भारत ने P-5 के सामने किया PAK की करतूत का खुलासा, जानिए क्‍या है P-5

विदेश सचिव विजय गोखले ने पी-5 समेत 25 देशों के भारत स्थित उच्चायोग के प्रमुखों से मुलाकात की है।

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भारत ने P-5 के सामने किया PAK की करतूत का खुलासा, जानिए क्‍या है P-5

लखनऊ। जम्‍मू कश्‍मीर के पुलवामा में गुरुवार को आतंकी हमला हुआ। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए। इस हमले के बाद भारत कूटनीतिक रूप से पाकिस्तान को अलग-थलग करने की कवायद में जुट गया है। इसके लिए विदेश सचिव विजय गोखले ने शुक्रवार को प्रमुख देशों के दूतों से मुलाकात की। इसमें पी-5 देश अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस और यूके भी शामिल हैं।

विदेश सचिव विजय गोखले ने पी-5 समेत 25 देशों के भारत स्थित उच्चायोग के प्रमुखों से मुलाकात की है। भारत ने इन देशों को पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और पुलवामा हमले में पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद की भूमिका के बारे में जानकारी दी है। इन देशों ने इस आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है।

क्‍या है पी-5?

यूनाइटेड नेशंस सिक्‍योरिटी काउंसिल (यूएनएससी) के पांच स्‍थायी सदस्‍यों को पी-5 के नाम से जाना जाता है। पी-5 यानी कि परमानेंट 5 और इस पी-5 में अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस और यूके शामिल है। पी-5 देशों का प्रतिनिधित्‍व ऐसे देश करते हैं जिन्‍हें द्वितीय विश्‍व युद्ध के बाद काफी ताकतवर देश माना गया। हर स्‍थायी सदस्‍य के पास वीटो पावर होता है। इस ताकत की वजह से किसी भी तरह के बदलाव या फिर रिफॉर्म के लिए इन देशों की मंजूरी जरूरी है। यूनाइटेड नेशंस सिक्‍योरिटी काउंसिल का उत्तरदायित्व है अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना।

भारत ने पाकिस्‍तान से वापस लिया एमएफएन का दर्जा

इससे पहले शुक्रवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में CCS की अहम बैठक हुई। इसमें पाकिस्‍तान को दिये गये मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) के दर्जे को वापस ले लिया है। मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) का मतलब है कि इंटरनेशनल ट्रेड नियमों के आधार पर व्यापार में सर्वाधिक तरजीह वाला देश। इसके तहत आयात-निर्यात में उस देश को विशेष छूट मिलती है। एमएफएन का दर्जा प्राप्‍त देश से कारोबार सबसे कम आयात शुल्क पर होता है।

पुलवामा में क्‍या हुआ?

जम्मू-कश्मीर में कल अब तक के सबसे बड़ा आत्मघाती आतंकी हमला हुआ। फिदायीन हमलावर ने 350 किलो विस्फोटक से लदी गाड़ी जवानों के काफिले से टकरा दी। इसमें सीआरपीएएफ के 40 जवान शहीद हो गए। हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली है। सीआरपीएफ के जिस काफि‍ले पर हमला हुआ उसमें 70 गाड़ियां थीं जिसमें 76वीं बटालियन के करीब 2500 जवान जम्मू से श्रीनगर जा रहे थे।

  

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