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जल संकट: भारत में 8% बारिश का पानी ही बचाया जाता है, पीएम ने दिए तीन सुझाव

जल संकट: भारत में 8% बारिश का पानी ही बचाया जाता है, पीएम ने दिए तीन सुझाव

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (30 जून) को 'मन की बात' कार्यक्रम में देश के जल संकट को लेकर चिंता जाहिर की और इस दिशा में काम करने के लिए तीन सुझाव भी दिए। बता दें, लोकसभा चुनाव के बाद पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल का यह पहला 'मन की बात' कार्यक्रम था।

पीएम ने जल संकट को लेकर कहा, ''पानी की कमी से देश के कई हिस्‍से हर साल प्रभावित होते हैं। साल भर में बारिश से जो पानी मिलता है उसका सिर्फ 8 प्रतिशत हमारे देश में बचाया जाता है। अब समय आ गया है इस समस्‍या का समाधान निकाला जाए। मुझे विश्‍वास हम दूसरी और समस्‍याओं की तरह ही जनभागीदारी से जन शक्‍ति से 130 करोड़ देशवासियों के सामर्थ्‍य, सहयोग और संकल्‍प से इस संकट का भी समाधान कर लेंगे।

पीएम ने कहा, ''जल की महत्ता को सर्वोपरि रखते हुए देश में नया जल शक्ति मंत्रालय बनाया गया है। इससे पानी से संबंधित सभी विषयों पर तेज़ी से फैसले लिए जा सकेंगे। पूरे देश में जल संकट से निपटने का कोई एक फॉर्मूला नहीं हो सकता। इसके लिए देश के अलग-अलग हिस्‍सों में अलग-अलग तरीके से प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन सबका लक्ष्‍य है एक ही है वो है पानी बचाना।''


पीएम ने जल संरक्षण के लिए दिए तीन सुझाव

1- जैसे देशवासियों ने स्वच्छता को एक जन आंदोलन का रूप दे दिया। आइए, वैसे ही जल संरक्षण के लिए एक जन आंदोलन की शुरुआत करें।

2- देश में पानी के संरक्षण के लिए कई पारंपरिक तौर-तरीके सदियों से उपयोग में लाए जा रहे हैं। जल संरक्षण के उन पारंपरिक तरीकों को लोग एक दूसरे से साझा करें।

3- जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तियों का, स्वयं सेवी संस्थाओं का, और इस क्षेत्र में काम करने वाले हर किसी का, उनकी जो जानकारी हो, उसे आप #JanShakti4JalShakti के साथ शेयर करें ताकि उनका एक डाटाबेस बनाया जा सके।

हाल ही में गांव कनेक्शन के सर्वे में भी देश में तेजी से उभर से जल संकट की तस्‍वीर भी देखने को मिली है। 19 राज्यों में 18,000 ग्रामीणों के बीच किए गए सबसे बड़े ग्रामीण सर्वे में जो आंकड़े सामने आए वो पानी को लेकर ग्रामीणों के दर्द की कहानी कहते हैं। सर्वे में 12.5 फीसदी लोगों ने माना कि उन्‍हें पानी के लिए घर से लगभग आधा किमी दूर तक जाना होता है। वहीं, 22.8 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्‍हें पानी के लिए घर से लगभग 200 मीटर दूर जाना होता है।


मध्य प्रदेश में विदिशा जिले के चकरघुनाथपुर गाँव में रहने वाले मोहित की कहानी भारत में बढ़ रहे जल संकट की कहानी हो सकती है। कई पीले बड़े-बड़े डिब्बों के बीच बैठे दस साल का मोहित बताता है, "हमें हर रोज एक किमी दूर से पानी लाना पड़ता है, जिस वजह से रोज स्कूल जाने में देर हो जाती है। यह काम दिन में दो बार करना पड़ता है।"

मोहित कक्षा सात में पढ़ाई करता है, लेकिन उसे पढ़ाई से ज्यादा पानी की ढुलाई पर मेहनत करनी पड़ती है। उसकी ही तरह उसके गाँव के दूसरे बच्चे भी कभी समय से स्कूल नहीं जा पाते, क्योंकि उन्हें भी पानी भर के घर में रखना पड़ता है। यह कहानी सिर्फ मोहित या उसके गाँव के दूसरे लड़कों की ही नहीं है, भारत के 60 करोड़ लोग इस समय इतिहास के सबसे बुरे जल संकट से जूझ रहे हैं।

वर्ष 2018 में आई नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भारत इतिहास में जल संकट से सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। जबकि हर साल दो लाख लोग साफ पीने का पानी न मिलने से अपनी जान गंवा देते हैं।

केन्द्र सरकार के नेशनल रूरल ड्रिंकिंग वाटर प्रोग्राम के तहत हर ग्रामीण को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाना है। इस योजना में साल 2014-15 में जहां 15,000 करोड़ रुपये जारी होते थे, वहीं आज 700 करोड़ रुपये ही जारी हो रहे हैं।


नीति आयोग की वर्ष 2018 में आई रिपोर्ट कहती है कि वर्ष 2020 तक दिल्ली और बंगलुरू जैसे भारत के 21 बड़े शहरों से भूजल गायब हो जाएगा। इससे करीब 10 करोड़ लोग प्रभावित होंगे। अगर पेयजल की मांग ऐसी ही रही तो वर्ष 2030 तक स्थिति और विकराल हो जाएगी।

वाटर ऐड इंडिया में प्रोग्राम एंड पॉलिसी के निदेशक अविनाश कुमार बताते हैं, "जहां तक लोगों के घरों तक पानी नहीं पहुंचने का सवाल है, तो भारत सरकार की बहुत ही महात्वकांक्षी योजना है 'नेशनल रुरल ड्रिंकिंग वाटर प्रोग्राम (राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना)', जिसका लक्ष्य था कि 2020 तक देश के 70 प्रतिशत ग्रामीण घरों तक पाइप वाटर सप्लाई पहुंचाना। लेकिन 2017 तक मात्र 17 प्रतिशत घरों में ही पाइप्ड ड्रिंकिग वाटर सप्लाई (नल से पेयजल की सप्लाई) हो पाई।"

एक तो पानी दूर से लाना, दूसरे उसकी गुणवत्ता सही न होने से लाखों परेशान होते हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 70 प्रतिशत पानी दूषित है और पेयजल स्वच्छता गुणांक की 122 देशों की सूची में भारत का स्थान 120वां है।


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