झारखंड: PM को ज्ञापन सौंपना चाहते थे विस्थापित लोग, ठंड में रात गुजारने के बाद भी नहीं हुई मुलाकात

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झारखंड: PM को ज्ञापन सौंपना चाहते थे विस्थापित लोग, ठंड में रात गुजारने के बाद भी नहीं हुई मुलाकात

हरिओम राय

पलामू, झारखंड। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को झारखंड के पलामू में मंडल बांध का शिलान्यास किया। वहीं, इस बांध की वजह से विस्थापित करीब 1600 परिवार अपनी जमीन के उचित मुआवजे की मांग को लेकर बांध निर्माण स्थल से प्रधानमंत्री के कार्यक्रम स्थल तक (करीब 60 किलोमीटर) पद यात्रा निकाल रहे थे। लेकिन जैसे ही इनकी पदयात्रा शुरू हुई पुलिस व अर्ध सैनिक बल के जवानों ने इन्हें रोक लिया और आगे नहीं बढ़ने दिया।

विस्थापन का दंश झेल रहे ये लोग मुआवजे की मांग को लेकर प्रधानमंत्री से मिलकर अपना ज्ञापन देना चाहते थे। प्रधानमंत्री के आगमन से एक दिन पहले इन विस्थापितों का कारवां बढ़ा ही था कि वहां मौजूद पुलिस के जवानों ने बैरिकेडिंग कर उनकी यात्रा वहीं रोक दी।

हालांकि इन लोगों ने वहीं रुक कर प्रदर्शन जारी रखा जिससे प्रदर्शनकारियों को रात भर खुले आसमान के नीचे ही रात गुजारनी पड़ी। सुबह करीब 10:30 बजे प्रधानमंत्री का आगमन हुआ लेकिन बावजूद इसके उन्हें ज्ञापन तक सौंपने नहीं दिया गया।

प्रदर्शन में शामिल सिकुआ देवी ज़मीन के बदले ज़मीन की मांग करते हुए कहती हैं "हम सरकार के पीछे तब तक पड़े रहेंगे जब तक हम लोगों को उचित मुआवजा व परिवार में किसी को नौकरी नहीं मिल जाती।" वहीं मंगरु सिंह ने बताया कि सरकारी रिकॉर्ड में नौकरी व पैसे का भुगतान लिख दिया गया है लेकिन वह कब मिलेगा पता नहीं।

इस मामले को जोरशोर से उठा रहे झारखंड सरकार में पूर्व में मंत्री रहे के.एन त्रिपाठी कहते हैं "विस्थापित परिवारों की विभिन्न मांगो को लेकर हमने प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा था, लेकिन उनके आगमन से पहले ही मुझे पुलिस हिरासत में ले लिया गया।'' इस बारे में जब पलामू के आयुक्त मनोज झा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

मंडल बांध क्षेत्र के लोग दो मुद्दों पर विरोध कर रहे हैं। पहला- विस्थापितों को भूमि अधिग्रहण कानून के मुताबिक उचित मुआवजा देने की मांग है। दूसरा- प्रस्तावित डैम का लगभग 80 फीसदी पानी बिहार में जाना है, इसलिए प्रभावित ग्रामीणों की मांग है कि जहां पर बांध बन रहा है वहां के 4 जिलों को भी पानी दिया जाए।

  

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