ट्रेन में भीड़ के कारण नहीं जा पाए पेशाब, रेलवे देगा हर्जाना 

ट्रेन में भीड़ के कारण नहीं जा पाए पेशाब, रेलवे देगा हर्जाना सभार इंटरनेट।

नई दिल्ली। अभी तक हम लोगों ने ये सुना और देखा है कि जनता रेलवे को जुर्माना-हर्जाना देती आई है लेकिन हाल ही में एक मामला ऐसा आया है जिसमें कोर्ट ने यात्री को भीड़ होने से पेशाब न जा पाने से हुई परेशानी के कारण रेलवे से 30 हजार रुपए का हर्जाना देने को कहा है।

ट्रेन में बिना टिकट चढ़ी भीड़ को रोक पाने में नाकाम रहने की वजह से एक यात्री देव कांत बग्गा को काफ़ी तकलीफ़ से गुज़रना पड़ा जिसकी वहज से यात्री ने रेलवे पर मुकदमा ठोक दिया। उपभोक्ता अदालत ने भारतीय रेलवे से कहा कि को देव कांत बग्गा को घंटों तक पेशाब नहीं जा सकने के कारण हुई परेशानी के लिए हर्ज़ाना दे।

भारत सरकार के क़ानून मंत्रालय में डिप्टी क़ानूनी सलाहकार देव कांत साल 2009 में अपने परिवार के साथ अमृतसर से दिल्ली जा रहे थे। इसके लिए उन्होंने रिज़र्वेशन करवाया था। वो बताते हैं, "लुधियाना के पास एक स्टेशन में बिना टिकट के बड़ी भीड़ डिब्बे में आ गई। मेरा सफ़र रात भर का था। इस दौरान बाथरूम जाना था। भीड़ इतनी थी कि बाथरूम की तरफ जाना मुश्किल हो रहा था।" वो आगे कहते हैं, "डिब्बे में नीचे, चलने के रास्ते पर सभी जगह पर लोग भरे हुए थे। उसमें कुछ औरतें थीं जो बच्चे के साथ फ़र्श पर लेटी हुई थीं। कई औरतें बाथरूम के सामने भी लेट गई थीं तो हम पेशाब तक नहीं जा सकते थे। मैं और मेरे परिवार के लोगों को कई घंटों तक पेशाब रोक कर बैठे रहना पड़ा।" देव कांत बताते हैं, "इस बारे में टीटीई को बताया, लेकिन उन्होंने कहा कि वो इस मामले में कुछ नहीं कर सकते।"

रेलवे से पैसा पाना मेरा उद्देश्य नहीं है, जिसकी ड्यूटी थी उसे कोई नोटिस नहीं भेजा गया, किसी को चेतावनी नहीं दी गई। हमारी व्यवस्था में किसी की ज़िम्मेदारी ही तय नहीं है। हमारे देश में विडंबना है कि इस छोटे से अधिकार के लिए भी हमें दर-बदर ठोकरें खानी पड़ती हैं। मैं तो क़ानूनी बैकग्राउंड से हूं तो मैंने सब्र रखा, लेकिन आम आदमी तो टूट जाता है।
देव कांत, भारत सरकार के क़ानून मंत्रालय में डिप्टी क़ानूनी सलाहकार

देवा कांत।

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2010 में देव कांत ने रेल मंत्रालय में इसकी शिकायत की थी। बाद में उन्होंने उपभोक्ता अदालत का रुख़ किया। देवा बताते हैं, "भाग्य की बात है कि मेरे पास एक कैमरा था तो मैंने कुछ तस्वीरें लीं और वीडियो बनाया।" वो कहते हैं, "मंत्रालय ने माना कि बिना उचित कागज़ के लोग डिब्बे में चढ़े थे, लेकिन उन्होंने कहा कि लोगों को अंबाला में उतार दिया गया था, लेकिन मैं जानता था कि वो लोग तो दिल्ली तक आए थे।" इस सिलसिले में कोर्ट ने रेलवे को दो साल पहले ही 30 हज़ार रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया था, लेकिन रेलवे ने इसका विरोध करते हुए अपील की थी जो खारिज कर दी गई।

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