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परम धर्म संसद: पढ़िए राम मंदिर, गंगा और केंद्र सरकार पर क्या बोले साधु-संत

Vartika TomarVartika Tomar   25 Nov 2018 8:13 AM GMT

परम धर्म संसद: पढ़िए राम मंदिर, गंगा और केंद्र सरकार पर क्या बोले साधु-संत

वाराणसी (उत्तर प्रदेश)। भारत के दो सबसे बड़े धार्मिक केंद्रों पर मंदिर पर मंथन हो रहा है। अयोध्या में राम मंदिर को लेकर विश्व हिंदू परिषद की धर्म सभा हो रही है तो वहां से 200 किलोमीटर दूर बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में परम धर्म संसद 1008 हो रही है। खास ये भी है कि अयोध्या में जहां मंदिर निर्माण को लेकर हुंकार है, वहीं काशी में मंदिरों के जोड़े जाने पर चिंता जताई जा रही है।


वाराणसी की तीन दिवसीय परम धर्म संसद की खास बात ये है कि इसमें देश भी सभी संसदीय क्षेत्रों के प्रतिनिधि, चारों शंकराचार्य के प्रतिनिधि, धार्मिक गुरु, संत और 36 राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हैं। परमधर्म संसद की कार्यवाही संसद की चल रही है। हिंदू धर्म, गंगा और राम मंदिर पर चर्चा जारी है।

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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के नेतृत्व में हो रही इस तीन दिवसीय परम धर्म संसद में चारों पीठों के शंकराचार्य, 534 संसदीय क्षेत्रों के प्रतिनिधि, सनातन धर्म के 281 संतों के साथ ही 184 धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधि और विशिष्ट लोग भागीदारी कर रहे हैं।


परम धर्म संसद की शुरुआत करते हुए शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि राम मंदिर को लेकर केंद्र सरकार लगातार राजनीति कर रही है, उसका मंदिर निर्माण का कोई इरादा नहीं है। इस दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि राम मंदिर के मुद्दे पर राजनैतिक दलों और न्यायायल किसी को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

सत्र के पहले चरण में क्या हुआ

परम धर्म संसद की शुरुआत सुबह 10 बजे हुए। पहला सत्र की शुरुआत काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के चलते तोड़े जाने वाले मंदिरों से हुई। काशी के साथ ही देश के दूसरे मंदिरों और सतानत धर्म को लेकर भी चर्चा हुआ। सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बनारस में देवी-देवताओं के मंदिर तोड़ने की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि, "ये विकास नहीं विनाश का तांडव है।"


उन्नाव की पूर्व सांसद अन्नू टंडन ने धर्म को अपनी राजनीति चमकाने के उद्देश्य से कुछ लोगों द्वारा प्रयोग करने का मुद्दा उठाया। कहा, धर्म में राजनीति नहीं होनी चाहिए। अनेक साधु-संत भी विमर्श में खुलकर भाग लिए। प्रथम सत्र के विमर्श में 27 सांसदों ने विमर्श में भाग लिया, जिसमें धार्मिक स्थलों को पर्यटक स्थल में तब्दील करने की निंदा करते हुए प्रस्ताव पारित किया गया। मंदिरों की रक्षा के लिए भी रक्षक दल बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया।

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि सनातनधर्म पर शक्तिशाली विधर्मियों द्वारा चौरतरा हमला तो किया ही जा रहा है, हिंदुत्व के छद्म ठेकेदार भी सनातन धर्म को नष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इस दौरान संतों ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंगा के नाम पर लोगों को धोखा देने का आरोप लगाया कि जिस व्यक्ति ने गंगा की सफाई के लिए बड़े-बड़े सपने दिखाए,उनकी सरकार के साढ़े चार साल बीत जाने के बाद भी गंगा की हालत जस की तस है।

अपने संबोधन में उन्होंने आगे कहा कि राम जन्मभूमि हिंदुओं की है। अयोध्या में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने जहां मंदिर निर्माण के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अध्यादेश लाने की मांग की वहीं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उसे औचित्यहीन बताया। उन्होंने कहा कि जब रामजन्म भूमि की 67 एकड़ जमीन पहले से केंद्र सरकार के पास है तो अध्यादेश लाकर लोगों को बरगलाने की क्या जरुरत होगी।

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