बीमा आधारित योजनाएं नहीं, सरकारी अस्पताल हों बेहतर

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में मात्र 50 करोड़ लोगों को ही बीमा मिलेगा। 80 करोड़ लोग इससे फिर भी बाहर हो जाएंगे।

नई दिल्ली। स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रहे जन स्वास्थ्य अभियान ने राजनीतिक दलों से अपील की है कि वह बीमा आधारित स्वास्थ्य योजना के बजाय सरकारी अस्पतालों को बेहतर बनाने और अच्छे डॉक्टर और नर्स के साथ दवाइयों की उपलब्धता दूर दराज के इलाकों में करवाने की कोशिश करें।

जन स्वास्थ्य अभियान ने 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले एक पीपुल्स हेल्थ मेनिफेस्टो (जन स्वास्थ्य घोषणा पत्र) जारी करके सभी राजनैतिक पार्टियों से अपील की है।

गाँव कनेक्शन से बात करते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अभय शुक्ला ने कहा, "जो हम सुझा रहे हैं और जो सरकार कर रही है उसमें जमीन आसमान का अंतर है। हम मांग कर रहे हैं सभी के लिए अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्था। विदेशों में सभी लोगों को प्राइमरी और सेकेंडरी हेल्थ केयर सरकार की ओर से मुफ्त मिलती हैं। लेकिन प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में सभी लोग कवर ही नहीं हो रहे हैं, उसमें सिर्फ 50 करोड़ लोग ही कवर्ड हैं, जबकि बाकी के 80 करोड़ लोग कवर्ड ही नहीं हैं।"

डॉ. शुक्ला ने आगे कहा, "दूसरे जो भर्ती होंगे उन्हें ही इसका लाभ मिलेगा, जो भर्ती नहीं होंगे उनको लाभ नहीं मिलेगा। जो सबसे बड़ी कमी है, और लोगों को पता ही नहीं है।"

वहीं, रवि दुग्गल ने कहा, "प्रति व्यक्ति जो राज्य और केन्द्र को मिलाकर 1450 रुपये है, जो कम है।"

मिजोरम का उदाहरण देते हुए डॉ. रवि दुग्गल ने कहा, "उस छोटे से राज्य में प्रति व्यक्ति चार हजार रुपये खर्च होता है। वहां पूरा खर्च सरकार करती है, वहां कोई बीमा योजना नहीं है, श्रीलंका और म्यामांर जैसे राज्यों के हेल्थ इंडीकेटर्स हिंदुस्तान से बहुत अच्छे हैं।"

बीमा आधारित स्वास्थ्य सेवा के खतरे क बारे में बताते हुए डॉ. अजय शुक्ला ने कहा, "सबके लिए स्वास्थ्य का अधिकार चाहिए, सिर्फ कुछ लोगों के लिए स्वास्थ्य का कार्ड नहीं चाहिए। दूसरे अस्पताल फायदे के लिए अनावश्यक रूप से कई जांचें या इलाज किया जाता है, इससे अस्पताल को फायदा होता है। इससे अनावश्यक जांचें और अनावश्यक सर्जरी का खतरा होता है।"

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