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कांग्रेस ने फिर खेला कर्जमाफी का कार्ड

चुनावी साल में किसान और उनकी समस्या चुनाव प्रचार के केंद्र में हैं। किसान हर पार्टी के लिए बड़ा वोट बैंक है। कांग्रेस हर चुनाव में किसान और कर्जमाफी दोनों को बड़ा मुददा बनाती है। वर्ष 2014 के बाद हुए सभी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने यह मुद्दा बनाया, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। अब राजस्थान, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, मिज़ोरम और छत्तीसगढ़ में चुनाव होने हैं। ऐसे में कांग्रेस कर्जमाफी को बड़ा मुददा बनाए हुए है।

Chandrakant MishraChandrakant Mishra   10 Nov 2018 7:54 AM GMT

कांग्रेस ने फिर खेला कर्जमाफी का कार्ड

लखनऊ। चुनावी साल में किसान और उनकी समस्या चुनाव प्रचार के केंद्र में हैं। इसे भांपते हुये भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां खुद को किसान हितैषी बता रही हैं। किसान हर पार्टी के लिए बड़ा वोट बैंक है। किसानों को अपने पक्ष में करने के लिए हर पार्टी अपने को किसान हितैषी बताती है, लेकिन कांग्रेस हर चुनाव में किसान और कर्जमाफी दोनों को बड़ा मुददा बनाती है। वर्ष 2014 के बाद हुए सभी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने यह मुद्दा बनाया, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। अब राजस्थान, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, मिज़ोरम और छत्तीसगढ़ में चुनाव होने हैं। ऐसे में कांग्रेस कर्जमाफी को बड़ा मुददा बनाए हुए है।

पांच राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कर्जमाफी की हथियार बनाते दिख रहे हैं। पिछले दिनों मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुई चुनावी रैली में राहुल गांधी ने कर्जमाफी को लेकर तमाम दावे और वादे किए। शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने रोड शो के दौरान प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद किसानों के कर्जमाफी की बात कही।

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मध्य प्रदेश के हरदा निवासी जगदीश सरन का कहना है," हर पार्टी किसान को अपना हितैषी बनाने में लगी है। जब चुनाव का वक्त आता है तो सबकों किसानों की फिक्र होने लगती है। अब चुनाव नजदीक है तो भाजपा और कांग्रेस किसानों के लिए बड़े-बड़े वादे और दावे कर रही हैं। लेकिन सरकार बनने के बाद कोई हमारी खबर लेने नहीं आता है। राहुल गांधी ने कह रहे हैं कि हमारी सरकार बनी तो किसानों के सभी कर्ज माफ कर दिए जाएंगे। मुझे लगता है कि कांग्रेस को इस बात का फायदा जरूर मिलेगा, क्योंकि भाजपा की नीतियों से मध्य प्रदेश का किसान बहुत परेशान है।"

राजस्थान के जयपुर निवासी किसान ओम प्रकाश (35वर्ष) का कहना है, " किसानों के अच्छे दिन का वादा सभी पार्टियां करती हैं, लेकिन अच्छे दिन लाता कोई नहीं है। अब चुनाव पास है तो सभी को किसानों की याद आ रही है। भाजपा और कांग्रेस दोनों किसानों को रिझाने में लगे हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद किसानों की किसी को याद नहीं आती है। सिर्फ कर्जमाफी कर देने से किसानों का भला नहीं होने वाला है। "

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साल 2004 में हुए आम चुनाव में किसानों की कर्जमाफी का वादा कांग्रेस पक्ष में रहा और केंद्र में उसकी सरकार बन गई। तब कांग्रेस के अगुआई में बनी यूपीए सरकार ने किसानों के 70 हजार करोड़ रुपये माफ किए थे। अब पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस कर्जमाफी को मुद्दा बना रही है। अब आने वाला वक्त ही बताएगा कि कर्जमाफी का कितना फायदा कांग्रेस को मिलता है।


भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश प्रवक्ता आलोक वर्मा का कहना है, " कांग्रेस ने 60 साल देश पर राज किया, बावजूद इसके किसानों की हालत में कोई सुधार नहीं कर सकी। अब किसान जागरूक हो गया तो सभी को किसानों की चिंता होने लगी है।

किसानों को कर्ममाफी नहीं बल्कि उनके फसलों का उचित मूल्य मिले किसान यह चाहता है। चूंकि चुनाव पास है तो सभी पार्टी के लोग किसानों को लुभाने में लगे हैं।"

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उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में भी कर्जमाफी का बड़ा मुददा बनाया था। खूब दावे-वादे किए गए थे। इस चुनाव में भाजपा ने भी कर्जमाफी की घोषणा की थी।

सरकार भाजपा की बनी। योगी आदित्यानाथ के नेतृत्व में बनने वाली सरकार ने अपनी पहली ही कैबिनेट की बैठक में कर्जमाफी की घोषणा कर दी थी।

कर्नाटक में 34000 करोड़ की कर्जमाफी का ऐलान

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी जुलाई माह में अपना पहला बजट पेश किया था। उन्होंने किसानों की कर्ज माफी की घोषणा की। विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस और जेडीएस ने अपने-अपने घोषणापत्र में इसका ऐलान किया था। एक अनुमान के मुताबकि राज्य में 53,000 करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया जाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह गठबंधन सरकार अपना वादा पूरा करती है तो इससे राज्य की राजकोषीय व्यवस्था प्रभावित होगी।

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वर्ष 2008 में कांग्रेस सरकार ने 70 हजार करोड़ रुपये माफ किये। पिछली साल उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने 36 हजार करोड़ का कर्ज माफ किया। वहीं कर्नाटक सरकार ने भी लगभग इतने का ही कर्ज माफी की योजना बनाकर तैयार रखी हुई हैं। लेकिन सवाल यह हैं कि क्या कर्जमाफी से स्थिति सुधरेगी। अभी कुल 3 लाख 28 हजार करोड़ का कर्ज हैं जिसको माफ करने के लिए सरकार पर दबाव बनाया जा रहा हैं। सवाल यह भी हैं कि यह पैसा आएगा कहाँ से? और फिर इस तरह से कर्जमाफी क्या मुफ्तखोरी को बढ़ावा नही देगी?


पंचायत में भी कांग्रेस की सरकार है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर भी किसानों के कर्जमाफी का दांव खेलने की तैयारी में है। पंजाब के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी विश्वजीत खन्ना ने माना कि 1.25 लाख किसानों की वेरीफिकेशन हो गई है जिनका दो लाख रुपये तक का कर्ज माफ किया जाएगा।

जल्द ही तारीख की घोषणा करके यह राशि किसानों को दे दी जाएगी। उन्होंने बताया कि इस कर्ज माफी पर 800 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सहकारी बैंकों से कर्ज लेने वाले सीमांत किसानों को दो लाख रुपये तक की कर्ज राहत दी जा चुकी है।

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केंद्र में राजग सरकार बनने के बाद महाराष्ट्र , हरियाणा, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, गोवा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर आदि राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए। लगभग सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कर्जमाफी को मुद्दा बनाया, लेकिन इनमें से पंजाब को छोड़कर किसी भी राज्य में कांग्रेस की सरकार नहीं बन सकी।

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