मंदसौर में किसानों से मिलने जा रहे योगेंद्र यादव व मेधा पाटकर को पुलिस ने रोका, तनाव

Mithilesh DubeyMithilesh Dubey   11 Jun 2017 9:47 PM GMT

मंदसौर में किसानों से मिलने जा रहे योगेंद्र यादव व मेधा पाटकर को पुलिस ने रोका, तनावमेधा पाटकर।

मंदसौर। किसान आंदोलन में मृतक किसानों के परिजनों से मिलने जा रहे मेधा पाटकर सहित उनके दल के लोगों को माननखेड़ा जावरा-मंदसौर फोरलेन पर रोक दिया गया है। पुलिस को इनके आने की सूचना पहले ही थी। प्रशासन और पुलिस ने दल को आगे जाने की अनुमति नहीं दी हैं। सभी प्रतिनिधि पुलिस और प्रशासन के अफसरों से आगे जाने के लिए चर्चा कर रहे हैं। फिलहाल प्रशासन किसी तरह की अनुमति नहीं दे रहा हैं। सभी को रोक दिया गया है टोल नाका को बंद कर दिया गया है। निजी एवं अन्य वाहनों की आवाजाही भी बंद कर दी गयी है।

आज सुबह मेधा पाटकर सहित जय किसान आंदोलन के प्रतिनिधि योगेन्द्र यादव, आविक शाह, बंधुआ मुक्ति मोर्चा के प्रतिनिधि स्वामी अग्निवेश, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के बीएम सिंह, पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम और उनके साथ पश्चिम बंगाल, ओडिसा, छग, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब व उत्तरप्रदेश के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि रविवार को रतलाम आए।

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मंदसौर में किसानों से मिलने जा रहे स्वामी अग्निवेश व अन्य संगठन नेता।

यहाँ से वे मंदसौर जा रहे थे। प्रतिनिधियों ने इसके लिए रतलाम प्रशासन से अनुमति मांगी है, लेकिन रतलाम प्रशासन ने अपने क्षेत्र की सीमा में किसी तरह की रैली और सामूहिक तौर पर मार्च से इनकार कर दिया। मंदसौर प्रशासन ने भी स्पष्ट कर दिया हैं कि किसी भी बाहरी समूह को धारा 144 का उल्लंघन नहीं करने दिया जाएगा। संगठनों के प्रतिनिधियों को भी हिंसा प्रभावित इलाकों में जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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इससे पहले आज सुबह 10 बजे नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटकर सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि रतलाम आए। स्थानीय प्रेस क्लब भवन में उन्होंने पत्रकार वार्ता कर प्रदेश की भाजपा सरकार को किसान विरोधी बताते हुए तत्काल बर्खास्त करने की मांग की। साथ ही 6 किसानों की मौत पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से त्यागपत्र देने की मांग भी रखीं। संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि मंदसौर में हिंसा के दौरान पुलिस और प्रशासन ने मनमानी करते हुए किसानों पर गोलियां चलाई हैं। इस घटना के हर दोषी व्यक्ति को कड़ी सजा मिलनी चाहिए, सरकार नौटंकी कर मामला दबा रही हैं।

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किसान आंदोलन में मृतक किसानों के परिजनों से मिलने के लिए निकले विभिन्न संगठनों के डेढ़ दर्जन से ज्यादा प्रतिनिधियों को रविवार की शाम 4.20 बजे रतलाम-मंदसौर फोरलेन पर जावरा के पास माननखेड़ा में हिरासत में ले लिया हैं। धारा 144 का उल्लंघन कर ये सभी प्रतिनिधि मंदसौर की ओर जाने की तैयारी कर रहे थे।

टोल पर धरना प्रदर्शन और विरोध के बाद पुलिस ने सभी को वापस लाटने के लिए कहा और नहीं मानने पर हिरासत में ले लिया हैं। इनमें मेधा पाटकर सहित स्वामी अग्निवेश, योगेन्द्र यादव, जेएनयू के छात्रसंघ अध्यक्ष मोहित पांडे व अन्य शामिल हैं। सभी संगठन प्रतिनिधियों को जावरा से वापस रतलाम की ओर लौटने पर ही रिहा किया जाएगा।

नेताओं ने बताया मौलिक अधिकारों का हनन

स्वामी अग्निवेश ने टोल नाका पर पुलिस का विरोध करते हुए कहा कि यह तो मौलिक अधिकारों का हनन है। किसी को इस तरह कहीं भी जाने से रोका नहीं जा सकता। इस बीच योगेन्द्र यादव ने पुलिस व प्रशासन से 4 लोगों को मंदसौर जाने की इजाजत देने की मांग की। इसे अपर कलेक्टर रानी बाटड़ ने ठुकरा दिया और साफ कर दिया कि फिलहाल हम किसी को भी जाने नहीं दे सकते।

इसके बाद पुलिस ने अपरान्ह 4.20 बजे सभी को 5 मिनट का समय देकर टोल नाका से हटने के लिए कहा, लेकिन प्रतिनिधियों के नहीं हटने पर औपचारिक तौर पर पुलिस ने सभी को हिरासत में लिया और टोल नाका से जावरा की ओर भेज दिया। धारा 151 के तहत कुछ शर्तो की पूर्ति के बाद सभी प्रतिनिधियों की रिहाई भी घोषित कर दी गई। सभी प्रतिनिधि मंदसौर नहीं जा सकें।

किसानों का आंदोलन, शिवराज के उपवास के बाद सिंधिया का सत्याग्रह

भोपाल। मध्यप्रदेश को किसी की नजर लग गई है। किसान सड़क पर हैं, राज्य सुलग रहे हैं, जिसे शांत कराने के लिए शिवराज सिंह उपवास कर चुके हैं, किसान भी आरपार की लड़ाई के मूड में है इसी बीच सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किसानों के समर्थन में सत्याग्रह का ऐलान किया है। सिंधिया 12 जून को इंदौर तो 13 जून को मंदसौर में घायल किसानों और मारे गए किसानों के परिजनों से मिलेंगे उसके बाद 14 जून से भोपाल में 72 घंटे का सत्याग्रह करेंगे।

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