सहारनपुर का दर्द: ‘वो लोग मेरी छाती पर तलवार मारना चाहते थे’

सहारनपुर का दर्द: ‘वो लोग मेरी छाती पर तलवार मारना चाहते थे’घायल रीना 

सहारनपुर। “वो लोग मेरे सिर और शरीर के बाकी हिस्सों पर हमला करने के बाद छाती पर तलवार मारना चाहते थे, लेकिन मैं हाथ जोड़कर बैठ गई थी। मेरे सिर, पेट और पैर हर जगह तलवार और सरिया से हमला किया गया। पुलिस उनके साथ थी।” ये बताती हैं जातीय संघर्ष में घायल हुई रीना (38 वर्ष)।

पांच मई को जनपद के शब्बीरपुर में हुए जातीय संघर्ष में घायल दस से ज़्यादा लोग जिला अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। जिला अस्पताल के पहले तले के एक कमरे में सभी घायलों को रखा गया है। कमरे के बाहर और भीतर पीड़ितों से मिलने आने वालों की भीड़ है। कमरे के अंदर सरकार की तरफ से पंखा के अलावा गर्मी से बचने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया।

घायल अग्नि भास्कर

घायल अग्नि भास्कर (उम्र 41) वर्ष बताते हैं, “मैं और मेरी पत्नी खेत से गेहूं काटकर आए थे। पत्नी रीना को छोटे बच्चे को दूध पिलाना और खाना खाना था। वो बच्चे को दूध पिला रही थी और मुझे मेरी बेटी खाना दे रही थी। तभी शोर हुआ और देखते-देखते सरिया और तलवार से हम लोगों पर हमला कर दिया। मुझे सबसे ज़्यादा इसीलिए मारा गया क्योंकि मैं बाबा साहब की मूर्ति का निर्माण का रहा था।”

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अग्नि भास्कर आगे बताते हैं, “वो लोग बाबा साहब मुर्दाबाद और योगी-जोगी ज़िंदाबाद के नारे लगा रहे थे। हमें गाली देते हुए उन्होंने बोला कि बाबा साहब का नाम मत लेना तुम लोग और न मूर्ति लगाने के बारे में सोचना। योगी-मोदी बोलो अगर यहां रहना है तो। अब आप बताओ हमें जो कुछ मिला है बाबा साहब की वजह से मिला है। हम उनका नाम कैसे नहीं ले सकते हैं। अग्नि भास्कर की पत्नी रीना को उपद्रवियों ने सिर पर और हाथ पर तलवार से हमला किया था।”

श्याम सिंह

मैं रास्ते में मिल गया था

श्याम सिंह (55 वर्ष) बताते हैं, “मेरे भतीजे की शादी हुई थी। मैं बाहर बाजार कुछ लाने गया था। जब बाजार से लौट रहा था तो रास्ते में गाँव के ही कुछ लड़कों ने देख लिया। जातिवादी गली देते हुए उन्होंने मुझपर सरिया से हमला कर दिया। मैं साइकिल से गिर गया तब जाकर छोड़ा।”

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मेरा घर और चार मोटरसाइकिलें जला दीं

दल सिंह (60 वर्ष) के कपड़ों पर खून अभी तक लगा हुआ है। उनपर भी तलवार से हमला किया गया था। बेड पर लेटे-लेटे दल सिंह मीडिया पर भी नाराज़गी दिखाते हैं। दल सिंह कहते है, “हमारी बातों को आपलोग लिखकर ले जा रहे हैं, लेकिन हमें क्या न्याय मिल गया। कोई पूछने तक नहीं आया हमें। पांच दिन से अस्पताल में हैं। घर जल चुका है। अब लौटकर उसी जले घर में जाएंगे। पुलिस उनके साथ थी। वो आग रोकने की कोशिश नहीं कर रहे थे। ऐसा लग रहा था पुलिस उनके पीछे-पीछे चल रही थी। आग लगने के बाद उन्होंने आग बुझाने का मौका भी नहीं दिया। पेट्रोल बम से हमला कर रहे थे।”

दल सिंह

मैं रिश्तेदारी में आया था

राजू (22 वर्ष) अपने रिश्तेदारी में आया था जब गाँव में यह सब हुआ। राजू बताते हैं, “मैं तो रिश्तेदारी में आया था, लेकिन यहां यह सब हो गया। मेरे हाथ पर तलवार से हमला किया गया। घूमने आए था अस्पताल में आ गया हूं। वो लोग सरिया, लाठी, तलवार और बंदूक के साथ आए थे। हम सब खाली थे। हमें तो पता भी नहीं था कि यह सब होने वाला है।”

राजू

कुछ लोग गाँव छोड़कर भाग गए

घटना के पांच-छह दिन गुज़र जाने के बाद भी इनलोगों से मिलने कोई नहीं आया। गाँव में महिलाओं और बुजुर्गों के अलावा कोई नहीं बचा है। कुछ लोग घायल हैं और कुछ गाँव छोड़कर पुलिस की डर से भाग चुके हैं। घायल रोशन कहती हैं, “हमारा जन्म तो लोगों की गलियां सुनने के लिए ही हुआ है। उन्होंने हमारी अपनी जमीन पर बाबा साहब की मूर्ति नहीं लगाने दी। हमें मारा और वो आज चौड़े होकर घूम रहे हैं। हम मार खाए, हमारा घर जला और हम अस्पताल में हैं और हमारे बच्चे दर-बदर भटक रहे हैं।”

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