कैंसर को न्यौता दे रहा है प्लास्टिक प्रदूषण, बढ़ रहा है खतरा

प्लास्टिक इंडस्ट्री में काम करने वाली महिलाओं में कैंसर ज्यादा देखने को मिलता है। इन महिलाओं को ब्रेस्ट और यूट्रेस कैंसर का ज्यादा खतरा रहता है।

कैंसर को न्यौता दे रहा है प्लास्टिक प्रदूषण, बढ़ रहा है खतरा

सतीश मिश्रा/ज्ञानेश शर्मा

लखनऊ: आज देश में प्लास्टिक प्रदूषण एक विशाल समस्या बन चुका है। प्लास्टिक से बने बोतल, डिस्पोजेबल, खिलौने इत्यादि चीजें इंसानों की सेहत के साथ पर्यावरण को भी लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। बीते कई वर्षों से दुनिया के कई देशों में प्लास्टिक प्रदूषण को लेकर जागरुकता फैलाई जा रही है और प्लास्टिक से बने उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है।

बाजारों में लगातार प्लास्टिक के प्रयोग ने इंसानों के सेहत पर बुरा असर डाला है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डॉ. वीरसिंह ने एक प्रेस कांफ्रेन्स में बताया, 'प्लास्टिक का प्रयोग बच्चों की स्मरण शक्ति पर सर्वाधिक विपरीत असर डालता है। प्लास्टिक में मौजूद 'बिसफिनोल-ए' शरीर में हार्मोन बनने की प्रक्रिया और उनके स्तर को भी प्रभावित करता है। 'बिसफिनोल-ए'नामक इस जहरीले पदार्थ का गर्भवती महिलाओं पर सीधा असर पड़ता है। ''

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प्लास्टिक प्रदूषण से कैंसर जैसी लाइलाज बीमारियां पनप रही हैं। देश में कई राज्यों की सरकारों ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेश पर 50 माइक्रोन से पतली पॉलिथीन पर बैन लगा दिया है। बाजार के सभी लूज पॉलिथीन पर बैन है लेकिन इनका इस्तेमाल सभी दुकानदार बेझिझक कर रहे हैं।

लखनऊ के प्लास्टिक डीलर दानिश कहते हैं, ''बाजार में लगातार प्लास्टिक विक्रेताओं की संख्या और मांग बढ़ रही है। लोग स्टील की बॉटल की जगह प्लास्टिक कि ही बॉटल को ज्यादा खरीदते हैं। यह कम दाम में मिल जाता है।''

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दिल्ली के गंगाराम अस्पताल के कैंसर स्पेशलिस्ट डा. श्याम अग्रवाल बताते है, ''प्लास्टिक के बर्तन में खाना खाने से कैंसर होता है। हालांकि इस विषय पर अभी तक कोई रिसर्च नहीं हुआ है और ना ही कोई पुख्ता प्रमाण उपलब्ध है। लेकिन अगर हम प्लास्टिक के बर्तनों का कम उपयोग करें तो ज्यादा बेहतर होगा। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि प्लास्टिक इंडस्ट्री में काम करने वाली महिलाओं में कैंसर ज्यादा देखने को मिलता है। इन महिलाओं को ब्रेस्ट और यूट्रेस कैंसर का ज्यादा खतरा रहता है।''

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के आंकड़ों के अनुसार भारत में वर्ष 2016 तक कैंसर से पीड़ितों की संख्या 14 लाख थी। सरकार ने ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, ओरल कैंसर और फेफड़े के कैंसर पर अंकुश लगाई है और इन कैंसरों में लगभग 41 प्रतिशत का गिरावट भी आया है।

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आपको बता दें कि प्लास्टिक मूलतः सात प्रकार का होता है। कुछ प्लास्टिक नॉन- रिसाईकल भी होते हैं जिसे एक बार प्रयोग में लाने के बाद पुनः प्रयोग में नहीं लाया जा सकता है।

1. पॉलीइथिलीन टेरेफ्थेलेट (पीईटीई या पीईटी प्लास्टिक): इस प्रकार के प्लास्टिक में बोतल, मेडिसीन जार, बीन बैग, रस्सी, आदि चीजें आती हैं। रिसायकल कर के इस प्रकार के प्लास्टिकों का उपयोग कपड़े, गाड़ियों के पार्ट, जूते, कंटेनर आदि बनाने में किया जाता है।

2. हाई डेंसिटी पॉलीइथिलीन (एचडीपीई): यह एक उपयोगी प्लास्टिक का प्रकार है जिसका प्रयोग जूस के कंटेनर, शैम्पू बॉटल, डिटर्जेंट कंटेनर और खिलौनों को बनाने में होता है। इस प्रकार के प्लास्टिक की भी रिसायकलिंग आसानी से हो जाती है।

3. पोलीविनाइल क्लोराइड (पीवीसी): पाईप, बैग, जूते इत्यादि बनाने के लिए इस प्रकार के प्लास्टिक का प्रयोग किया जाता है। रिसायकल करके इससे पुनः मोबाईल पार्टस बनाए जा सकते हैं।

4. लो-डेंसिटी पॉलीइथिलीन (एलडीपीई): सैंडविच बैग, सरसो, शहद के बॉटल, लंच बॉक्स जैसी चीजें इसी प्रकार के प्लास्टिक से बनी होती हैं। एलडीपीई प्लास्टिक भी रिसायकल हो जाता है।

5. पॉलीप्रॉपिलीन (पीपी): प्लास्टिक डायपर, किचन के समान, कप, बॉटल के ढक्कन, डिस्पोजेबल ग्लास और प्लेट इसी प्रकार के प्लास्टिक से बनते हैं। इस प्लास्टिक का रिसायकल नहीं होता है।

6. पोस्टस्क्रिप्ट (पीएस): इस प्लास्टिक का भी रिसायकल नहीं होता है। इस प्लास्टिक का प्रयोग डिस्पोजेबल, कॉफी के कप, प्लास्टिक के खाने के बर्तन इत्यादि के रुप में करते हैं।

7. एनए- सीडी, डीवीडी, वॉटर गैलन, मेडिकल स्टोरेज कंटेनर जैसी चीजें इस प्रकार के प्लास्टिक से बनाई जाती हैं। यह प्लास्टिक नॉन-रिसायकल होता है।

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