर्ष 21 जुलाई तक लक्ष्य का 80 प्रतिशत फसल ऋण वितरित कर दिया गया था।

इस वर्ष फसल ऋण का प्रावधान लगभग 58,662 करोड़ रुपये हो सकता है, जो कि पिछले वर्ष के प्रावधान 51,235 करोड़ रुपये से लगभग 7,000 करोड़ रुपये अधिक है। तिवारी ने कहा, ''इस वर्ष असंवेदनशील बैंकों और नौकरशाहों ने 10,000 रुपये की छोटी राशि का भी मजाक बना दिया, और उनके नकारात्मक रवैए के कारण किसान लगातार आत्महत्या कर रहे हैं।''

संबंधित खबर : महाराष्ट्र का ये किसान उगाता है 19 फीट का गन्ना, एक एकड़ में 1000 कुंटल की पैदावार

संबंधित खबर : महाराष्ट्र में 40 लाख से ज्यादा किसान परिवार कर्ज़ में डूबे

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

Share it
Share it
Share it
Top