स्वच्छ भारत अभियान: कहीं शादी के लिए शौचालय जरुरी तो कहीं बहनों को रक्षाबंधन पर गिफ्ट में मिलेगा शौचालय

स्वच्छ भारत अभियान: कहीं शादी के लिए शौचालय जरुरी तो कहीं बहनों को रक्षाबंधन पर गिफ्ट में मिलेगा शौचालयस्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत बने शौचालय।      फोटो : विनय गुप्ता

लखनऊ। शादी के लिए दूल्हें की नौकरी, उसका सोशल स्टेटस, घर और द्वार देखा जा सकता है। लेकिन कहीं बहुत अलग हो रहा है, लड़की के घर वाले देखते हैं कि घर में शौचालय है कि नहीं। शायद देश में लोग शौचालय के महत्व को समझ रहे हैं, इस बार रक्षाबंधन में कई जगह से ऐसी ख़बरें आईं जहां लोग अपनी बहनों और बेटियों को गिफ्ट में शौचालय देंगे।

भारत में सफाई को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2014 में एक विशाल जन आंदोलन स्वच्छ भारत अभियान शुरू हुआ। जिसका मकसद भारत के शहरी और ग्रामीण इलाकों को स्वच्छ रखने का है। भारत के ग्रामीण इलाकों को खुले में शौचमुक्त बनाने के लिए कई प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं। इन्हीं प्रोग्रामों से प्रेरित होकर लोगों ने कई तरह के अनोखे कार्य किए। कहीं-कहीं तो 'शौचालय नहीं तो विवाह नहीं' ऐसी अनोखी प्रथाएं भी शुरू हो गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "स्वच्छ भारत अभियान देश में एक जनआंदोलन की तरह जारी है। 2 अक्तूबर, 2014, जब ये अभियान शुरू किया गया था तो देश में ग्रामीण स्वच्छता का दायरा सिर्फ 39 प्रतिशत था। आज ये बढ़कर 66 प्रतिशत तक पहुंच गया है। एक बहुत ही स्वस्थ परंपरा भी शुरू हुई है। गाँवों, जिलों और राज्यों में खुद को खुले में शौच से मुक्त घोषित करने की प्रतिस्पर्धा चल रही है। अब तक देश के 2 लाख, 17 हजार गाँव खुद को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर चुके हैं।"

देश मेंं स्वच्छ भारत अभियान में हो रहा है सबसे बेहतर काम

स्वच्छ भारत मिशन के सचिव परमेश्वर अय्यर ने ट्विट किया जिसमें बताया गया कि नरेंद्र मोदी सरकार की कई योजनाओं में से सबसे ज्याद और बेहतर कामकाज स्वच्छ भारत अभियान में हो रहा है।

एक ऐसा गाँव जहां शादी के लिए जरूरी है शौचालय

एक ऐसा ही मामला छत्तीसगढ़ के देवभोग का है। देवभोग गाँव में रहने वाले पन्ड्रा माली समाज ने स्वच्छता के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण कदम उठाया है। समाज के लोगों ने निर्णय लिया है कि शादी के रिश्ते की बात होने से पूर्व अब संबंधितों को घर में बने शौचालयों का फोटो समाज के सामने दिखाना पड़ेगा। फोटो दिखाने के बाद समाज का एक प्रतिनिधिमंडल संबंधित के घर जाकर शौचालय देखेगा, इसके बाद रिश्ते की बात आगे बढ़ाई जाएगी। पन्ड्रा माली समाज के अध्यक्ष नीलकंठ बिसी बताते हैं, "समाज का हर कोई व्यक्ति इस निर्णय का स्वागत कर रहे है।" बिसी बताते हैं, "पन्ड्रा माली समाज के लोग शौचालय को लेकर जागरूक नहीं दिख रहे थे। समाज की महिलाएं बाहर शौचालय में जाने को मजबूर थी। इसी को देखते हुए समाज के बीच सभी लोगों ने निर्णय लिया कि सबसे पहले शौचालय बनाने को प्राथमिकता दिया गया, इसी को लेकर यह निर्णय लिया गया।"

रक्षा बन्धन पर बहनों को देंगे गिफ्ट में शौचालय

प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी की सबसे महत्त्वपूर्ण योजना में शामिल स्वच्छ भारत मिशन को पूरा करने के लिए अलीगढ़ सांसद सतीश गौतम ने एक कदम आगे बढ़ाया है, सांसद ने रक्षा बन्धन पर्व पर अपने संसदीय क्षेत्र की बहनों को कुछ अलग हटकर तोहफा देने की ठानी है, उन्होंने निर्णय लिया है कि वह इस पावन पर्व पर घर में शौचालय न होने के कारण खुले में शौच को जाने में मजबूर 100 बहनों को तोहफे में शौचालय का निर्माण कराएंगे।

