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अजमेर : कोरोना वायरस से उबर रहा पॉल्ट्री फार्म बर्ड फ़्लू की दस्तक से लड़खड़ाया

कोरोना वायरस की वजह से भारी नुकसान में चल रहे कारोबारी पिछले संकट से उबरने की कोशिश कर ही रहे थे कि देश के 11 राज्यों में बर्ड फ़्लू के संक्रमण की पुष्टि होने के बाद उनका कारोबार एक बार फिर डांवाडोल स्थिति में पहुंच गया है।

Avdhesh PareekAvdhesh Pareek   22 Jan 2021 6:38 AM GMT

अजमेर (राजस्थान)। 35 साल के अंडा कारोबारी नदीम पिछले 12 साल से अजमेर में पॉल्ट्री फार्म चलाते हैं। कोरोना वायरस Covid 19 की वजह से हुए देशव्यापी लॉकडाउन से पहले उनके फार्म में 15,000 मुर्गियां थीं। नदीम, औसतन हर महीने भर 30 से 40 हज़ार रुपए तक कमा लेते थे। महामारी और लॉकडाउन की वजह से नदीम कारोबार करीब-करीब ठप पड़ गया। लॉकडाउन में ढील मिलने के साथ ही नदीम ने 7,000 मुर्गियों के साथ एक बार फिर अपना कारोबार शुरु किया। कारोबार ने रफ़्तार पकड़ी ही थी कि बर्ड फ़्लू ने एक बार फिर उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

नदीम ने बताया, "दिसंबर महीने से हमारा सीज़न शुरू होता है। महामारी के बाद टूट चुके हमारे कारोबार ने थोड़ी रफ्तार पकड़ी थी और अभी हम पुराने नुकसान की भरपाई ही कर रहे थे कि इतने में बर्ड फ़्लू की ख़बर आ गई। हमारा कारोबार फिर से गड़बड़ा गया और अंडों की बिक्री महज 25% रह गई।"

पॉल्ट्री उद्योग से जुड़े नदीम जैसे सैकड़ों कारोबारियों के सामने एक साल में दूसरी बार संकट आया है। कोरोना वायरस कोविड-19 की वजह से भारी नुकसान में चल रहे कारोबारी पिछले संकट से उबरने की कोशिश कर ही रहे थे कि देश के 11 राज्यों में बर्ड फ़्लू के संक्रमण की पुष्टि होने के बाद उनका कारोबार एक बार फिर डांवाडोल स्थिति में पहुंच गया है। इसका सीधा असर राजस्थान के अजमेर में इस कारोबार से जुड़े लोगों की रोज़ी-रोटी पर पड़ रहा है। अजमेर पॉल्ट्री उद्योग का एक बड़ा हब है। यहां एक हज़ार से ज़्यादा छोटे-बड़े पॉल्ट्री फार्म हैं जिनसे लगभग 10 हज़ार लोगों की रोज़ी-रोटी जुड़ी है। पूरे राज्य में लगभग 2.500 पॉल्ट्री फार्म हैं जिन पर लाखों लोगों की आजीविका निर्भर है। राजस्थान के 17 जिले इस वक्त बर्ड फ़्लू की चपेट में हैं। बीते शनिवार को यहां हुई 215 पक्षियों की मौत के साथ 25 दिसंबर से अब तक राज्य में 5,130 पक्षियों की मौत हो चुकी है जिसमें कौए, मोर, कबूतर और अन्य पक्षी शामिल हैं।


अजमेर जिले के फाय सागर रोड़ पर 30 हज़ार मुर्गियों का पॉल्ट्री फार्म चलाने वाले लाल मूलानी बताते हैं, "जब भी बर्ड फ़्लू की ख़बरें तेज़ होती है सबसे पहले इसका असर हमारे कारोबार पर पड़ता है, जैसे ही लोगों को पता चलता है कि बर्ड फ़्लू फैल रहा है, डिमांड और सप्लाई की चेन बिगड़ जाती है और मंडियों में अंडे की कीमतें टूटने लगती हैं।"

वह आगे बताते हैं कि बीते 10-15 दिनों पहले जहां थोक भाव अंडे की कीमत 6 रुपए तक पहुंच गई थी वह अब 4.50 रुपए से 3.80 रूपए के बीच चल रही है। ब्रॉयलर चिकन की कीमत भी 70-80 रुपए तक गिर चुकी है। उन्होंने कहा कि कोरोना से रिकवरी हो ही रही थी कि एक बार फिर कारोबार 25% तक घट गया है।

7,000 मुर्गियों का एक छोटा पॉल्ट्री फार्म चलाने वाले रिज़वान ख़ान पिछले 15 साल से इस कारोबार में हैं। उनके उत्पादन की खपत अजमेर में ही हो जाती है। रिज़वान बताते हैं कि बीते 10 दिन से कोई भी लोकल वेंडर माल लेने नहीं आया है। इसका दोष वह मीडिया को देते हैं, "हमारी हालत हर बार यह अफवाह खराब करती है, बर्ड फ़्लू नाम सुनते ही लोग सबसे पहले अंडा और चिकन खाना छोड़ते हैं जबकि इतने साल में वैज्ञानिकों को मुर्गी में कुछ नहीं मिला है।"

