यूपी में नए आलू का भी नहीं मिल रहा रेट, कन्नौज में किसान ने की आत्महत्या

यूपी में नए आलू का भी नहीं मिल रहा रेट, कन्नौज में किसान ने की आत्महत्याआगरा में कोल्ड स्टोर वाले किसानों के आलू को कोल्ड स्टोर से निकाल कर बाहर फेंक रहे हैं।

यूपी के आलू किसानों का संकट इतना गहरा चुका है कि अब उन्हें आत्महत्या का रास्ता चुनना पड़ रहा है। पुराना आलू जहां कोल्ट स्टोरेज के बाहर सड़कों पर फेंका जा रहा है, वहीं नए आलू के भी रेट नहीं मिल रहे हैं। कन्नौज में किसान ने कीटनाशक पीकर जान दे दी है।

किसानों की मौत की दो घटनाओं में से पहली घटना उत्तर प्रदेश की आलू बेल्ट में शामिल कन्नौज से करीब 16 किलोमीटर दूर तिर्वा तहसील के टूसावरी गांव की है। यहां मोहित (26) ने 21 दिसंबर को आत्महत्या कर ली। मोहित के चाचा शिवओम ने बताया, “मोहित 20 दिसंबर को आलू की बोरियां लेकर तिर्वा मंडी गया था। मंडी में उस दिन आलू नहीं बिका, वहां रेट काफी कम लगभग प्रति बोरी 235-250 रुपये था। अगले दिन मोहित ने खेतों में पानी लगाते समय कीटनाशक पी लिया। हालत बिगड़ने पर उसे मेडिकल कॉलेज ले जाया गया जहां उसे बचाया नहीं जा सका।”

मोहित आलू बेचने तिर्वा मंडी गया था, वहां आलू नहीं बिका, क्योंकि रेट बहुत कम था, अगले दिन उसने खेत में पानी लगाते समय कीटनाशक पी लिया।
शिवओम, मृतक किसान मोहित के चाचा

मृतक किसान के परिजनों के साथ एसडीएम और दूसरे अधिकारी

शिवओम के मुताबिक, मोहित के पिता हरिओम ने पिछले साल भी आलू की फसल की थी, तब उन्होंने लगान पर भी खेती की थी। इसके लिए आलू का बीज 500 रूपये प्रति पैकेट खरीदा था, लेकिन बाजार में आलू इतनी कम कीमत पर बिका कि कोल्ड स्टोरेज का किराया भी नहीं निकल सका। पिछले दो साल में परिवार को 2-3 लाख का घाटा हो गया। मोहित पर पूरे परिवार की उम्मीदों का बोझ था। तीन बहनों के बीच वह अकेला भाई था। इनमें एक ही का विवाह हुआ था बाकी दो पढ़ रही थीं। खुद मोहित दो छोटे बच्चों का पिता था।

दूसरी घटना में कन्नौज के ही ठठिया थाना क्षेत्र के भटौरा के रहने वाले किसान रामसिंह (49) ने भी 23 दिसंबर को जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जान दे दी। परिजनों के अनुसार, रामसिंह आलू के सही दाम न मिलने से परेशान थे। उन पर एक लाख का कर्ज भी था। रामसिंह की बेटी आरती की शादी तय हो चुकी थी उसके खर्चे को लेकर वह काफी चिंतित थे।

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कानपुर मंडी समिति के आढ़ती श्याम सिंह यादव का कहना है, आलू 225-235 रूपये प्रति मन (40 किलो) चल रहा है। लाल आलू की कीमत भी 260 ही है। किसानों को कोई फायदा नहीं हो रहा है। फुटकर विक्रेता रितिक बताते हैं, बाजार में भी आलू 10 रूपये का सवा किलो बिक रहा है। हमें एक बोरी 250-300 रूपये की पड़ती है।

एसडीएम करेंगे बेटी की शादी में मदद : तिर्वा के एसडीएम अरूण कुमार सिंह ने गांव कनेक्शन को बताया, हमने दोनों मामले की जांच की है। रामसिंह की बेटी की शादी जहां तय है वहां बातचीत करेंगे और व्यक्तिगत स्तर पर मदद करेंगे। रामसिंह की पत्नी को विधवा पेंशन का भी लाभ दिलाया जाएगा। वहीं मोहित के परिजनों ने उसका पोस्टमॉर्टम नहीं कराया था इससे वास्तविक कारणों का पता नहीं चला। राष्ट्रीय पारिवारिक योजना के तहत कागज तैयार कराकर उसके परिवार को मदद दी जाएगी।

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यूपी में आलू किसानों का आलू एक रुपए किलो के भाव से भी नहीं बिक रहा है इस वजह से वे कोल्ड स्टोर से आलू नहीं निकाल रहे हैं। कोल्ड स्टोर वाले किसानों के आलू को कोल्ड स्टोर से निकाल कर बाहर फेंक रहे हैं। गौरतलब है कि, देश में आलू का सबसे अधिक उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है, उसके बाद पश्चिम बंगाल का नंबर है। पिछले कई वर्षों से पश्चिम बंगाल के किसान, खासकर बर्दवान जिले के आलू के किसान घाटे की वजह से आत्महत्या कर रहे हैं। वहां इस साल अप्रैल तक 10 किसान आत्महत्या कर चुके थे।

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