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शौचालय बनवाने पर मिलेगा कलेक्टर के साथ कॉफी पीने का मौका

जैसलमेर जिले के बाड़मेर को खुले में शौचमुक्त बनाने की दिशा में यहां के कलेक्टर ने एक अनोखी पहल शुरू की है। बाड़मेर में अपने घरों में शौचालय बनवाने और उसका नियमित तौर पर इस्तेमाल करने वालों को कलेक्टर के साथ कॉफी पीने का मौका मिलेगा। 'कॉफी विद द कलेक्टर' स्कीम से ग्रामीणों को कलेक्टर संग कॉफी पीने और गपशप करने का मौका दिया जाएगा। इसके अलावा उन्हें जिला मुख्यालयों पर सम्मानित भी किया जाएगा।

80 साल की बहू ने 110 साल की सास के लिए बकरियां बेचकर बनवाया शौचालय

कानपुर देहात के अनंतापुर में रहने वाली 80 साल की चंदाना देवी ने अपनी सास के लिए जो किया वो बहुत खास है। चंदा के घर में शौचालय नहीं था और उनकी 110 वर्षीय सास माया देवी खेतों में शौच जाती थी, जिससे उन्हें परेशानी होती थी। सास की ये हालत चंदाना देवी से देखी नहीं गई और उन्होंने अपनी पांच बकरियां बेचकर सास के लिए शौचालय बनवा दिया। चंदाना देवी ने बताया, “मेरे घर की आर्थिक स्थिति सही नहीं है। इतना रुपया नहीं था कि शौचालय बनवा सकूं। लेकिन सास की उम्र ज्यादा है, वो अब बाहर नहीं जा सकती हैं, इसलिए मैंने अपनी बकरियों को बेचकर शौचालय बना लिया।”

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हरियाण में 110 गाँवों की मस्जिदों के इमामों ने लिया बड़ा फैसला, शौचालय नहीं तो निकाह नहीं

हरियाणा के सबसे पिछड़े जिले नूंह (मेवात) में 110 गाँवों ने मिलकर एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। इसके तहत यदि दूल्‍हे के घर शौचालय नहीं होगा तो वे उसका निकाह नहीं पढ़वाएंगे। पुन्हाना ब्‍लॉक के गाँव तिरवाड़ा में 110 गाँवों की मस्जिदों के इमामों की मौजूदगी में यह फैसला लिया गया। फैसले के दौरान इसमें एक हजार से ज्‍यादा इमाम मौजूद रहे। हरियाणा जोन के अध्‍यक्ष मौलाना याहया करीमी ने बताया, "सभी मस्जिदों के इमामों, मौलवियों, काजियों ने फैसला लिया है कि जिस दूल्हा और दुल्हन के घर में शौचालय नहीं होगा उसका निकाह नहीं पढ़वाया जाएगा।" जमीयत-ए-उलेमा हिंद के पदाधिकारी मौलाना तैयब हुसैन, मुफ़्ती सलीम, मौलाना मजीद सिंगारिया का कहना है कि अभी ये शुरुआत मेवात से की है। इसके बाद राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पंजाब में भी इस फैसले को लागू करवाने की कोशिश की जाएगी।

ग्रामीणों ने अपने पैसे से बनवाया शौचालय, लौटाई सरकारी मदद, मोदी ने की तारीफ

देश को स्वच्छ और खुले मे शौच से मुक्ति बनाने के लिए यूपी के बिजनौर गाँव के ग्रामीणों ने मिसाल पेश की है। बिजनौर के एक मुस्लिम बहुल्य मुबारकपुर कालागाँव में लोगों ने अपने पैसे इकट्ठा कर सार्वजनिक शौचालय बनवाए हैं। वहीं इस काम के लिए गाँव वालों ने 17.5 लाख रुपये की सरकारी मदद लेने से भी इंकार कर दिया। सिर्फ इतना ही नहीं गाँव वालों की यह मेहनत रंग लाई, गाँव को अब खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया गया है। संजय सिंह चौहान राज्य सलाहकार स्वच्छ भारत मिशन उत्तर प्रदेश बताते हैं, "बिजनौर जिले के एक गाँव मुबारकपुर काला में शौचालय के लिए सरकार की तरफ से भेजी गई चेक वापस आ गई है। इस गाँव के ग्रामीणों ने शौचालय बनवाने के लिए सरकारी मदद वापस कर दी और अपने पैसे से शौचालय का निर्माण करवाया है।

