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लॉकडाउन से बर्बाद हुए पोल्ट्री किसान, अब मुर्गियों के दाने के लिए भी लेना पड़ रहा है कर्ज

ललितपुर(उत्तर प्रदेश)। कोरोना वायरस और लॉकडाउन की वजह से सिर्फ ब्रॉयलर पोल्ट्री को ही नहीं नुकसान हुआ, लेयर पोल्ट्री को भी काफी नुकसान उठाना पड़ा। स्थिति ऐसी हो गई है कि मुर्गियों को खिलाने के लिए कर्ज तक लेना पड़ा रहा है।

उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के तेरा गाँव में दस हजार लेयर मुर्गियों का फार्म चलाने वाले बलराम सिंह अनाज बेचकर और कर्ज लेकर मुर्गियों को किसी तरह से पाल रहे हैं।

सोशल मीडिया पर फैली कोरोना की अफवाह और लॉकडाउन से उनको अंडों का व्यापार घाटे का सौदा साबित हुआ। वो कहते हैं, "लोगों ने अंडा ही खाना बंद कर दिया, उस वजह से रेट डाउन हुए हैं। तब से न तो हम बैंक की किस्त जमा कर पाएं और ना ही कोई फायदा हुआ है। आज की तारीख से पर बर्ड एक रुपए का घाटा ही हो रहा है। दाने खर्च हर दिन बढ़ रहा है।"


बलराम सिंह लेयर पोल्ट्री फार्म किसी तरह चला रहे हैं, वो कहते हैं, "मुर्गियों को तो खाने को दाना चाहिए नहीं तो वो भूख से मर जाएंगी, उन्हें जिंदा रखना जरूरी था। खेती का अनाज बेचकर कर्ज पर और उधार लेकर उनके खाने की व्यवस्था की। अंडे के उत्पाद का खर्चा साढे़ तीन रुपए आता है। इन महीनों में अंडा 1.70 रुपए से लेकर 2.50 रुपए तक बिका। मार्च अप्रैल के महीने में प्रतिदिन दस हजार का नुकसान हुआ।"

बलराम सिंह ने लाॅकडाउन की वजह से मजदूरों को रोजगार से नहीं हटाया दस वर्कर काम कर रहे हैं। बलराम सिंह आगे बताते हैं, "6 हजार अंडे का उत्पादन रोज कर रहे हैं, उसमें 25 से अधिक ठेला वाले इस रोजगार से जुड़े थ। बीमारी आने से उन सबका जीवन प्रभावित हुआ है और वो आज आर्थिक स्थिति से बहुत ज्यादा परेशान हैं।"

लाॅकडाउन से बिक्री बंद हो गयी माल नहीं बिक पाया बहुत सारे अंडे खराब होने का जिक्र करते हुए बलराम सिंह कहते हैं, "करीब सत्तर हजार अंडे यहां से 120 किलोमीटर दूर झाँसी कोल्ड स्टोर में रखने पड़े, जिसमें आने जाने का भाड़ा और कोल्ड स्टोर का भाड़ा अलग से देना पड़ रहा है। तब जाकर कुछ अंडे बचा पाये।"

बलराम सिंह बताते हैं, "भारत सरकार के पशुपालन मंत्री गिरीराज सिंह ने स्टेटमेंट दिया था कि अंडा की वजह से कुछ नहीं हैं, सब लोग खाये किसी प्रकार का भ्रम ना फैलाएं। लेकिन अफवाह की वजह से लोगों ने अंडा खाना बंद कर दिया। हम जैसे लेयर पोल्ट्री फार्म वाले ज्यादा नुकसान (लॉस) में चले गए।"

अंडे की बिक्री शाम सात से 9-10 बजे तक होती हैं जो ठेले वाले हैं वो शाम को लगाते हैं खाने वाले भी शाम को खाते हैं, लाॅकडाउन की वजह से प्रशासन द्वारा सुविधा नहीं हैं कि वो शाम को अंडे का ठेला लगा सकें।

बलराम सिंह कहते हैं, "सत्तर लाख के इस प्रोजेक्ट में सत्तर हजार प्रतिमाह बैंक को किस्त देनी पड़ती हैं, जब बिक्री नहीं होगी तो हम किस्त कहां से बैंक में जमा कर दें। मुर्गियों को खाना कैसे खिलाये, पहले उनको जीवित रखना जरूरी हैं फिर बैक देखेंगे।"

तीन महीने से ईएमआई लॉकडाउन की वजह से नहीं भर पाये उनके आगे बढ़ाने की बात करते हुऐ बलराम सिंह बताते हैं, "किस्त तो देना-देना है्र सरकार ने भले ही 20 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा की हैं। हम लोगों की तीन माह की किस्त आगे ना बल्कि छूट दे और निश्चित नीति बनाए कि अंडा इससे कम में ना बिके।"

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