आ गया वो वक्त ... जानवरों के लिए खरीदना पड़ रहा पानी 

आ गया वो वक्त ... जानवरों के लिए खरीदना पड़ रहा पानी पानी की किल्लत.. 

हम आपको पानी संकट एक और रुप दिखाते हैं, गाय-भैंस को भी खरीदकर पानी पिलाना पड़ता है... किसान हजारों रुपए खर्च कर आरओ प्लांट खरीदने को मजबूर हैं।

लखनऊ। इंसानों के लिए नहीं जानवरों के लिए भी पानी का संकट गहराने लगा है। उत्तर प्रदेश के मथुरा जैसे इलाकों में पशुओं की प्यास बुझाने के लिए पानी खरीदना पड़ता है, जिस कृष्ण की नगरी के बारे में कहा जाता है लाखों गाये रहती थी, दूध की नदियां बहा करती थीं, वहां के पशुपालक अपनी गायों को आरओ का पानी पिलाने को मजबूर हैं।

"रोज अपने लिए तो पानी खरीदना ही पड़ता है साथ ही पशुओं के लिए पानी खरीदना पड़ता है। गाँव में पानी की समस्या आज से नहीं है बरसो से हमारे और आसपास के गाँवों में सुबह पानी के टैंकर आते है और पानी खरीदा जाता है।" ऐसा बताते हैं, देवेंद्र यादव। मथुरा जिले के फरह ब्लॉक के मखदूम गाँव में देवेंद्र रहते है। इस गाँव में लगभग सभी लोग अपने लिए तो पानी खरीदते है साथ ही पशुओं के लिए भी खरीदते है। ताकि उनका स्वास्थ्य न खराब हो और उनके दूध उत्पादन पर कोई असर न पड़े।

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देशभर में पानी की समस्या गंभीर रूप से बढ़ रही है। कुएं, तालाब, जलाशय सूख रहे हैं और नदियों में पानी का स्तर कम हो रहा है। ऐसे में वो दिन दूर नहीं जब भारत में पानी की कमी से पशुधन खत्म हो जाएगा। "जीने के लिए पानी जितना इंसानों के लिए जरूरी है उतना ही जानवरों के लिए अगर यही स्थिति रही तो पशुधन भी खत्म हो सकता है। पिछले कई सालों से पानी की समस्या बढ़ रही है। कई इलाकों में बुरी स्थिति है। लोग अपने लिए ही पानी नहीं जुटा पा रहे है पशुओं को कैसे पालेंगे। "ऐसा बताते हैं, पशुपालन वैज्ञानिक डॉ आनंद सिंह।

हरियाणा का मेवात जिला, राजस्थान के अलवर, भरतपुर व धौलपुर जिले और साथ लगते उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में आता हैं। इस जिले में पशुओं के लिए पानी का संकट है। पिछले कई वर्षों से पशुपालन कर रहे एम.ए तरार बताते हैं, " जिले में ग्राउंड वाटर बचा ही नहीं है। जो तालाब और पोखर है वो मार्च तक खाली हो जाते है। लोगों को अपने जानवरों को जिंदा रखने के लिए कई कई किलोमीटर दूर पानी लाना पड़ता है और यह समस्या अभी की नहीं है बल्कि कई वर्षों से चल रही है। इस पर सरकार भी कोई ध्यान नहीं देती है। गर्मी शुरू होते ही पानी लाने का काम शुरू हो जाता है।" देखिए वीडियो

पानी की किल्लत.. देखिए हालात। फोटो- गांव कनेक्शन

देश में भूमिहीन एवं सीमांत किसान के लिए पशुधन उनके जीवनयापन का एक जरिया है। 19वीं पशुधन गणना, 2012 के अनुसार देश में कुल पशुधन 512.05 मिलियन है। भूमिहीन और सीमांत किसानों के लिए डेयरी उद्योग आजीविका के साधन और खाद्य सुरक्षा के रूप में विकसित हुआ है। लगभग 8 करोड़ किसान डेयरी व्‍यापार से जुड़े हुए हैं और ये कुल दुधारू पशुओं के 80 प्रतिशत का पालन-पोषण करते हैं।

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राजस्थान में पानी व चारे की समस्या के चलते प्रतिवर्ष सैकड़ों की संख्या में भेड़ और ऊंट पालक पलायन करते है और बरसात शुरू होते ही यह वापस राजस्थान लौट जाते है। राजस्थान के सीकर जिले में रहने वाले सूरभान सिंह बताते हैं, "राजस्थान के कई जिलों में गर्मी शुरू होते ही पानी और चारे की समस्या होने लगती है ऐसे में पशुपालक कुछ ऐसे क्षेत्रों जहां पानी की कमी नहीं है। और कुछ महीनों तक वहीं डेरा बसाते है। यह स्थिति हर साल रहती है।

पशुपालन में पानी की बर्बादी को रोकने के बारे में डॉ आनंद सिंह बताते हैं, "पशुओं को नहलाने और पशुशाला को साफ करने में पानी की सबसे ज्यादा बर्बादी होती है। ऐसे में जो किसान व्यवसायिक डेयारियां चला रहे है उनको 500 स्क्वायर फीट के तालाब बना लेने चाहिए। इन तालाबों में 15 से 20 पशुओं को नहला सकते है। इस पानी को सिंचाई में भी प्रयोग कर सकते है। इसके अलावा पशुशाला को दो से तीन सेंटीमीटर की ढालन देते हुए बनवाना चाहिए ताकि उसकी साफ-सफाई करने के लिए ज्यादा पानी की आवश्यकता न पड़ें।"

पशुओं को साफ पानी की आवश्यकता के बारे में डॉ सिंह आगे बताते हैं, "जैसे इंसानों के लिए पानी बहुत जरूरी है वैसे ही पशुओं के लिए भी पानी बहुत जरूरी है। अगर पशुओं को साफ पानी नहीं मिलेगा तो पैरासाइट्स के जरिए सीधा असर पशु की पाचन क्रिया पर पड़ता है। पशु कम खाता है और उसका दूध उत्पादन भी घट जाता है। एक पशु को एक दिन में 40 से 50 लीटर पानी की आवश्यकता होती है।"

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मथुरा जिले के मगोर्रा में महिलाओं को पांच से छह किलोमीटर दूर पानी भरने के लिए जाना पड़ता है। यह पानी सिर्फ उनके लिए ही नहीं बल्कि पशुओं के लिए भी होता है। पानी के कारण आने वाली समस्याओं के बारे में महाराज सिंह बताते हैं, "गाँव में जो पानी आता है उससे पशु को नहला सकते है। खारा पानी होने के कारण पशुओं को नहीं देते है। पानी खरीदना पड़ता है इसके लिए आसपास के कई गाँवों ने बड़े पशुओं को पालना बंद कर दिया है।"

जलवायु परिवर्तन के कारण पिछले तीन साल से दक्षिण अफ्रीका के शहर केपटाउन में सूखा पड़ रहा है, जिससे पानी की भारी किल्लत हो रही है। आज यह स्थिति है कि केपटाउन शहर के पास कुछ दिनों का ही पानी बचा है। दक्षिण अफ्रीका की इस समस्या से भारत को सीख लेनी चाहिए। देखिए वीडियो

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