सहारनपुर का दर्द: मन तो मिलेगा, लेकिन वक़्त लगेगा

Basant KumarBasant Kumar   14 May 2017 6:53 PM GMT

सहारनपुर का दर्द: मन तो मिलेगा, लेकिन  वक़्त लगेगाअपनी जली साईकिल देखता लड़का।

सहारनपुर। ‘‘एक-दूसरे के प्रति दोनों समुदाय के मन में नफरत बैठ गयी है। हमारे जले घर उस वक़्त को भूलने नहीं दे रहे हैं। कभी साथ-साथ रहते थे हम लोग। मन तो मिलेगा, लेकिन अब वक़्त लगेगा।“ यह कहना है शबीरपुर गाँव के रहने वाले पल्टू राम (55 वर्ष) का, जो सहारनपुर हिंसा के बाद अपना दर्द बयां कर रहे थे।

जातीय संघर्ष में 25 घरों को जला दिया गया।

घटना के छह दिन बाद भी दलित समुदाय के घरों के आगे उनका जला समान रखा हुआ है। कभी साथ रहने वाली लोग गाँव के लोग एक-दूसरे से मिल तक नहीं रहे हैं। दोनों समुदाय में दूरी आ गयी है। गाँव की रहने वाली महिला बलबुतरी को पेट पर मारा गया है। पेट पर हाथ रखते हुए कहती हैं, ”हमने उनका क्या बिगाड़ा था। बाबा साहब की मूर्ति लगाना चाहते थे और पुलिस के मना करने के बाद काम भी रुक ही गया था। मारने वालों में से कई लोग जाने वाले थे, उनसे मदद की मांग करते रहे, लेकिन वो गंदी-गंदी गालियां देते हुए आग लगाते जा रहे थे।

मारने वालों में से कई लोग जाने वाले थे, उनसे मदद की मांग करते रहे, लेकिन वो गंदी-गंदी गालियां देते हुए आग लगाते जा रहे थे।
बलबुतरी, स्थानीय निवासी

बलबुतरी आगे बताती हैं, “उन्होंने (उपदर्वियों ) ने घरों में आग लगाने के अलावा जानवरों के लिए रखे चारे में भी आग लगा दिया। एक ने तो गाय के बछिया के पैर पर तलवार से मार दिया है। बछिया ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही है। घरों में रखी गाड़ियों को फूंक दिया। एक ही परिवार के चार-चार मोटर साईकिल को जला दिया गया। बिजली का कनेक्शन काट दिया उन्होंने, घटना के बाद से गाँव में बिजली नहीं आ रही है।“

राखी

वहीं, 20 वर्षीय राखी बताती हैं, “उस दिन वो सबको एक बराबर समझ रहे थे। लड़कियों के साथ कुछ गलत तो नहीं किया, लेकिन बहुत गंदी-गंदी गालियां दे रहे थे। हम लोग तो घर से भाग गयी थे, क्योंकि घरों में तो आग लगा दी गई थी। उन्होंने नलों को तोड़ दिया कि हम आग को बुझा ना सकें। आग बुझाने वाली गाड़ी आग लगने के दो घंटे बाद आई। गाड़ी तो पहले ही आ गयी थी, लेकिन दबंगों ने उसे गाँव के बाहर ही रोक दिया था।“

जला घर

शब्बीरपुर गाँव के पड़ोसी गाँव चंद्रपुर के पूर्व प्रधान महेंद्र सिंह बताते हैं, ‘‘दलित समुदाय के मन में दहशत है। हम कोशिश कर रहे हैं कि दोनों समुदाय के लोगों का हाथ मिलवाकर नफरत खत्म कराएं। इसके लिए हमने कलक्टर साहब से वक़्त माँगा है। जैसे ही वे वक़्त देते हैं, हम लोगों के साथ मिलकर बैठकर बात करेंगे।“

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जो हुआ, उसे भूल जाना चाहिए

दनौता ब्लॉक के प्रधान संघ के अध्यक्ष रामपाल सिंह इस घटना को दलितों के प्रति शोषण बताते हैं। रामपाल कहते हैं कि दलित अब चुप नहीं रहते हैं, जो कुछ लोगों को अखरता है। अभी भी लोग दलितों को बराबर मानने को तैयार नहीं है। उन्हें बाबा साहब की मूर्ति से दिक्कत है। जो हो चुका ,उसे दोनों समुदाय के लोगों को भुलाकर पहले की तरफ जीना चाहिए। भाईचारे के साथ एक और एकता में बंधकर।

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