राजस्थान में पॉल्ट्री फार्म का हब है अजमेर

देश में हरियाणा की बरवाला मंडी के बाद अजमेर की अंडा मंडी प्रतिदिन सबसे अधिक, 40 से 50 लाख अंडों की सप्लाई के साथ 600-700 करोड़ रुपए का सालाना कारोबार करती है। राजस्थान के पॉल्ट्री प्रोडक्ट्स की जयपुर, दिल्ली, मध्यप्रदेश से लेकर उत्तर प्रदेश और पंजाब के कई शहरों में सप्लाई होती है। अजमेर के रसूलपुरा, माकड़वाली, गेगल, मगवाना, ऊंटड़ा, कायमुपरा इलाकों में कई पॉल्ट्री फार्म हैं। कारोबारी बताते हैं कि उन्हें बीते हफ्ते भर में 50-60 करोड़ रुपए के कारोबार का नुकसान झेलना पड़ा है।

पॉल्ट्री फार्म के लिए बर्ड फ़्लू का प्रसार क्यों है सबसे बुरी खबर

अजमेर के खरेखड़ी रोड़ पर 36,000 मुर्गियों का पॉल्ट्री फार्म चलाने वाले मक्कू भाई इसमें एक अन्य पहलू जोड़ते हुए बताते हैं कि पॉल्ट्री फार्म शहर के बाहरी इलाकों में बहुत बड़ी जगह में बने होते हैं, अलग-अलग शेड में मुर्गियों को रखा जाता है, जो आपस में जुड़े होते हैं। ऐसे में अगर बर्ड फ़्लू का संक्रमण फार्म के किसी एक शेड में भी आता है तो उस शेड की सभी मुर्गियों के संक्रमित होने का ख़तरा बढ़ जाएगा और पूरे पॉल्ट्री फार्म की सुरक्षा के लिए उस पूरे शेड की मुर्गियों को खत्म करना पड़ता है।

वह बताते हैं, "एक शेड में सिर्फ एक लाइन में ही करीब 700-800 मुर्गियां रहती है अब आप अंदाजा लगा लीजिए कि हमारे लिए बर्ड फ़्लू का प्रसार किस हद तक खतरनाक है।"


अजमेर के रसूलपुरा इलाके में 50 से अधिक पॉल्ट्री फार्म हैं। यहां 30 साल से इस कारोबार से जुड़े तस्लीम खान बताते हैं कि पिछले साल भी कोरोना महामारी के शुरूआती दिनों में लोगों में जानकारी का अभाव था जिसके कारण हमने करीब 40 फीसदी तक मुर्गियां खत्म कर दी तो सैकड़ों मुर्गियां मुफ्त में लोगों को बांट दी थी।

"अब जब सर्दियों के 2 महीने हमारे कारोबार का सीजन है तो यह बर्ड फ़्लू की अफ़वाहों ने ज़ोर पकड़ लिया है। मुर्गियां कोरोना और बर्ड फ़्लू दोनों से सुरक्षित है लेकिन हमारी गाड़ी पिछले एक साल से पटरी पर नहीं लौट पाई है," तस्लीम ख़ान ने बताया।

अफवाह से हर किसी का नुकसान चाहे वह सिंधू बॉर्डर पर बैठा किसान हो या पॉल्ट्री फार्म का कारोबारी

बर्ड फ़्लू के बढ़ते मामलों पर अजमेर के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. आलोक खरे एक दिलचस्प बात बताते हैं। वह कहते हैं, "हर 2-3 सालों में यह बर्ड फ़्लू का मामला ज़ोर पकड़ता है लेकिन अभी तक जो बर्ड फ़्लू का वायरस मिला है वह H5N8 कैटेगरी का है जिसकी पुष्टि अभी तक सिर्फ कौवों में हुई है।"

वह कहते हैं कि हर बार बर्ड फ़्लू की अफवाहें ज़ोर पकड़ती है, अब अफ़वाह (चाहे किसी की भी फैलाई हो) से नुकसान जितना दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे किसानों का है उतना ही अजमेर के इन पॉल्ट्री कारोबारियों का। आगे वह जोड़ते हैं कि हमारे देश में आज भी लोगों तक साइंटिफिक टेंपरामेंट से पहले अफवाहें पहुँचती हैं।

आपको बता दें कि राजस्थान सरकार ने पॉल्ट्री प्रोडक्ट की आवाजाही पर फिलहाल कोई रोक नहीं लगाई है।

क्या बर्ड फ़्लू में अंडा-चिकन खाना छोड़ देना चाहिए ?

सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक, एवियन फ़्लू वायरस सामान्य तौर पर इंसानों को संक्रमित नहीं करते हैं। यह संक्रमण दुर्लभ है, वहीं मायो क्लिनिक के अनुसार, 2015 के बाद से केवल छिटपुट मामले सामने आए हैं। हालांकि, अगर इंसानों में इसका कोई मामला सामने भी आता है तो यह हल्का होता है।

हालांकि 2003 और 2019 के बीच, WHO ने दुनिया भर में H5N1 के कुल 861 इंसानी संक्रमण की पुष्टि की, जिनमें से 455 मौतें दर्ज हुई लेकिन भारत से एक भी मामला नहीं पाया गया।

वहीं WHO मुताबिक, 70 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान पर पकाए गए पदार्थ पूरी तरह सुरक्षित है। अभी तक ऐसा कोई भी मामला सामने नहीं आया है जहां लोग पॉल्ट्री पोडक्ट्स को ठीक से पकाने के बाद सेवन करने से संक्रमण हुआ हो।

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