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ससुराल में शौचालय नहीं होने के कारण मंडप में दुल्हन ने शादी से किया इनकार

पूरे देश में कई जगह से ऐसे मामले आ रहे हैं जिसमें ससुराल में शौचालय नहीं होने के कारण शादी से इनकार कर रही हैं। ऐसा ही एक मामला लखनऊ का है जहां एक युवती (नेहा) ने शादी के ऐन मौके पर विवाह करने से इनकार कर दिया। शादी तय होते समय युवक के घर में शौचालय नहीं था। मगर युवक के परिवारवालों ने शादी से पहले शौचालय बना लेने का वादा किया था, लेकिन शादी के समय तक शौचालय नहीं बनने की जानकारी मिलने पर युवती ने शादी करने से इनकार कर दिया। नेहा ने बताया कि शादी से पहले लड़के पक्ष से कई बार शौचालय के बारे में पूछा था, लेकिन वह हर बार यह बात टाल दी जाती थी, शादी के समय जब मुझे पता चला कि शौचालय का र्माण अभी तक नहीं हुआ है तो मैंने शादी नहीं करने का फैसला किया।"

रिकॉर्ड: 71 गाँव, 100 घंटे, 10 हजार शौचालयों का निर्माण

आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के ग्रामीणों ने देश में शौचालय के निर्माण में रिकॉर्ड स्थापित किया। आंध्र प्रदेश के 71 गाँवों के ग्रामीणों ने मात्र 100 घंटों में 10,000 शौचालयों का निर्माण कर रिकॉर्ड बनाया। प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में कहा इस सराहनीय प्रयास की तारीफ की और कहा- “हाल ही मेरे सामने एक शानदार मामला आया। यह विजयानगरम जिले का है, जहां के प्रशासन ने लोगों की भागीदारी से यह बड़ा काम किया। 10 मार्च, सुबह छह बजे से 14 मार्च, सुबह 10 बजे तक प्रशासन और लोगों ने साथ मिलकर सौ घंटे में 10,000 शौचालयों का निर्माण करके 71 गाँवों को ओडीएफ किया।”

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बिहार में मंगलसूत्र गिरवी रख कर महिला ने बनवाया शौचालय

बिहार के सासाराम में एक महिला ने घर में शौचालय का निर्माण कराने के लिए अपना मंगलसूत्र गिरवी रख दिया। दरअसल फूल कुमारी नाम की यह महिला गाँव के प्राइमरी स्कूल में खाना बनाने का काम करती है। उसका पति भी खेतों में मजदूरी का काम करता है। इस वजह से वह शौचालय बनवाने के लिए पैसों का इंतजाम नहीं करा पाई और यह कदम उठाया था। रोहतास जिले के डीएम अनिमेश कुमार पराशर ने बताया, “ महिला को जिले में स्वच्छता अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया।"

स्वच्छ भारत पर बनी फिल्म 'टॉयलेट: एक प्रेम कथा'

अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म 'टॉयलेट : एक प्रेम कथा' स्वच्छ भारत मिशन से प्रेरित है। यह फिल्म हमारे देश के स्वच्छ भारत अभियान का एक हिस्सा है, जिसके जरिए घर में शौचालय बनवाने और अपने वातावरण को साफ रखने के बारे में संदेश दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘टॉयलेट एक प्रेम कथा’ फिल्म की तारीफ कर चुके हैं। मोदी ने एक ट्वीट के जरिए कहा था कि, ''टॉयलेट : एक प्रेम कथा फिल्म के द्वारा स्वच्छता का संदेश देने की बेहतर कोशिश है। स्वच्छ भारत के लिए सवा करोड़ भारतीयों को एकजुट होकर काम करना होगा।'' फिल्म 11 अगस्त को रिलीज होगी।

देश के छह राज्य खुले में शौच मुक्त हो चुके हैं घोषित

देश के छह राज्यों सिक्किम, केरल, हिमाचल प्रदेश हरियाणा और उत्तराखंड को खुले में शौच मुक्त घोषित किया जा चुका है। पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 6,40,000 गाँव हैं जिनमें से 2 लाख, 17 हजार गाँव को खुले में शौच मुक्त बनाया जा चुका है।

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देश के 1,197 शहर खुले में शौच से मुक्त

भारत सरकार ने दो अगस्त को बताया कि देश में 1,197 शहर खुले में शौच से मुक्त बन गए हैं और इनमें से 955 शहरों को इस संबंध में किसी तीसरे पक्ष ने प्रमाणित किया है। आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, ‘‘स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत 35 लाख परिवारों ने व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण कराया है और 16 लाख अन्य शौचालय निर्माणाधीन है।’’

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