कश्मीरी फोटोग्राफर की इस तस्वीर को चुना गया फोटो ऑफ द ईयर, क्रिकेट के ‘मक्का’ की बढ़ाएगी शान 

कश्मीरी फोटोग्राफर की इस तस्वीर को चुना गया फोटो ऑफ द ईयर, क्रिकेट के ‘मक्का’ की बढ़ाएगी शान जम्मू कश्मीर के साकिब माजिद पेशे से इंजीनियर हैं

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। विवादों में रहने वाले जम्मू-कश्मीर के इंजीनियर साकिब माजिद (25 वर्ष) ने कभी सोचा भी नहीं था कि उनकी खींची फोटो को विस्डन-एमसीसी-2016 फोटो ऑफ द ईयर चुना जाएगा। यह फोटो साल भर तक इंग्लैंड के लॉर्ड्स क्रिकेट स्टेडियम की शोभा बढ़ाएगी।

साकिब माजिद भारत के दूसरे फोटोग्राफर हैं जिनकी तस्वीर को फोटो ऑफ़ द ईयर का ख़िताब मिला है। इससे पहले यह ख़िताब अतुल कांबले नाम के फोटोग्राफर को 2013 में मिला था।

विस्डन-एमसीसी (मेलबर्न क्रिकेट क्लब) द्वारा क्रिकेट से जुड़ी तस्वीरों को हर साल अवॉर्ड दिया जाता है। इस बार यह अवॉर्ड साकिब माजिद को दिया गया है, जिसकी घोषणा संस्थान ने पांच अप्रैल को की थी। साकिब माजिद की तस्वीर क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स मैदान में लगाई गई है। यह तस्वीर एक साल तक लॉर्ड्स मैदान की शोभा बढ़ाएगी।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद श्रीनगर के सोनवार क्षेत्र के रहने वाले साकिब इंजीनियरिंग कंसल्टेंट का काम कर रहे हैं। फोटोग्राफी के बारे में साकिब बताते हैं, ‘ मुझे बचपन से ही फोटोग्राफी का शौक है, पिछले सात साल से मैं कश्मीर में फ्रीलांस फोटोग्राफर के तौर पर काम रहा हूं।’

वो आगे बताते हैं, ‘फोटोग्राफी शुरू करने के बाद दो साल तक मेरी कोई तस्वीर कहीं प्रकाशित नहीं हुई। लोग कमेंट करते थे लेकिन मैं खामोशी से अपना काम करता रहा। फिर दो साल बाद मेरी तस्वीरें राष्ट्रीय, अंतराष्ट्रीय पत्र- पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगी। कई जगह मेरी फोटो की प्रदर्शनी भी लगी।’

35 फीट ऊंचाई पर चढ़कर क्लिक की थी फोटो

साकिब बताते हैं जिस तस्वीर के लिए मुझे यह अवार्ड मिला है वो तस्वीर मैंने पिछले साल 2016 के नवम्बर महीने में क्लिक की थी। साकिब बताते हैं कि कश्मीर में क्रिकेट खेलते बच्चों की तस्वीरें कई लोगों ने खींची थीं लेकिन मैं कुछ अलग करना चाह रहा था। जब मैंने निशात बाग़ में चिनार के पेड़ों के पास बच्चों को खेलते हुए देखा तो अलग एंगल देने के लिए इस तस्वीर को ऊंचाई पर चढ़कर क्लिक किया। यह तस्वीर खूब वायरल हुई और बड़े-बड़े फोटोग्राफरों के अलावा जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने भी ट्वीट किया था। यह तस्वीर सबसे पहले ब्रिटेन के सबसे बड़े अख़बारों में से एक द गार्जियन में प्रकाशित हुई थी। उसके बाद कई अखबारों ने इसे अपने यहां प्रकाशित किया।

परिवार वालों ने बहुत सपोर्ट किया

जब मैंने फोटोग्राफी की शुरू की तो इंजीनियरिंग के बारे में सोचा नहीं था। शुरुआत में मैं फोटो क्लिक करता और अपने पास रखता। फिर सोशल नेटवर्किंग साइट पर सक्रिय होने के बाद मैंने अपनी तस्वीरें फेसबुक और दूसरी सोशल साइट्स पर पोस्ट कीं। वहां कुछ लोग तारीफ करते थे तो कुछ आलोचना भी लेकिन धीरे-धीरे लोगों को मेरा काम पसंद आने लगा। जब घरवालों को इस बारे में पता चला तो उन्होंने कहा कि शौक को शौक की तरह रखो लेकिन जिंदगी चलाने के लिए पढ़ाई कर लो तो मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। आज मैं अपने दोस्त के साथ इंजीनियरिंग कंसल्टेंट चलाता हूं और कश्मीर के एक लोकल अख़बार में फोटोग्राफर के रूप में भी काम करता हूं।

मुझे संघर्ष या विद्रोह से ज्यादा प्रकृति की तस्वीरें क्लिक करना पसंद

प्राकृतिक रूप से खूबसूरत कश्मीर आज संघर्ष और विद्रोह के कारण जाना जाता है। पत्रकारों को भी कश्मीर की याद तब आती है जब कश्मीर में कुछ गड़बड़ होता है लेकिन साकिब को संघर्ष से ज्यादा कश्मीर की नेचुरल ब्यूटी को कैमरे में कैद करना पसंद है। साकिब कहते हैं कि अख़बार के लिए काम करने के कारण मैं कभी-कभार विद्रोह की तस्वीरें क्लिक कर लेता हूं लेकिन मुझे प्रकृति की तस्वीरें खींचना ज्यादा पसंद है।

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