यौन शोषण मामले में गुरमीत राम रहीम को 10 साल का सश्रम कारावास

यौन शोषण मामले में गुरमीत राम रहीम को 10 साल का सश्रम कारावासबाबा राम रहीम।

लखनऊ। रेप केस में दोषी डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को आज सीबीआई की विशेष अदालत ने 10 साल की सजा सुना दी है। इसके लिए रोहतक जेल में कोर्ट रूम बनाया गया था। जेल के आसपास किसी भी संदिग्ध को देखते ही गोली मारने के आदेश थे। हरियाणा और पंजाब में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सैकड़ों डेरा समर्थकों को पहले ही हिरासत में ले लिया गया है। सेना, अर्धसैनिक बल और राज्य पुलिस के जवानों तैनात किया गया है। रोहतक, सिरसा सहित कई जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं। मोबाइल इंटरनेट सेवाए ठप्प कर दी गई हैं। रोहतक को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।

ऐसा पहली बार होगा जब हरियाणा के किसी जेल परिसर में अदालत लगाकर सजा सुनाई हुई। 15 साल पुराने इस मामले में सब्र और हिंसा के बाद पीड़ि साध्वियों को न्याय मिला। सीबीआई के विशेष जज जगदीप सिंह हेलीकॉप्टर के जरिए पंचकूला से रोहतक पहुंचे थे।

यहां से वह सुनारिया जेल के लिए रवाना हुए। सुनारिया रोहतक से दस किलोमीटर दूर है। उन्हें जेड प्लस सुरक्षा दी गई थी। सजा सुनाने के बाद जगदीप सिंह को तुरंत कड़ी सुरक्षा में वापस लाया गया। सजा के बाद होने वाली प्रतिक्रिया से निपटने के लिए हरियाणा सरकार ने कड़े बंदोबस्त किए हैं। पुलिस महानिदेशक बीएस संधू के अनुसार अर्धसैनिक बलों की 26 कंपनियां तथा पुलिस तैनात की जा चुकी है। सेना की कई कंपनियों को विकल्प के तौर पर रखा गया है। यदि कोई उपद्रव होता है तो देखते ही गोली मारने के आदेश दिए जा चुके हैं।

हम गुरमीत सिंह के लिए उम्र कैद की सजा चाहते थे: अंशुल छत्रपति

बलात्कारी बाबा राम रहीम के लिए दिवंगत पत्रकार रामचंदर छत्रपति के बेटे अंशुल उम्र कैद की सजा चाहते थे। "इस केस को रेयर ऑफ द रेयरेस्ट के दायरे में रख कर सजा का फैसला होना चाहिए था। इस तरह से आजीवन कारावास ही बनता है," अंशुल ने गाँव कनेक्शन को बताया। खुद को इतने बड़े अपराधी से लड़ने की हिम्मत और डर के बारे में उन्होंने कहा, "अगर डर होता तो ये बाबा जेल में नहीं होता। हां, सिस्टम को देखकर, जो बाबा के आगे नतमस्तक था, थोड़ा डर जरूर लगता था।"

केस से पीछे हटने के लिए अंशुल पर परोक्ष रूप दबाव बनाया गया पर वो हटे नहीं। "राम रहीम के बेटे की शादी पंजाब के पूर्व कांग्रेस विधायक महिन्दर सिंह जस्सी की बेटी के साथ हुआ था। इस तरह से अपने समधी के जरिए गुरमीत राम रहीम सिंह ने जरूर दबाव डलवाने का प्रयास किया। मुझसे कोई सीधे नहीं मिलने आया।"

सत्य की इस लड़ाई में अच्छे-बुरे की पहचान जरूर हो जाती है, "हमारे पिताजी का केस लड़ने वाले जितने भी वकील थे, उन्होंने पैसा नहीं लिया, उनका एक समर्पण था, इसीलिए कभी भी उनकी निष्ठा पर शंका नहीं हुई कि डेरे के पैसे के आगे झुक भी सकते हैं," अंशुल ने बताया, "हमने पूरी लड़ाई बिना पैसे व बिना फीस के लड़ी। इसमें मीडिया ने भी पूरा साथ दिया।"

"सीबीआई के अफसर सतीश डागर, सभी वकील साथी और मेरे घर के लोगों ने पूरा साथ दिया," अंशुल ने बताया।

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