शाहजहांपुर में प्रधानमंत्री मोदी का वादा, जल्द होगा गन्ना किसानों के बकाया का भुगतान

शाहजहांपुर में प्रधानमंत्री मोदी का वादा, जल्द होगा गन्ना किसानों के बकाया का भुगतान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 जुलाई (शनिवार) को शाहजहांपुर में किसान महारैली में 1.25 लाख किसानों को संबोधित कर रहे हैं। मोदी शाहजहांपुर के रोजा क्षेत्र के रेलवे मैदान में इस महारैली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पहुंचे हैं।

किसानों से क्या बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

- मैं किसानों से किया वादा निभाने आया हूं।

- जब गन्ने की ज्यादा पैदावार होती तो किसानों का पैसा फंस जाता।

- 5 करोड़ गन्ना किसानों के हित में केंद्र सरकार ने कई फैसले लिए हैं।

- पिछली सरकार की नीयत साफ नहीं थी, इथेनॉल उत्पादन को पर ध्यान नहीं दिया गया। सिंचाई की कई परियोजनाओं को सालों तक लटकाया गया।

- इस साल के अंत तक 160 करोड़ लीटर इथेनॉल बनाया जाएगा।

- चार साल पहले तक सिर्फ एक साल में 40 करोड़ लीटर इथेनॉल बनाया जाता था।



- 14 फसलों की कीमत 200 रुपए से लेकर 1800 रुपए तक बढ़ाई गई।

- किसान में ताकत होती है कि उन्हें पानी मिल जाए तो वे सोना उगा सकते हैं।

- सिर्फ फसलों की कीमत ही नहीं बढ़ी, फसलों की खरीदारी भी बढ़ाई गई।

- देश के हर किसान के पसीने का, श्रम का सम्मान हो, यही केंद्र की सरकार, उत्तर प्रदेश की सरकार की प्राथमिकता है। यही कारण है कि देश के गन्ना किसान परिवारों के हित में हाल में अनेक फैसले लिए गए हैं

- सरकार ने गन्ना की बिक्री का लाभकारी 275 रुपये क्विंटल कर दिया गया है, चीनी के उत्पादन में वृद्धि को देखते हुए ये मूल्य 10% रिकवरी पर तय किया गया है।

- आज जो किसानों के लिए घड़ियाली आंसू बहा रहें है उनके पास भी ये काम करने का मौका था लेकिन उनके पास किसानों के लिए कार्य करने की फुर्सत नहीं थी।



- हमारी सरकार ने यह फैसला किया है कि देश के गन्ना किसानों को गन्ने पर लागत मूल्य के ऊपर लगभग 80% सीधा लाभ मिलेगा। धान, मक्का, दाल और तेल वाली 14 फसलों के सरकारी मूल्य में 200 रुपये से 1800 रुपये कि बढ़ोतरी देश के इतिहास में कभी नहीं हुई है।

- कुछ दिन पहले कुछ गन्ना किसान मुझसे मिलने दिल्ली आये थे और मैंने उनसे कहा था कि जल्द ही गन्ना किसानों को एक खुशखबरी सुनने को मिलेगी और वही वादा निभाने मैं शाहजहांपुर आया हूं।

- यूपी में इस साल 4 गुना अधिक धान की खरीदारी हुई है।

- यूपी में फसलों की खरीद में पारदर्शिता आने के बाद किसानों को फायदा मिला है।

- चीनी के आयत पर 100% शुल्क लगाया गया है, 20 लाख टन चीनी निर्यात करने की अनुमति दे दी गयी है और चीनी के लिए एक न्यूनतम मूल्य तय किया गया है ताकि चीनी मिल नुकसान का बहाना ना बना पाएं। प्रति क्विंटल पर 5.50 रुपये की अतिरिक्त मदद सीधे किसानों के खाते में जमा की जा रही है।

- गन्ने की लागत पर 80 प्रतिशत फायदा मिलेगा।

- पिछली सरकारें किसका भला करना चाहती थी।

- पिछली सरकारों को किसानों के सुख-दु:ख की परवाह नहीं थी।

- पिछली सरकारों ने विदेशों से यूरिया मंगाया।

- जब कांग्रेस का राज था तब दिल्ली से चला 1 रुपया गाँव में पहुंच कर 15 पैसे बन जाता था।

- उन्हें न देश दिखता है, न देश का किसान दिखता है। उन्हें पीएम की कुर्सी के अलावा कुछ भी नहीं दिखता है।



- मेरा गुनाह ये है कि मैं भ्रष्टाचार और परिवारवाद के खिलाफ लड़ रहा हूं।

- लालबत्ती का डर दिखाने वालों से मैंने लालबत्ती छीन ली।

- कल संसद में मैंने पूछ अविश्वास का कारण बताओ तो वो गले पड़ गए।

- कांग्रेस ने देश की जनता को अंधेरे में रखा आज हम उनके घरों में उजाला पहुंचा रहें हैं।

- जब आवश्यकता से अधिक चीनी की पैदावार होती है तो किसानों का पैसा फंस जाता है। सरकार ने फैसला लिया कि गन्ने से सिर्फ चीनी ही पैदा ना हो बल्कि इससे गाड़ियों के लिए ईंधन भी बने। इसके लिए गन्ने से इथेनॉल बनाने और उसे पेट्रोल में मिक्स करने का निर्णय लिया गया।

- हमारा निरंतर प्रयास है कि गन्ना किसान की एक-एक पाई उस तक समय पर पहुंचे। पुरानी सरकारों ने दशकों से जो व्यवस्थाएं बना रखी थीं, जो गठजोड़ बना रखे थे, उनको तोड़ा जा रहा है। पहले की सरकारों ने जो हज़ारों करोड़ का बकाया छोड़ रखा था उसको निश्चित समय सीमा में निपटाया गया।

- जब दल के दल हो तो वो दलदल हो जाता है और जितना ज्यादा दलदल होता है उतना ज्यादा कमल खिलता है।

- लोकतंत्र को धमकाने का विपक्ष का फार्मूला आगे काम नहीं आने वाला है।

- उन्हें लगता है कि व्यवस्था से खिलवाड़ का खेल यूं ही चलता रहेगा।

- अहंकार, दंभ और दमन के संस्कार आज का युवा भारत सहने को तैयार नहीं है। चाहे साइकिल हो या हाथी, किसी को भी बना लो साथी, अब स्वांग नहीं चलेगा।

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